बैगा जनजाति की भाषा

Baiga JanJati Ki Bhasha

GkExams on 15-01-2019

राष्ट्रीय मानव कहे जाने वाले बैगाओं की विलुप्त हो रही बैगानी भाषा को संजोने की कवायद फ्लॉप होती नजर आ रही है। राज्य शिक्षा केन्द्र से मिले निर्देशों के एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अब तक बैगानी इनवेंटरी तैयार नहीं हो सकी है।

ये थी योजना


बैगाचक क्षेत्र के विद्यालयों में बैगा छात्रों को अध्यापन कार्य कराने के लिए उनकी ही बैगानी भाषा में इनवेंटरी तैयार कर जुलाई सत्र से इस इनवेंटरी के आधार पर अध्यापन कार्य भी शुरू होना था। इनवेंटरी में बैगाओं की प्रचलित भाषा का बारीकी से अध्ययन कर पुस्तकों के हिन्दी शब्दावली को बैगानी भाषा में बदलकर शब्दावली तैयार करने की योजना थी।


प्रमुखता से बैगा बाहुल्य क्षेत्र समनापुर, बजाग व करंजिया विकासखंड के गांवों में इसे फोकस किए जाने की योजना थी। साथ ही विद्यालयों में शिक्षकों को भी बैगानी शब्दावली का प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित भी किया जाना था।


विलुप्त होने की कगार


बैगा चकक्षेत्र में भी बैगानी भाषा विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई है। विद्यालयों में अध्ययन करने वाले बैगा विद्यार्थी भी हिन्दी शब्दावली का अधिक प्रयोग कर रहे हैं। ऐसे में बैगा जनजाति की भाषा खतरे में पड़ती हुई दिख रही है। वहीं विभागीय अधिकारियों की ही माने तो राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा परिणाम अच्छे आने पर पड़ोसी जिलों के बैगा बाहुल्य गांव में भी इनवेंटरी के माध्यम से अध्यापन कार्य कराने की योजना थी, जो पहल अब केवल कागजों में ही सिमटकर रह जाने वाली नजर आ रही है।


राज्य शिक्षा केन्द्र से निर्देश तो मिले थे, लेकिन उस समय मैं नहीं था। जहां तक मुझे जानकारी है एक एनजीओ को बैगानी इनवेंटरी तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया था, लेकिन उसमें क्या हुआ इसके बारे में जानकारी लेकर मैं आपको सोमवार को ही कुछ बता पाऊंगा। रावेन्द्र मिश्रा, जिला समन्वयक, सर्व शिक्षा अभियान डिंडौरी

सत्र 2013-14 में बैगानी भाषा में इनवेंटरी बनाया जाना था। ऊपर से निर्देश भी मिले थे, लेकिन वह अब तक नहीं बन पाया है। पैसे को लेकर भी समस्या तो है, लेकिन इसको देखना पड़ेगा। इस ओर पहल अब की जाएगी।



Comments Sayanlal markam on 16-09-2020

यह कानून होना चहिए पर बालाघाट जिले के कई बैगे बच्चे स्नातक करके घर में बैठे है। और बोलते हैं,राष्ट्रीय मानव अगर कोई भी बालक 12वीं या डिग्री रखता है तो उसे भटने नहीं देना चाहिए। उनको उसकी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार नौकरी देना चाहिए। जिससे उनको उत्सह मिले।,और आने वाली पीड़ी को बहेतर बाना सके।
पढेगा इंडिया तब तो बढेगा इंडिया
जय हिंद।.




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