गणेश मंदिर कुचामन सिटी राजस्थान

Ganesh Mandir Kuchaman City Rajasthan

GkExams on 11-02-2019


शहरके आराध्यदेव यानी नगरसेठ जो गणेश डूंगरी पर सिद्धि विनायक स्वरूप में विराजमान है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर की एक विशेषता यह है कि यहां बीते 126 वर्षों से पूजा-अर्चना का काम महिला पुजारी द्वारा किया जाता है। यह संभवत: प्रदेश के किसी भी गणेश मंदिर में पहला उदाहरण होगा। महिला द्वारा मंदिर में पूजा का काम संभालना उस दौर में बड़ी बात थी, जब हमारा समाज पर्दा प्रथा जैसी रूढ़ियों से जकड़ा हुआ था। 18वीं शताब्दी में कुचामन ठिकाने द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। इसमें रिद्धि-सिद्धि के साथ भगवान गजानन का सिद्धि विनायक स्वरूप विराजमान है। यह मंदिर शहर के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में ठिकाने की ओर से ब्राह्मण परिवार को जिम्मा सौंपा गया। इस परिवार के मुखिया के असामयिक निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो गई। सन 1891 में परिवार की डालीदेवी शर्मा ने अपने पति का निधन होने के बाद तत्कालीन राजा से अपने परिवार की आजीविका चलाने के लिए पूजा अर्चना की अनुमति मांगी। उन्होंने सलाह मशविरा के बाद पूजा की अनुमति दे दी। हालांकि उनके लिए यह आसान नहीं था, उस समय महिलाओं के लिए पर्दा प्रथा समेत कई कुरीतियां समाज में व्याप्त थी। लेकिन उन्होंने चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़कर जिम्मेदारी का निर्वहन किया। इसके बाद परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी महिलाओं ने ही प्रधान पुजारी की जिम्मेदारी संभाली। डालीदेवी ने 1891 से 1913 तक पूजा-अर्चना की। उनके निधन के बाद परिवार की अगली पीढ़ी से धापूदेवी शर्मा ने 1913 से 1952 तक, उसके बाद शिवप्यारी देवी ने 1952 से 1988 तक पूजा अर्चना का काम किया। इसके बाद शांतिदेवी शर्मा ने 1988 से 2011 तक अपनी जिम्मेदारी निभाई। उनके निधन के बाद वर्तमान में अगली पीढ़ी के तौर पर रमादेवी बबीता शर्मा पूजा अर्चना की जिम्मेदारी निभा रही है।



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