रूसो का शिक्षा दर्शन

Rousseau Ka Shiksha Darshan

GkExams on 12-05-2019

मोरले के अनुसार, “प्रकृतिवादी स्वरूप में प्रेम करना, मानव प्रकृति पर विश्वास, न्याय की कामना तथा दूसरों पर विश्वास करना निहित है।” प्रकृतिवादी प्रकृति को बहुत ज्यादा महत्व देते हैं। वे मानते हैं कि संसार को संचालित करने में प्रकृति के नियमों की भूमिका सर्वोपरि है।



इसमें इन्द्रिय ज्ञान को महत्व दिया जाता है। प्रकृतिवाद का विश्वास है कि इंसान प्रकृति से दूर हो गया है, इसके कारण वह दुःखी है। उसके दुःखों का समाधान प्रकृति की तरफ लौटना है। प्रकृतिवादी मानव प्रकृति पर अधिक बल देते हैं।



प्रकृतिवाद के समर्थक थे रूसो

Rousseau_‘एमिली’ नामक कृति में रूसो ने शिक्षा के प्रति एक बिल्कुल भिन्न और मौलिक विचार का प्रतिपादन करते हुए बालक के स्वाभाविक आवेगों और वृत्तियों का दमन न करने का आग्रह किया। तस्वीर, साभारः टेलीग्राफ़





प्रकृतिवाद ने शिक्षा के मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और वैज्ञानिक विचारों के स्पष्ट निर्माण को एक दिशा दी है। प्रकृतिवादी आंदोलन को रूसो के प्रयासों से दुनियाभर में पहचान मिली। रूसो की मान्यता थी कि शिक्षा-प्रक्रिया के माध्यम से हम अपने पूर्वग्रह बच्चों पर आरोपित कर देते हैं, इसलिए बच्चों पर अपने विचारों को उपदेशात्मक शैली में लादने की बजाय उसे स्वयं अपने अनुभवों से सीखने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। शिक्षण विधि के संबंध में रूसो ‘ख़ुद से सीखने’ के समर्थक थे।



रूसो मनुष्य को मूलतः एक भावनाप्रधान और संवेदनशील प्राणी मानते थे, अतः उसके बौद्धिक विकास की बजाय भावनात्मक विकास पर उनका अधिक आग्रह रहा। बालक की स्वतंत्रता और सीखने की सहजता का समर्थक होने के नाते रूसो बच्चों पर किसी तरह के अनुशासन थोपने, ख़ासतौर पर शारीरिक दण्ड के ख़िलाफ़ थे।



प्रकृतिवादी शिक्षा की विशेषताएं

बाल केंद्रित शिक्षा को प्रोत्साहन

किताबों पर बहुत ज्यादा निर्भरता की आलोचना

प्रकृति के प्रति अनुराग

बच्चों की स्वतंत्रता को महत्व

बच्चों की रुचि को वरियता

प्रकृतिवाद की मान्यता है कि प्रकृति के साथ अंतर्क्रिया में बच्चे की क्षमता और योग्यता का विकास होता है

इन्द्रीय प्रशिक्षण पर बल।



Comments AKASH ORAON on 30-05-2021

Ruso ka shiksha darsan ka mahataw ewam avashykta vartman parivesh me

Sahil on 21-05-2021

शिक्षा के दार्शनिक परिप्रेक्ष्य

Flash on 18-05-2021

Ruso ki shiksha darshan ki
visheshta

OMPRAKASH TRIPATHI on 26-02-2021

प्रश्न=1-मनुष्य मूलतः पशु है अतः उसकी पाशविक प्रवृतियों का मार्गान्तिकरण एवं शोधन प्रशिक्षण से संभव है उक्त कथन किसका है ?


Juhi on 13-02-2020

Philosophical foundation of education?

Meaning nature and scope of education?

Aim of education?

Rimjhim on 13-09-2019

Describe naturalism in reference to Rousseau.


Rooso kis dand ke samrthak the on 09-10-2018

Rooso kis dand ke samrthak the



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