सेन जी महाराज का जीवन परिचय

Sen Ji MahaRaj Ka Jeevan Parichay

Gk Exams at  2018-03-25


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Pradeep Chawla on 17-10-2018

श्री सैन जी के जन्म व परिवार के विषय में कुछ विशेष जानकारी प्राप्त नहीं होती| परन्तु इतना अवश्य कहा जा सकता है कि वह जाति से नाई थे| उनकी बाणी का शब्द भी है -







धूप दीप घ्रित साजि आरती || वारने जाउ कमला पती || 1 ||

मंगला हरि मंगला || नित मंगलु राजा राम राइ को || 1 || रहाउ ||

ऊतमु दीअरानिरमल बाती || तुंही निरंजनु कमला पाती || 2 ||

रामा भगति रामानंदु जानै || पूरन परमानंदु बखानै || 3 ||

मदन मूरति भै तारि गोबिंदे || सैनु भणै भजु परमानंदे || 4 || 2 ||



सैन जी के समय में भक्ति की लहर का जोर था| भक्त मंडलियाँ काशी व अन्य स्थानों में बन चुकी थी| भक्त मिलकर सतसंग किया करते थे| सैन नाई जी एक राजा के पास नौकर थे| वह सुबह जाकर मालिश व मुठी चापी किया करते थे|



एक दिन संत आ गए| सारी रात कीर्तन होना था| प्रभु भक्ति में सैन जी इतने मग्न थे कि उन्हें राजा के पास जाने का ख्याल ही न रहा| संत सारी रात कीर्तन करते रहे|



राजा ने सुबह उठना था और उसकी सेवा होनी थी| अपने भक्त की लाज रखने के लिए भक्तों के रक्षक ईश्वर को सैन जी का रूप धारण करके राजा के पास आना पड़ा| भगवान ने राजा की सेवा इतनी श्रद्धा के साथ की कि राजा प्रसन्न हो गया| प्रसन्न होकर उसने अपने गले का हार उतारकर सैन जी के भ्रम में भगवान को दे दिया| भगवान मुस्कराए और हार ले लिया| अपनी माया शक्ति से उन्होंने वह हार सैन जी के गले में डाल दिया और उनको पता तक न लगा| प्रभु भक्तों के प्रेम में ऐसा बन्ध जाता कि वश में होकर कहीं नहीं जाता|



सुबह हुई| सैन जी को होश आया कि वह महल में नहीं गए तो राजा नाराज़ हो जाएगा| यह सोचकर वह महल की तरफ चल पड़े| आगे राजा बाधवगढ़ अपने महल में टहल रहा था| उसने स्नान करके नए वस्त्र पहन लिए थे| सैन उदासी के साथ राजा के पास पहुँचा तो राजा ने पूछा, सैन अब फिर क्यों आए? क्या किसी और चीज़ की जरूरत है? आज तुम्हारी सेवा से हम बहुत खुश हुए हैं|



सैन ने सोचा कि राजा मेरे से नाराज़ है| उसने कांपते हुए बिनती की, महाराज क्षमा कीजिए, मैं नहीं आ सका| भक्त जन आ गए थे तो रात भर कीर्तन होता रहा| यह बात सुनकर राजा बहुत हैरान हुआ| उसने कहा आज तुम्हें क्या हो गया है, यह कैसी बातें कर रहे हो, मेरे पास तुम समय पर आए| सोए को उठाया, नाख़ून काटे, मालिश की, स्नान करवाया, कपड़े पहनाए तथा मैंने प्रसन्न होकर अपना हार उतारकर तुझे दिया| वह हार आज तुम्हारे गले में है|



सैन ने देखा उसके गले में सचमुच ही हार था| उस समय उसे ज्ञान हुआ तथा राजा को कहने लगा, यह सत्य है महाराज मैं नहीं आया| मैं जिसकी भक्ति कर रहा था, उसने स्वयं आकर मेरा कार्य किया| यह माला आपने भगवान के गले में डाल दी थी और भगवान अपनी शक्ति से मेरे गले में डाल गए| यह तो प्रभु का चमत्कार है|



यह सुनकर राजा बहुत हैरान हुआ| वह सैन जी चरणों में नतमस्तक होकर कहने लगा, भक्त जी अब आपको राज्य की तरफ से खर्च मिला करेगा अब आप बैठकर भक्ति किया करें|



ऐसे हुए भक्त सैन नाई जी| कबीर और रविदास जी की तरह आप की महिमा बेअन्त है| इस भक्त के बारे में भाई गुरदास जी लिखते हैं -



सुन प्रताप कबीर दा दूजा सिख होआ सैन नाई|

प्रेम भगति राती करे भलके राज दुवारै जाई|

आए संत पराहुने कीरतन होआ रैनि सबाई|

छड न सकै संत जन राज दुआरि न सेव कमाई|

सैन रूप हरि होई कै आया राने नों रिझाई|

रानै दूरहु सद के गलहु कवाई खोल पैन्हाई|

वस कीता हऊ तुध अ़ज बोलै राजा सुनै लुकाई|

प्रगट करै भगतां वडिआई|



Comments Jagan sen on 12-05-2019

Date of birth sen Maharaja

DAULAT RAM SEN on 12-05-2019

SEN SAMAJ KE ESTADEV KAUN HAI

Balbir pawar on 12-05-2019

Sen ji maharaj ke mata pita ka kya name hai

Mukesh on 31-01-2019

ईनाणिया जाती नाई में हे क्या

soniya on 10-01-2019

sen ji maharaj kha ki rh nh wal th

soniya sen on 10-01-2019

aap muj in ki baar mh kuc jankari bhtay g




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