व्यतिरेक अलंकार उदाहरण

व्यतिरेक Alankar Udaharan

Gk Exams at  2018-03-25


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Pradeep Chawla on 08-09-2018


जहाँ उपमान की अपेक्षा अधिक गुण होने के कारण उपमेय का उत्कर्ष हो, वहाँ 'व्यतिरेक अलंकार' होता है।

'व्यतिरेक' का शाब्दिक अर्थ है- 'आधिक्य'। व्यतिरेक में कारण का होना अनिवार्य है। रसखान के काव्य में व्यतिरेक की योजना कहीं-कहीं ही हुई है, किन्तु जो है, वह आकर्षक है। नायिका अपनी सखी से कह रही है कि- ऐसी कोई स्त्री नहीं है, जो कृष्ण के सुन्दर रूप को देखकर अपने को संभाल सके। हे सखी, मैंने 'ब्रजचन्द्र' के सलौने रूप को देखते ही लोकलाज को 'तज' दिया है, क्योंकि-

खंजन मील सरोजनि की छबि गंजन नैन लला दिन होनो।
भौंह कमान सो जोहन को सर बेधन प्राननि नंद को छोनो।

अन्य उदाहरण-

का सरवरि तेहिं देउं मयंकू। चांद कलंकी वह निकलंकू।।
मुख की समानता चन्द्रमा से कैसे दूँ? चन्द्रमा में तो कलंक है, जबकि मुख निष्कलंक है।



Comments Madhura on 29-07-2019

Vytirek alnkar example

Rushi on 20-06-2019

Alankar example

virat on 31-05-2019

hi

Vicky Borkar on 12-05-2019

अलंकार

Ayushi on 22-04-2019

Byatirek alankar ke example kya hai

Ayushi on 22-04-2019

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Ayushi on 22-04-2019

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Ayushi on 22-04-2019

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Ayushi on 22-04-2019

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Ayushi on 22-04-2019

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Ayushi on 22-04-2019

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Ayushi on 22-04-2019

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Ayushi on 22-04-2019

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Or Example on 23-02-2019

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