कन्हैयालाल सेठिया जीवन परिचय

KanhaiyaLaal Sethiya Jeevan Parichay

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 10-01-2019

कन्हैयालाल सेठिया का जन्म राजस्थान के चूरु जिले के सुजानगढ़ शहर में हुआ। प्रसिद्ध राजस्थानी गीत "'आ तो सुरगा नै सरमावै, ई पै देव रमण नै आवे इन्हीं की रचना है .......... 11 नवम्बर 2008 को निधन हो गया


महामनीषी पद्मश्री कन्हैयालाल सेठिया का संक्षिप्त जीवन वृत्त इस प्रकार है :

  • जन्म : 11 सितम्बर 1919 ई. को सुजानगढ़ (राजस्थान) में
  • पिता-माता : स्वर्गीय छगनमलजी सेठिया एवं मनोहरी देवी
  • विवाह : 1937 ई. में श्रीमती धापू देवी के साथ।
  • सन्तान : दो पुत्र - जयप्रकाश एवं विनयप्रकाश तथा एक पुत्री श्रीमती सम्पत देवी दूगड़
  • अध्ययन : बी.ए.
  • निधन : 11 नवम्बर 2008

परिचय

कन्हैयालाल सेठिया राजस्थानी भाषा के महान रचनाकार होने के साथ साथ वो एक स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक कार्यकर्ता, सुधारक, परोपकारी और पर्यावरणविद भी थे. धरती धोरा री और पाथल और पीथल इनकी लोकप्रिय रचनाएं थी. सुजानगढ़ चुरू में जन्मे सेठिया गांधीजी से बड़े प्रभावित थे. उन्ही के प्रभाव से खादी के वस्त्र धारण करना, दलित उद्धार कार्य करना तथा राष्ट्रभक्ति से ओत प्रेत रचनाएं लिखा करते थे. इनकी रचना अग्निवीणा में अंग्रेजी हुकुमत को ललकार थी जिसके कारण उन पर राजद्रोह का केस लगा तथा इन्हें जेल भी जाना पड़ा. ये बीकानेर प्रजामंडल के सदस्य भी रहे तथा भारत छोड़ों आंदोलन के दौरान कराची में इन्होने जनसभाएं कर लोगों को जागृत करने की दिशा में कार्य किया. राजस्थानी कविता के सम्राट सेठिया को मृत्युप्रांत 31 मार्च 2012 को राजस्थान रत्न सम्मान देने की घोषणा की.



Comments Kavita on 06-02-2019

Dharti dhora ri...... Bijali darti ola khave, dhari dhora ri tk ka bhavarth



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