मलूकदास के दोहे अर्थ सहित

malookdaas Ke Dohe Arth Sahit

Gk Exams at  2018-03-25

Pradeep Chawla on 12-10-2018


भेष फकीरी जे करें, मन नहिं आवै हाथ ।
दिल फकीर जे हो रहे, साहेब तिनके साथ ॥



जो तेरे घर प्रेम है, तो कहि कहि न सुनाव ।
अंतर्जामी जानिहै, अंतरगत का भाव ॥



हरी डारि ना तोड़िए, लागै छूरा बान ।
दास मलूका यों कहै, अपना-सा जिव जान ॥



दया-धर्म हिरदै बसे, बोले अमरत बैन ।
तेई ऊँचे जानिए, जिनके नीचे नैन ॥



Comments Riya on 22-11-2019

जो तेरे घर प्रेम है तो कहि कहि न सुनाव मलूकदास दोहे की व्याख्या

Padma on 07-11-2019

Need english meaning

V p upadhyay on 28-07-2019

क ख ग घ आदि स्वर व ब्यंजन बर्ण की उत्पत्ती कैसे हुई

Deepa on 15-05-2019

Maluk das hi ke Sare dohe Arth

jaishree pant on 12-05-2019

ram ram rom rom man chit ram ram
malukji ke ye pad koi de sakta hai arth ke saath?
dhanyavaad.

मलूक नाथ के दोहे on 02-05-2019

जो तेरे घर प्रेम है


pooja on 11-12-2018

जो तेरे घर प्रेम है, तो कहि कहि न सुनाव ।
अंतर्जामी जानिहै, अंतरगत का भाव ॥ का अर्थ

gopal lohar on 14-07-2018

Azgar kare n chakri dohe ka arth



Total views 2738
Labels: , ,
अपना सवाल पूछेंं या जवाब दें।
आपका कमेंट बहुत ही छोटा है



Register to Comment