बुद्ध की शिक्षाएं pdf

Buddh Ki Shikshayein pdf

GkExams on 16-01-2021


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Download in pdf बुद्ध के उपदेश

बुद्ध की कहानी बौद्ध धर्म के संस्थापक सिदार्थ थे जिन्हें गौतम के नाम से भी जाना जाताहै ।
उनका जन्म लगभग 2500 वर्ष पूर्व हुआ था ।
यह वह समय था जब लोगों के जीवन में तेजी से परिवर्तन हो रहे थे ।
महाजनपदों के कुछ राजा इस समय बहुत शक्तिशाली हो गए थे ।
हजारों सालों के बाद फिर से नगर उभर रहे थे ।
गाँवों के जीवन में भी बदलाव आ रहा था ।
बहुत-से विचारक इन परिवर्तनोंको समझने का प्रयास कर रहे थे ।
वे जीवन के सच्चे अर्थ को भी जानना चाह रहे थे ।
बुद्ध क्षत्रिय थे तथा ‘शाक्य’ नामक एक छोटे से गण से संबंधित थे ।
युवावस्था में ही ज्ञान की खोज में उन्होंने घर के सुखों को छोड़ दिया ।
अनेक वर्षों तक वे भ्रमण करते रहे तथा अन्य विचारकों से मिलकर चर्चा करते रहे ।
अंततः ज्ञान प्राप्ति के लिए उन्होंने स्वयं ही रास्ता ढूँढ़ने का निश्चय किया ।
इसके लिए उन्होंने बोध् गया बिहार में एक पीपल के नीचे कई दिनों तक तपस्या की ।
अंततः उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ ।
इसके बाद स वे बुद्ध के रूप में जाने गए ।
यहाँ से वे वाराणसी के निकट स्थित सारनाथ गए, जहाँ उन्होंने पहली बार उपदेश दिया ।
कुशीनारा में मृत्यु से पहले का शेष जीवन उन्होंने पैदल ही एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करने और लोगों को शिक्षा देने में व्यतीत किया ।
बुद्ध ने शिक्षा दी कि यह जीवन कष्टों और दुखों से भरा हुआ है और ऐसा हमारी इच्छा और लालसाओं जो हमेशा पूरी नहीं हो सकतीं के कारण होता है ।
कभी-कभी हम जो चाहते हैं वह प्राप्त कर लेने के बाद भी संतुष्ट नहीं होते हैं एवं और अधिक अथवा अन्य वस्तुओं को पाने की इच्छा करने लगते हैं ।
बुद्ध ने इस लिप्सा को त×हा (तृष्णा) कहा है ।
बुद्ध ने शिक्षा दी कि आत्मसंयम अपनाकर हम ऐसी लालसा से मुक्ति पासकते हैं ।
उन्होंने लोगों को दयालु होने तथा मनुष्यों के साथ-साथ जानवरों केजीवन का भी आदर करने की शिक्षा दी ।
वे मानते थे कि हमारे कर्मों के परिणाम, चाहे वे अच्छे हों या बुरे, हमारे वर्तमान जीवन के साथ-साथ बाद के जीवन को भी प्रभावित करते हैं ।
बुद्धने अपनी शिक्षा सामान्य लोगों की प्राकृत भाषा में दी ।
इससे सामान्य लोग भी उनके संदेश को समझ सके ।

बुद्ध ने कहा कि लोग किसी शिक्षा को केवल इसलिए नहीं स्वीकार करें कि यह उनका उपदेश है, बल्कि वे उसे अपने विवेक से मापें ।
आओ देखो, उन्होंने ऐसा किस प्रकार किया ।

किसागोतमी की कहानी


यह बुद्ध के विषय में एक प्रसिद्ध कहानी है ।
एक समय की बात है किसागोतमी नामक एक स्त्री का पुत्र मर गया ।
इस बात से वह इतनी दुःखी हुई कि वह अपने बच्चे को गोद में लिए नगर की सड़कों पर घूम-घूमकर लोगों से प्रार्थना करने लगी कि कोई उसके पुत्रा को जीवित कर दे ।
एक भला व्यक्ति उसे बुद्ध के पास ले गया ।
बुद्ध ने कहा, ‘‘मुझे एक मुट्ठी सरसों के बीज लाकर दो, मैं तुम्हारे पुत्र को जीवित कर दूँगा’’ ।
किसागोतमी बहुत प्रसन्न हुई ।
पर जैसे ही वह बीज लाने के लिए जाने लगी तभी बुद्ध ने उसे रोका और कहा, ‘‘ये बीज एक ऐसे घर से माँग कर लाओ जहाँ किसी की मृत्यु न हुई हो ।
’’किसागोतमी एक दरवाजे से दूसरे दरवाजे गई लेकिन वह जहाँ भी गई उसने पाया कि हर घर में किसी न किसी के पिता, माता, बहन, भाई, पति, पत्नी, बच्चे, चाचा, चाची, दादा या दादी की मृत्यु हुई थी ।



Comments Khushboo on 17-09-2021

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बृद्धिचंद on 28-04-2020

एक दूसरे पर अन्याय करता या दूसरे को तड़पाता है
लेकिन
दूसरा दूसरे को न्याय दिलाता है और दूसरे के दुख को कम करता है |
दोनों के बुरे और अच्छे कार्यो का क्या परिणाम होगा?


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