अग्रवाल समाज का इतिहास

Agrawal Samaj Ka Itihas

GkExams on 25-11-2018

प्राचीन भारतीय राजवंश | अग्रेयवंशी क्षत्रिय ही वर्तमान में अग्रवाल नाम से जाने जाते हैं। इनकी एक शाखा राजवंशी भी कहलाती है। युनानी बादशाह सिकंदर के आक्रमण के फलस्वरूप अग्रेयगणराज्य का पतन हो गया और अधिकांश अग्रेयवीर वीरगति को प्राप्त हो गये। बचे हुवे अग्रेयवंशी अग्रोहा से निष्क्रमण कर सुदूर भारत में फैल गये और आजीविका के लिये तलवार छोड़ तराजू पकड़ ली। आज इस समुदाय के बहुसंख्य लोग वाणिज्य व्यवसाय से जुड़े हुवे हैं और इनकी गणना विश्व के सफलतम उद्यमी समुदायों में होती है। पिछले दो हजार वर्षों से इनकी आजीविका का आधार वाणिज्य होने से इनकी गणना क्षत्रिय वर्ण होने के बावजूद वैश्य वर्ग में होती है और स्वयं अग्रवाल समाज के लोग अपने आप को वैश्य समुदाय का एक अभिन्न अंग मानते हैं। इनके 18 गोत्र हैं। संस्थापक : महाराजा अग्रसेनवंश : सुर्यवंश एवं नागवंश (इस वंश की अठारह शाखाओं में से 10 सुर्यवंश की एवं 8 नागवंश की हैं)गद्दी : अग्रोहा,प्रवर : पंचप्रवर,कुलदेवी: महालक्षमी,गोत्र : 18 :-गर्ग, गोयन,गोयल, कंसल , बंसल , सिंहल, मित्तल, जिंदल, बिंदल , नागल , कुच्छल , भंदल, धारण , तायल, तिंगल, ऐरण, मधुकुल , मंगल|



Comments Poonammittal on 11-07-2020

Agrasen vaisav cowhome ki sthapna kab. Yeat

AvinashAgrahari on 21-06-2020

Agrahari aur agrwal me kya antar hi air ye 18 gotro me agrwal aur agrahari kaun hi

Urmila agrawal on 16-06-2020

Agrasen maharaja ke guru ka nam kya tha

Sandhya agrawal on 14-06-2020

Sabse pahle ki rajya ke Chief Minister banne ka saubhagya Agrawal samaj ko Mila

Pkshah on 31-05-2020

Shah family of benaras history

ATUL SINGHAL on 05-03-2020

MAHARAJA AGRASEN JI KE DASI PUTRON KE GOTRA BATAYEN




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