इजारेदारी प्रथा क्या है

Ijaredari Pratha Kya Hai

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 12-05-2019

1772 में वारेन हेस्टिंग्स ने एक नयी भू-राजस्व पद्धति लागू की, जिसे इजारेदारी प्रथा के नाम से जाना गया है। इस पद्धति को अपनाने का मुख्य उद्देश्य अधिक भू-राजस्व वसूल करना था। इस व्यवस्था की मुख्य दो विशेषतायें थीं-



इसमें पंचवर्षीय ठेके की व्यवस्था थी। तथा

सबसे अधिक बोली लगाने वाले को भूमि ठेके पर दी जाती थी।

किंतु इस व्यवस्था से कम्पनी को ज्यादा लाभ नहीं हुआ क्योंकि इस व्यवस्था से उसकी वसूली में अस्थिरता आ गयी। पंचवर्षीय ठेके के इस दोष के कारण 1777 ई. में इसे परिवर्तित कर दिया गया तथा ठेके की अवधि एक वर्ष कर दी गयी। अर्थात अब भू-राजस्व की वसूली का ठेका प्रति वर्ष किया जाने लगा। किंतु प्रति वर्ष ठेके की यह व्यवस्था और असफल रही। क्योंकि इससे भू-राजस्व की दर तथा वसूल की राशि की मात्रा प्रति वर्ष परिवर्तित होने लगी। इससे कम्पनी को यह अनिश्चितता होती थी कि अगले वर्ष कितना लगान वसूल होगा। इस व्यवस्था का एक दोष यह भी था कि प्रति वर्ष नये-नये व्यक्ति ठेका लेकर किसानों से अधिक से अधिक भू-राजस्व वसूल करते थे। चूंकि इसमें इजारेदारों (ठेकेदारों या जमींदारों) का भूमि पर अस्थायी स्वामित्व होता था, इसलिये वे भूमि सुधारों में कोई रुचि नहीं लेते थे। उनका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक लगान वसूल करना होता था। इसके लिये वे किसानों का उत्पीड़न भी करते थे। ये इजारेदार वसूली की पूरी रकम भी कम्पनी को नहीं देते थे। इस व्यवस्था के कारण किसानों पर अत्यधिक बोझ पड़ा। तथा वे कंगाल होने लगे।



Comments Sachin Kumar on 23-11-2019

Imandari vyawastha

Sachin Kumar on 23-11-2019

Imandari vyawastha

इजारे दारी प्रथा का आरंभ किसने किया on 24-10-2019

इजारेदारी प्रथा

Tejveer singh on 26-09-2019

Kis mugal badshah ne ijaredari Partha ki suraat ki

आरबीआई बैंक का मुख्यालय कहां हैं on 24-09-2019

मुंबई

S S Chavhan on 23-07-2019

Ijaredari pratha kisne shuru kids?


Anupam patel on 09-01-2019

ijarederi pratha bangal ke pahle nawab mursheed kuli Khan dwara prarambh kiya gaya



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