बुंदेलखंड का नक्शा

Bundelkhand Ka Naksha

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GkExams on 20-11-2018


उत्तर प्रदेश के सात जिलों चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी और ललितपुर का भूभाग बुंदेलखंड कहलाता है। लगभग 29 हजार वर्ग किलोमीटर में फैले इस इलाके में कुल 24 तहसीलें, 47 ब्लाक और जनसंख्या लगभग एक करोड़ है। हालांकि राजनीतिक स्तर पर जिस पृथक राज्य की परिकल्पना है उसमें तेइस जिले हैं जिनमें मप्र के भिंड, मुरैना, शिवपुरी, गुना, विदिशा, रायसेन, नरसिंहपुर, सागर, दमोह, ग्वालियर, दतिया, जबलपुर, टीकमगढ़, भिंड, छतरपुर, पन्ना और सतना भी शामिल हैं।

बुंदेलखंड के लिए खुशी की बात है प्रस्ताव- राजा बुंदेला
04 अप्रैल
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। कभी बुंदेलखंड के लिए मर गया राजा बुंदेला जैसे बयान देकर खुद को पृथक राज्य की लड़ाई में अगुवा की भूमिका से अलग करने की बात कहने वाले बुंदेली सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजा बुंदेला भी भाजपा के बुंदेलखंड संबंधी प्रस्ताव से उत्साहित नजर आए। हमने फोन पर उनसे बात की...।
- बुंदेलखंड पर भाजपा ने एक अलग से प्रस्ताव पास किया है, आपकी प्रतिक्रिया...
यह तो बहुत खुशी की बात है, आप सभी को बधाई।
- भाजपा पर कितना विश्वास किया जा सकता है?
राजग के कार्यकाल में ही तीन राज्यों का गठन हुआ था, ऐसे में विश्वास की बात की जा सकती है।
- और कांग्रेस..
कांग्रेस किसी भी मुद्दे को समाप्त करना नहीं जानती। उसकी मंशा साफ है। भ्रम की स्थिति बनाए रखती है। इसलिए ही हमने कांग्रेस छोड़ दी थी।
- ... तो आप आशान्वित हैं?
मेरी लालकृष्ण आडवाणी से भी बात हुई थी तो उन्होंने भी छोटे राज्यों के निर्माण पर सहमति की बात कही थी।
- भाजपा का चुनाव में कितना भविष्य देखते हैं?
राहुल गांधी के हालिया बयान के बाद यह साफ है कि लड़ाई मनमोहन और नरेंद्र मोदी के बीच है। जनता कांग्रेस के दो कार्यकाल देख चुकी है और ऐसे में भाजपा का पलड़ा भारी है। ऐसा भी लगता है कि नरेंद्र मोदी अगले प्रधानमंत्री होंगे।
- आप क्या अब भी इस बयान पर हैं कि बुंदेलखंड के लिए राजा बुंदेला मर चुका है?
चुनाव में बहुत पैसा खत्म हो गया, लोगों से मांगमूंगकर लड़ा था। लोग अपेक्षाओं पर भी खरे नहीं उतरे इसलिए अगुवा तो नहीं बनूंगा कोई बुलाएगा तो जरूर आऊंगा। पैसा भी तो कमाना है, फिल्मों में काम कर रहा हूं।
आर्थिक सुधारों का मतलब यह नहीं कि रोजगार खत्म हो जाएं- उमा भारती
भाजपा की फायर ब्रांड नेता यह मानने को तैयार नहीं कि लालकृष्ण आडवाणी और मुलायम सिंह की बातों के राजनीतिक अर्थ निकलते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के आर्थिक सुधारों को भी घातक बताया। बातचीत...
- हिंदुत्व को लेकर उहापोह क्यों?
कहीं कोई गलतफहमी नहीं है। भारत में ऐसा कोई स्थान नहीं जिसमें हिंदुत्व न हो।
- मुलायम के बयान को लेकर...
(बात काटते हुए) आडवाणी की शख्सियत ऐसी है कि उनकी बड़ाई हर कोई करता है। उनकी बड़ाई करना मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक शालीनता है।
- राहुल गांधी ने कहा है कि आर्थिक सुधार चलते रहने चाहिए, आपकी टिप्पणी?
राहुल को अभी देश की राजनीति को समझने की जरूरत है। आर्थिक सुधारों से देश में बेरोजगारी बढ़े ऐसे सुधारों की जरूरत नहीं। एफडीआई का विरोध इसीलिए है।



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