बच्चे को चलना कैसे सिखाएं

Bachhe Ko Chalna Kaise सिखाएं

GkExams on 12-05-2019

अधिकांश शिशु अपने पहले जन्मदिन तक चलना शुरु कर देते हैं। 15 महीने की उम्र तक अधिकांश बच्चे बिना सहायता के चलना शुरु कर देते हैं, हालांकि उनके कदम अक्सर असमान ही होते हैं।



पका शिशु जब खड़ा होना सीखता है, तो उसे वापिस बैठने के लिए आपकी मदद की जरुरत हो सकती है। अगर, वह ऐसा न कर पाए और रोना शुरु कर दे, तो उसे उठाकर सीधे बिठा न दें। इसकी बजाय, उसे दिखाएं कि घुटनों की मोड़कर किस तरह बैठा जाए, ताकि वह बिना लुढ़के बैठ सके। उसे खुद ही इसका प्रयास करने दें।



आप शिशु के सामने खड़े होकर या घुटनों पर बैठकर उसके दोनों हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ चलने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।



आप उसके लिए टॉडल ट्रक या इसी तरह का कोई और खिलौना भी खरीद सकती हैं, जिसे वह पकड़कर आगे धकेल सकता है। ऐसे खिलौनों का चयन करें, जो स्थिर हों और जिनका आधार चौड़ा हो। बेबी वॉकर उलट जाने से दुर्घटना हो सकती है, इसलिए बेहतर है कि उनका इस्तेमाल न किया जाए।



बेहतर है कि शिशु के पांवों को जितना हो सके खुला रखें। तंग जूतों या जुराबों में बंधे होने की वजह से शिशु का पैर सीधा नहीं हो पाता और उचित ढंग से विकसित नहीं हो पाता। जब तक शिशु घर से बाहर या खुरदरी या ठंडी सतहों पर चलना शुरु नहीं करता, तब तक आपको उसके लिए जूते खरीदने की जरुरत नहीं है। नंगे पैर चलने से उसका संतुलन और समन्वय बेहतर होता है।



यह भी सुनिश्चित करें कि शिशु के चलने के लिए सुरक्षित माहौल हो। फर्श पर कोई भी अवरोध न हो, ताकि वह आसानी से चल सके। घर को शिशु के चलने के लिए सुरक्षित (चाइल्डप्रूफ) बनाएं। कभी भी अपने शिशु को अकेला न छोड़े, वह गिर भी सकता है या उसे आपकी मदद की जरुरत हो सकती है।



ज्यादा चलने से आपके शिशु के पैर थक सकते हैं और उनमें थोड़ा दर्द भी हो सकता है, खासकर कि रात में। शिशु की नियमित मालिश करने से उसे आराम मिलेगा और उसकी टांगों की मांसपेशियां मजबूत होंगी।



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