ऊंट के दूध के लाभ और साइड इफेक्ट

Oont Ke Doodh Ke Labh Aur Side Effect

Pradeep Chawla on 27-09-2018

हॉलैंड में विशेषज्ञ यह शोध कर रहे हैं कि ऐतिहासिक तौर पर लाभदायक समझे जाने वाले ऊँटनी के दूध में क्या रोग से लड़ने की क्षमता है?


मिस्र के सेनाई प्रायद्वीप के बद्दू प्राचीन ज़माने से यह विश्वास करते हैं कि ऊँटनी का दूध शरीर के अंदर की लगभग हर बीमारी का इलाज है.


उनका विश्वास है कि इस दूध में शरीर में मौजूद बैकटीरिया को ख़त्म करने की क्षमता है.


संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संस्थान की एक रिपोर्ट के अनुसार रूस और क़ज़ाकिस्तान में आम तौर पर डॉकटर कई प्रकार के रोगियों के लिए ऊँटनी के दूध की सलाह देते हैं.


भारत में ऊँटनी का दूध पीलिया, टीबी, दमा, ख़ून की कमी और बवासीर जैसी ख़तरनाक बीमारियों के इलाज के लिए प्रयुक्त रहा है.

और उन क्षेत्रों में जहां ऊँटनी का दूध रोज़ाना के खान-पान में शामिल है वहां लोगों में मधुमेह की औसत बहुत कम पाई गई है.


हॉलैंड में 26 वर्षीय फ़्रैंक स्मिथ पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने नियमित रूप से ऊँटों की व्यावसायिक फ़ार्मिंग का काम शुरू किया. उनके पिता मुर्सिल शिरा संबंधी रोग के माहिर डॉक्टर हैं. उन्होंने स्वास्थ विभाग से जुड़े अपने साथियों को इस शोध में लगाया है जिससे वह ये जान सकें कि उनके बेटे के ज़रिए तैयार की गई चीज़ें कितनी लाभदायक हैं.


सिर्फ़ तीन ही साल में उनके काम ने विभिन्न क्षेत्रों में इतनी रूचि पैदा कर दी कि स्वास्थ विभाग की ओर से उनके लिए बाक़ायदा फंडिंग शुरू कर दी गई.


डॉक्टर स्मिथ का कहना है कि इस दूध में इतने फ़ायदे हैं कि यह यूरोप के स्वास्थवर्धक खाने का हिस्सा बन सकता है. "और हम यही करने की कोशिश कर रहे हैं."

शुरू में उन्हें अपनी चीज़ें बेचने के लिए ग्राहक तलाश करने में भी समस्या का सामना करना पड़ा. शुरू में उन्होंने अपनी चीज़ें मस्जिदों के बाहर बांटनी शूरू कीं जहां कई मराकश और सोमालिया के मुसलमान अपने देश में इससे बने आहार के आदी थे

उन्होंने अपने शोध के बारे में बताया कि अस्पताल में मधुमेह के रोगियों को दो ग्रुप में विभाजित कर के उन्हें गाय और ऊँटनी का दूध नियमित रूप से पिलाया गया और फिर उनके शुगर लेवल की जाँच की गई जिससे ऊँटनी के दूध के लाभ और उपयोगिता सामने आई. उन्होंने ये भी बताया कि इसके बारे में विस्तृत शोध हो रहे हैं.

मुश्किलें

उन्होंने अपनी व्यावसायिक फ़ार्मिंग की शुरूआत तीन ऊँटों से की थी और अब उनके पास 40 ऊँट हैं.


उनका कहना है कि यूरोप में ऊँटों को पालना एक मुश्किल काम था क्योंकि अरब देशों के विपरीत यूरोपीय संघ ऊँटों को गाय और बकरी वग़ैरह की तरह का पैदावारी पशु नहीं मानती है. इसलिए उन्होंने सरकार से विशेष अनुमति लेनी पड़ी. यूरोप में ऊँटों के आयात पर भी पाबंदी है और फिर ऊँटों के दूध दूहने की भी समस्या थी.


फ़्रैंक स्मिथ का दावा है कि उन्होंने ऊँटों का दूध निकालने वाली दुनिया की पहली मशीन का अविष्कार किया है.


शुरू में उन्हें यह सब कुछ बेचने के लिए ग्राहक तलाश करने में भी समस्या का सामना करना पड़ा. शुरू में उन्होंने अपनी चीज़ें मस्जिदों के बाहर बांटनी शूरू कीं जहां मराकश और सोमालिया के कई मुसलमान अपने देश में इससे बने आहार के आदी थे. धीरे धीरे ऊँट के दूध से बने उनके उत्पादनों की मांग बढ़ने लगी.


स्मिथ को आशा है कि यूरोप में ऊँटनी के दूध से बने खाद्य पदार्थों की मांग में बढ़ौतरी होगी.



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