उत्तराखंड में प्रथम बार वन पंचायतों का गठन किया गया

UttaraKhand Me Pratham Baar Van Panchayaton Ka Gathan Kiya Gaya

Pradeep Chawla on 21-10-2018

उत्‍तराखण्‍ड के पर्वतीय जनपदों में वन पंचायतों के गठन का कार्य वर्ष 1932 से प्रारम्‍भ हो गया था राज्‍य के 11 जनपदों में वन पंचायत अधिनियम लागू है राज्‍य के 11 पर्वतीय जनपदों में राजस्‍व ग्रामों की कुल संख्‍या 13,729 है। इसमें से अभी तक 12,085 वन पंचायतों का गठन हो गया है। जिनका क्षेत्रफल लगभग 5.00 लाख हैक्‍टेयर है ,द्वितीय चरण में पूर्व निर्मित वन पंचायतों के क्षेत्रफल में वृद्वि किया जाना है।



चारा विकास, चारा वृक्ष विकास, औषधीय पादपों का विकास, मृद्रा एवं जल संरक्षण में वन पंचायतों का अत्‍यधिक महत्‍व है। प्रत्‍येक राजस्‍व ग्राम का अपना वन की परिकल्‍पना को साकार करने के लिए सभी 13,729 ग्रामों में वनन पंचायतों के गठन की आवश्‍यकता के अनुसार प्रत्‍येक वन पंचायतों की अलग-अलग कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए। राज्‍य के पशुचारा के अभाव के न्‍यूनीकरण में वन पंचायतें सबसे अधिक सहायक हो सकती है। चारा उत्‍पादन के लिए अतिरिक्‍त कृषि भूमि का उपयोग करना संभव नही है। वर्तमान पशुचारा अभाव(लगभग 95 लाख मी0टन हरा चारा) के सम्‍बन्‍ध में लगभग 4.00 लाख हेक्‍टेयर अतिरिक्‍त भूमि की आवश्‍यकता होगी। यह भूमि वन पंचायतों में उपलब्‍ध है जिसे चरणबद्व रूप से सिल्‍वी ग्रासलैण्‍ड में परिवर्तित किया जायेगा।


  1. 5.0 हेक्‍टेयर प्रति वन पंचायत की यूनिट पर विकास एवं अनुरक्षण की लागत रू0 5.133 लाख लागत है।
  2. उत्‍पादन-

2.1 हरा चारा उत्‍पादन प्रति इकाई-

प्रथम वर्ष0.00
द्वितीय वर्ष80 मी0टन
तृतीय वर्ष100 मी0 टन
चतुर्थ वर्ष120 मी0 टन
पंचम वर्ष100 मी0टन
कुल 400 मी0टन

कुल आय रू0 5.04 लाख प्रति वर्ष



2.3 लाभान्वित प्रति यूनिट


2.4 रूट स्‍टाक से 180 हैक्‍ट. अतिरिक्‍त क्षेत्र में चारा घासों का विस्‍तार किया जा सकेगा।


2.5 उत्‍पादित हरा चारा से 110 दूधारू पशुओं को सम्‍पूर्ण वर्ष हरा चारा प्राप्‍त होगा।


प्रारम्‍भ में उपलब्‍ध बजट रू0 65 लाख से 12 यूनिट की स्‍थापना की जा सकती है।





Comments Mohan singh on 23-02-2021

दाराहाट बलोक में धर्मकोट बन पंचायत का बिबरण दे

Laxman rawat on 04-02-2020

Henry रैम्जे

satpal gusain on 12-05-2019

उत्तराखंड के प्रथम वन संरछण कौन थे

satpal gusain on 12-05-2019

उत्तराखंड के प्रथम वन संरछक कौन थे



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