ईशान कोण में शौचालय के उपाय

Eeshan Kon Me Toilet Ke Upay

Gk Exams at  2018-03-25


Go To Quiz

Pradeep Chawla on 22-10-2018


किसी भी घर में शौचालय और स्नानघर का होना कितना महत्तपूर्ण होता है। आजकल बन रहे ज्यादातर घरों में स्थानाभाव, शहरी संस्कृति और शास्त्रों के अल्पज्ञान के कारण अधिकतर लोग शौचालय और स्नानघर को एक साथ बनवा लेते हैं। इस कारण ऐसे घरों में वास्तुदोष उत्पन्न होता है। इनको भी वास्तु के हिसाब से ही बनवाना चाहिए, नहीं तो ये घर में नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का कारण बनते हैं। इनकी गलत दिशा के कारण परिवार के लोगों का स्वास्थ्य खराब हो सकता है और धन आदि की हानि का सामना भी करना पड़ सकता है। शौचालय का तात्पर्य है, जहां पर हम मल-मूत्र आदि का विसर्जन करते हैं। वास्तुशास्त्र के हिसाब से दक्षिण-पश्चिम दिशा को विसर्जन के लिए उत्तम माना गया है।


वास्तु के अनुसार, दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर बनाया गया शौचालय काफी लाभकारी है। इस दिशा बना शौचालय व्यक्ति की चिंता को कम करता है। दक्षिण-पूर्व जोन में शौचालय जीवन में समस्याएं उत्पन्न करता है। यह पवित्र आयोजनों, जैसे विवाह आदि में रुकावट उत्पन्न करता है। आत्मविश्वास, शारीरिक मजबूती में कमी और नौकरी करने वाले लोगों में आत्मविश्वास की कमी का कारण बनता है। आराम और यश के दक्षिण दिशा में शौचालय के होने से इस घर में रहने वाले लोग प्रसिद्धि के लिए लालायित रहते हैं। जबकि दक्षिण-पश्चिम जोन में बना शौचालय हर उस चीज को विसर्जित कर देता है, जो आपके लाइफ के लिए बेकार है। यहां शौचालय होना ठीक है। दक्षिण-पश्चिम दिशा में शौचालय का होना पारिवारिक रिश्तों में कलह पैदा करता है। दक्षिण-पश्चिम दिशा में शौचालय हो, तो आप धन की बचत नहीं कर पाएंगे। इसके अलावा स्कूल जाने वाले बच्चों का ध्यान पढ़ाई में नहीं लगेगा, क्योंकि यह दिशा शिक्षा और बचत की होती है। पश्चिम दिशा में शौचालय के होने से लोगों को भरपूर एवं गंभीर प्रयास के बावजूद वांछित परिणाम नहीं मिल पाता है। उत्तर-पश्चिम दिशा में बना शौचालय वहां रहने वाले निवासियों के मन से बेकार की संवेदनाओं को बाहर निकालने में सहायता करता है.


वास्तुशास्त्र के अनुसार, शौचालय की गलत और सही दिशाओं का उस घर के लोगों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है। मकान की उत्तर दिशा में बना शौचालय रोजगार संबंधी परेशानियों को उत्पन्न करता है। इस दिशा में बने शौचालय वाले घरों में रहने वाले लोगों को धन कमाने के अवसर मुश्किल से ही मिल पाते हैं और वे अपने जीवन में आगे भी नहीं बढ़ पाते हैं। उत्तर-पूर्व दिशा में बना शौचालय रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर बना देता है। इस दिशा में बने शौचालय का प्रयोग करने वाले लोग मौसमी बीमारियों की वजह से लगातार बीमार पड़ते हैं। घर के पूर्व, उत्तर-पूर्व जोन में बना शौचालय व्यक्ति को थकान और भारीपन महसूस कराता है। व्यक्ति को कब्ज की शिकायत रहती है और ताजगी के लिए उन्हें कुछ न कुछ बाहरी चीज की आवश्यकता पड़ती है। पूर्व दिशा में बना शौचालय सामाजिक रिश्ते को खत्म कर देता है।


यदि शरीर में विसर्जन की प्रक्रिया ठीक तरह से न हो, तो शरीर अपने कार्य करने में सक्षम नहीं रहता है। दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम दिशा उस विसर्जन की गतिविधि को संचालित एवं प्रभावित करता है। इसलिए इस दिशा में शौचालय होना एक आदर्श स्थिति है। ईशान कोण में, तो यह कतई नहीं बनवाना चाहिए। शौचालय चाहे कितना भी आकर्षक क्यों न हो, इसका निर्माण ब्रह्मांड के ऊर्जा नियमों के अनुसार नहीं हुआ है, तो यह नकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित करता है, जो सीधे तौर पर घर की समृद्धि और घर को निवासियों के स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। धन के प्रवाह और बच्चों की शिक्षा पर भी इसका असर पड़ता है। इसके साथ ही पारिवारिक रिश्तों में अस्थिरता का कारण भी बन सकता है।



Comments अविरल on 12-05-2019

ईशान कोण में बने शौचालय का दोष कैसे दूर करें

विनोद चहल on 12-05-2019

ईशान कोण में शौचालय के दोष दूर करने के उपाय बताए



आप यहाँ पर ईशान gk, कोण question answers, शौचालय general knowledge, ईशान सामान्य ज्ञान, कोण questions in hindi, शौचालय notes in hindi, pdf in hindi आदि विषय पर अपने जवाब दे सकते हैं।

Labels: , ,
अपना सवाल पूछेंं या जवाब दें।

Comment As:

अपना जवाब या सवाल नीचे दिये गए बॉक्स में लिखें।

Register to Comment