सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का शिक्षा में उपयोग

Suchna Aivam Sanchar Praudyogiki Ka Shiksha Me Upyog

GkExams on 26-12-2018


स्कूलों में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आई.सी.टी)” एक केन्द्र प्रायोजित योजना है जो माध्यमिक विद्यालय के छात्रों को सूचना व संचार प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण सुविधा उपलब्ध कराने, उनमें उचित आईसीटी कौशल विकसित करने और अन्य संबंधित अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दिसंबर 2004 में शुरू की गई थी| योजना का उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक और भौगोलिक कारणों से पिछड़े छात्र-छात्राओं के बीच डिजिटल डिवाइड को कम करना है| इस योजना के अंतर्गत सुस्थिर कंप्यूटर प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए राज्यों व संघ शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जानी है। इस योजना का उद्देश्य केन्द्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालयों में स्मार्ट स्कूलों की स्थापना कर, पड़ोस के स्कूली छात्रों के बीच में आईसीटी कौशल का प्रचार करन के लिए प्रौद्योगिकी प्रदर्शक के रूप में कार्य करना है। यह योजना वर्तमान में सरकारी स्कूलों तथा सरकारी सहायता प्राप्त उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कार्यान्वित की जा रही है। कंप्यूटर और ऊसके पुर्जे, शैक्षणिक सॉफ्टवेयर की खरीदारी, शिक्षक प्रशिक्षण, इंटरनेट कनेक्टिविटी आदि के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जा रही है।


राज्यों और संस्थानों को वित्तीय सहायता, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव की अध्यक्षता में कार्यरत परियोजना निगरानी और मूल्यांकन समूह से अनुमोदन मिलने के बाद प्रदान की जाती है।

परिचय

सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आई.सी.टी) को सार्वभौमिक सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रीय प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक के रूप में स्वीकार किया गया है। परंतु, आईसीटी तत्परता के स्तरों और उपयोग को उत्पादकता स्तर में असमानता के रूप देखा जा सकता है जो देश की आर्थिक विकास दर को प्रभावित कर सकता है।


सामाजिक और आर्थिक विकास के क्षेत्र में कार्यरत देशों के लिए आईसीटी को समझने और उसके साथ समन्वयन स्थापित करना काफी महत्वपूर्ण है।


भारत में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग के क्षेत्र में विशाल भौगोलिक और जनसांख्यिकी आधार पर असमानता पाई जाती है। भारत में विश्व का सबसे अधिक आईसीटी कार्यबल है। इससे एक ओर जहाँ देश में प्रौद्योगिकी उपयोग में बंगलुरु और गुड़गांव जैसे शहरों का विकास या उच्च आय वर्ग की उत्पत्ति हुई है, वहीं दूसरी ओर देश का एक बड़ा हिस्सा टेलीफोन कनेक्टिविटी से भी वंचित है।

सूचना प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय कार्यदल और सॉफ्टवेयर विकास

प्रधानमंत्री द्वारा जुलाई- 1998 में गठित कार्यदल ने स्कूलों तथा शिक्षा क्षेत्र में सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग शुरू करने की सिफारिश की थी। इससे संबंधित नीचे दी गई प्रासंगिक अनुच्छेद इसकी स्पष्ट व्याख्या करती है:


छात्रों, अध्यापकों या स्कूलों को सक्षम बनाने वाली क्रमशः विद्यार्थी कंप्यूटर योजना, शिक्षक कंप्यूटर योजना और स्कूल कंप्यूटर योजना के अंतर्गत आकर्षक वित्तीय पैकेज से कंप्यूटर की खरीदारी की जाएगी। इस योजना को कम लाग वाली कंप्यूटर, बैंकों से आसान किश्तों पर ऋण, आईटी कंपनियों और अन्य व्यावसायिक घरानों से कंप्यूटर दान, अप्रवासी भारतीय संगठनों द्वारा कंप्यूटर के थोक दान, बड़ी संख्या में खरीदारी पर न्यूनतम आयात शुल्क, बहु पार्श्व धन की सुविधा प्राप्त होंगी।


सभी स्कूलों, पॉलिटेक्निक कॉलेजों और देश के सार्वजनिक अस्पतालों में वर्ष 2003 तक कंप्यूटर और इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी।


स्मार्ट स्कूल, अवधारणा का जोर केवल सूचना प्रौद्योगिकी पर न होकर, उसके उपयोग की कुशलता व मूल्य है, जो इस शताब्दी में एक महत्वपूर्ण तत्व है। इस योजना को प्रत्येक राज्य में पायलट आधार शुरू किया गया है। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं-

उद्देश्य

आईसीटी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक सरकारी स्कूलों में एक अनुकूल माहौल उत्पन्न करना। इसके लिए उपयोग उपकरणों का वृहद स्तर पर उपलब्धता, इंटरनेट कनेक्टिविटी और आईसीटी साक्षरता को बढ़ावा देना,

  • निजी क्षेत्र व स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल टेक्नोलॉजी के माध्यम से अच्छी सूचनाओं की ऑनलाइन उपलब्धता सुनिश्चित करना,
  • शिक्षण व प्रशिक्षण के लिए वर्त्तमान पाठ्यक्रम व शिक्षणशास्त्र के संवर्द्धन के लिए सूचना व संचार प्रौद्योगिकी उपकरणों का उपयोग करना,
  • उच्च अध्ययन और लाभकारी रोजगार के लिए जरूरी सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी कुशलता प्राप्त करने में विद्यार्थियों को सक्षम बनाना,
  • सूचना व संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग छात्र-छात्राओं के लिए प्रभावी शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना,
  • आत्म-ज्ञान का विकास कर छात्रों में महत्वपूर्ण सोच और विश्लेषणात्मक कौशल को बढावा देना। यह कक्षा को शिक्षक केंद्रित स्थल से बदलकर विद्यार्थी केंद्रित शिक्षण केन्द्र में बदल देगा,
  • दूरस्थ शिक्षा एवं रोजगार प्रदान करने के लिए दृश्य-श्रव्य एवं उपग्रह आधारित उपकरणों के माध्यम से सूचना व संचार प्रौद्योगिकी के प्रयोग को बढ़ावा देना।



Comments Chitaranjan KUMAR on 23-09-2020

भारत में माध्यमिक शिक्षा का अवधि कितना वर्ष है?

kalendra kumar on 12-05-2019

suchana sanchar proaugiki ka shishha me upyoge



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