इला न देणी आपणी , हालरिये हुलराय । पूत सिखावै पालणै , मरण बड़ाई माय । । राजस्थान भाषा के वर्चस्व व सार्थकता को सिद्ध करने के लिए यह उपरोक्त दोहा ही काफी है जिस में करने के लिए यह उपरोक्त दोहा ही काफी है जिस में पालने में सोते बच्चे को मां अपने प्रदेश की आन को जीवित रखने हेतु प्राणोत्सर्ग कर देने का सन्देश देती है । यह दोहा किस कवि तथा रचना का है , बतायें ?

ila n Deni Aapnni , Haalariye Hulraay । Poot Sikhavai Paalanai , Marann Badai Maay । । Rajasthan Bhasha Ke varchasv Wa Sarthakta Ko Siddh Karne Ke Liye Yah Uprokt Doha Hee Kafi Hai Jis Me Karne Ke Liye Yah Uprokt Doha Hee Kafi Hai Jis Me Palane Me Sote Bachhe Ko Maa Apne Pradesh Ki Aan Ko Jivit Rakhne Hetu Prannotsarg Kar Dene Ka Sandesh Deti Hai । Yah Doha Kis Kavi Tatha Rachana Ka Hai , Batayein ?

Gk Exams at  2018-03-25

A. पाताल और पीथल - कन्हैया लाल सेठिया
B. जयानक - पृथ्वीराज विजय
C. वीर सतसई - सूर्यमल्ल मिश्रण
D. पृथ्वीराज रासो - चन्दवरदाई

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