त्रिपुरी संकट क्या है

Tripuri Sankat Kya Hai

Gk Exams at  2020-10-15

GkExams on 12-05-2019

त्रिपुरी संकट,1939
अंग्रेजी हुकूमत द्वारा प्रतिबंधित होने के कारण ‘इंडियन स्ट्रगल (1920-1934) ने सुभाष को अपार लोकप्रियता प्रदान की और इसकी पृष्ठभूमि में 1930 के दशक के मध्य में अपने यूरोपीय प्रवास के दौरान आज़ादी के संघर्ष को विदेशों में फैलाने के उद्देश्य से सुभाष चंद्र बोस ने कई यूरोपीय देशों की यात्रायें की। यही वह पृष्ठभूमि है जिसमें हरिपुरा अधिवेशन,1938 में गाँधी ने पटेल के विरोध और आपत्तियों को ख़ारिज करते हुए सुभाष को काँग्रेस का अध्यक्ष बनवाया, लेकिन सुभाष के अध्यक्षीय भाषण ने गाँधी को निराश किया। लेकिन, यह उनका उग्र संघ-विरोधी रूख था जिसके कारण उनके संबंधों में तल्खी आई और अंततः उसकी परिणति त्रिपुरी अधिवेशन,1939 में देखने को मिली। और फिर, उनके सम्बन्ध कभी मधुर नहीं हो पाए।



Comments Navendra on 13-11-2019

Gandhiji ka pura naam kya hai

NAVENDRA on 13-11-2019

Gandhi Ji Se Vivad Kyon hua tha

Arti Roriya on 24-05-2019

INA mukudma kya hai

अब्दुल खालिक अंसारी on 12-05-2019

1938 के हरिपुर अधिवेशन में सुभाषचंद्र बोस कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया
1939 के त्रिपुरी अधिवेशन में सुभाषचंद्र बोस ने पुनः आवेदन भरा तो गांधी जी ने पट्टाभिसीतारमैया को अपना उम्मीदवार बनाया लेकिन पट्टाभिसीतारमैया पराजित हो गए ।
गांधी जी ने पट्टाभिसीतारमैया की पराजय को अपनी पराजय माना ।
इसके बाद कांग्रेस के बड़े नेताओं ने सुभाषचंद्र पर दबाव बनाया कि वह अपनी कार्यकारिणी का गठन गांधीजी के परामर्श से करें लेकिन गांधीजी ने परामर्श देने से भी मना कर दिया
इसके बाद दबाव में आकर सुभाषचंद्र ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया ।
1939 में सुभाषचंद्र बोस ने फॉरवर्ड ब्लाक दल (कोलकाता में) गठन किया ।
ओर कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद बनें ।




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