आत्मकथा और जीवनी में अंतर

Atmkatha Aur Jeevani Me Antar

Gk Exams at  2018-03-25

Pradeep Chawla on 12-05-2019

आत्मकथा और जीवनी दोनों ही साहित्य की नई विधाएं हैं। दोनों ही व्यक्ति विशेष के जीवन की विविध घटनाओं एवं प्रसंगों के वर्णन की विधा है। आत्मकथा व्यक्ति के द्वारा स्वयं के जीवन के सन्दर्भ में लिखी गई कथा होती है जबकि व्यक्ति विशेष के जीवन पर जब कोई दूसरा व्यक्ति लिखता है तो उसे जीवनी कहते हैं। आत्मकथा और जीवनी में यही मूल अंतर है, परन्तु इसी अंतर के कारण और अनेक अंतर सामने आ जाते हैं।



जीवनी जहाँ किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा लिखी जाती है, वहाँ आत्मकथा में लेखक स्वयं अपनी जीवनी प्रस्तुत करता है। आत्मकथा में लेखक निजी जीवन से जुड़ी गहराईयों से जुड़ा होता है परन्तु जीवनी में लेखक चरित नायक के जीवन से शायद उतनी गहराई से नहीं जुड़ पाता है। आत्मकथा जीवनी की अपेक्षा अधिक विश्वसनीय होता है। आत्मकथा में लेखक अपना जीवनवृत स्वयं प्रस्तुत करता है और लेखक जितना स्वयं अपने बारे में जानता है उतना कोई दूसरा नहीं जानता। इसके विपरीत जब जीवनी लेखक किसी के बारे में कोई बात कहता है तो यह आशंका बनी रहती है कि शायद कुछ बात गोपनीय रह गई है, सत्य का कुछ अंश ढंका रह गया है।



आत्मकथा अपनी जीवनी अपने जीवन-काल में ही लिखता है, जबकि जीवनी का लेखन आवश्यक नहीं कि चरित नायक के जीवन काल में ही हो। आत्मकथाकार के पास अपने जीवन संबंधी सारी जानकारी अपने दिमाग में ही रहती है, वहीं जीवनीकार को यही सामग्री विभिन्न श्रोतों से इकट्ठी करनी पड़ती है। यदि चरित नायक इतिहास-पुरुष है तो जीवनीकार को उसके जीवन को लेकर व्यापक शोध करना पड़ता है।



जीवनी जहाँ वस्तुनिष्ठ होती है वहाँ आत्मकथा आत्मिक, आत्मनिष्ठ होती है। जीवनी में लेखक बाहर से भीतर की ओर प्रविष्ट होता है, जबकि आत्मकथा में लेखक अपने आतंरिक जीवन को बाहर लोगों के सामने प्रकट करता है। जीवनी में जहाँ बहुत-सी बातें अनुमान आश्रित रहती है वहाँ आत्मकथा में सब कुछ सत्य पर आश्रित होता है, स्वानुभव पर आधारित होता है।



कहा जा सकता है कि जीवनी एक ऐसी साहित्यिक विधा है जिसमें किसी व्यक्ति विशेष के जीवन की कथा किसी अन्य लेखक के द्वारा तटस्थ भाव से प्रस्तुत की गई कलात्मक रचना होती है। जबकि आत्मकथा स्वयं व्यक्ति के द्वारा अपनी ही जीवन-गाथा की वह प्रस्तुति है जो पूर्णतया निष्कपटपूर्ण गुण-दोषों पर प्रकाश डालते हुए बिना किसी कल्पना के कलात्मक ढंग से लिखी जाती है।



Comments Raj on 27-02-2020

जीवनी साहित्य में एक ही व्यक्ति को पमुखता दी ‌‌‌जाती है क्या

राकेश यादव on 10-12-2019

एकांकी के त त्व

Krishanpal rajput on 09-12-2019

Natak ekanki Mein antar

Jitendra kumar verma lohara on 02-12-2019

Atmkatha or jeevani me antar bataiye

Premlal on 28-11-2019

Jivani tatha atmakatha Mein antar

Giriraj on 16-06-2019

Dono me jyada satik ki mana jana chahiye


ananya sharma on 12-05-2019

Jeevani atmakadha m antra hindi m

नीतू on 12-05-2019

जीवनी लिखने की कला कौशल

Kartik Thakur on 22-02-2019

Jai Shankar Prasad ki Pramukh Rachna hai

Swati patel on 17-02-2019

Aadhunik kal ki visheshta

Swati Patel on 17-02-2019

Adhunik Kaal Ki visheshta Hai Uska mahatva

Soman Patel on 16-02-2019

Atamkath and jivni me anter


Muskan on 13-02-2019

Aatma katha or jivani me antar

Prashant on 12-02-2019

Mahakavya khandkavya me antar

Sujal on 24-01-2019

Jivanikyahai

Baadal on 18-12-2018

Jay bhim on 25-11-2018

Jay bhim

Sumit on 27-09-2018

Jivni and aatm katha me defrance


sumar khan barmer on 27-09-2018

sansmarn or bhenvarta me kya anter h

on 15-09-2018

Jivani atam katha

नाटक एब एकाकी on 05-09-2018

नाटक0एब एकाकी

Wjivni or aatmktha main antar only 5 on 13-08-2018

Dfsd



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आपका कमेंट बहुत ही छोटा है



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