शिक्षण अधिगम में आईसीटी के उपयोग

Shikshan Adhigam Me ICT Ke Upyog

Pradeep Chawla on 12-05-2019

शिक्षक सामान्य रूप से आईसीटी का सबसे अधिक उपयोग प्रशासनिक कार्यों के लिए करते हैं



शिक्षक अक्सर आईसीटी का उपयोग नियमित कार्य (रिकॉर्ड रखने, लेसन प्लान विकास, सूचना प्रस्तुति, इंटरनेट पर बुनियादी जानकारी की खोज) के लिए करते हैं।



अधिक जानकार शिक्षक कंप्यूटर सहायता अनुदेश” पर कम भरोसा करते हैं



आईसीटी के उपयोग के अधिक जानकार शिक्षक कंप्यूटर सहायता अनुदेश का उपयोग अन्य शिक्षकों की तुलना में कम करते हैं, लेकिन कुल मिलाकर आईसीटी का अधिक उपयोग करते हैं।



शिक्षक आईसीटी का उपयोग कैसे करते हैं, यह उनकी सामान्य शिक्षण शैली पर निर्भरकरता है



आईसीटी के उपयोग के प्रकार शिक्षक के शैक्षणिक दर्शन के साथ जुड़ा होता हैं। जो शिक्षक आईसीटी का सर्वाधिक उपयोग करते हैं – और सर्वाधिक प्रभावकारी तरीके से – उनके पारंपरिक संचरण-विधि द्वारा शिक्षण के उपयोग की संभावना कम होती है। जो शिक्षक अधिक प्रकार के सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं, उनकी प्रवृत्ति रचनात्मक शिक्षण की अधिक होती है।



शिक्षण और सीखने में सहायता के लिए आईसीटी की शुरूआत और उपयोग शिक्षकों के लिए अधिक समय खर्च करने वाला होता है, दोनों स्थितियों में जबकि वे शिक्षण प्रथाओं और रणनीतियों में परिवर्तन कर रहे हों और जबकि ऐसी रणनीतियों का नियमित रूप से उपयोग किया जाता है।



सीधे शब्दों में कहें तो: आईसीटी के साथ अध्यापन में अधिक समय लगता है (इस बात पर अनुमान अलग-अलग होते हैं कि एक ही सामग्री को कवर करने के लिए कितने अतिरिक्त समय की आवश्यकता होती है 10% एक आम अनुमान है)।

शिक्षक का आत्मविश्वास और प्रेरणा



कुछ ही शिक्षक आत्मविश्वासपूर्वक आईसीटी का उपयोग कर सकते हैं

आईसीटी संसाधनों के एक विस्तृत रेंज का प्रयोग करने में कुछ ही शिक्षकों को आत्मविश्वास बना रहता है, और जिस तरह से पाठ संचालित किया जाता है, सीमित विश्वास उसे प्रभावित करता है।



भय कई शिक्षकों को आईसीटी का उपयोग करने से रोकता है



ओईसीडी देशों में, कई शिक्षकों को आईसीटी का उपयोग करने के प्रति अभी भी भय है, इसलिए वे अपने शिक्षण में उनके उपयोग के लिए अनिच्छुक रहते हैं।



कम से कम शुरुआत में, आईसीटी से संपर्क शिक्षक के व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सक्षम उपकरण के रूप में महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत हो सकता है।



व्यावसायिक विकास जारी रखने में शिक्षक की प्रभावी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन प्रणालियां विकसित की जानी चाहिए



शिक्षकों को व्यावसायिक विकास गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए अतिरिक्त प्रेरणा और प्रोत्साहन की आवश्यकता होती है। प्रोत्साहन कई तरीकों से दिया जा सकता है, जिनमें प्रमाणीकरण, पेशेवर उन्नति, वेतनवृद्धियां, व्यावसायिक विकास हेतु सवैतनिक अवकाश, स्कूल और समुदाय स्तर पर और साथियों के बीच औपचारिक और अनौपचारिक मान्यता, कम अलगाव तथा अधिक उत्पादकता।



शिक्षकों द्वारा आईसीटी के उपयोग के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक है सुगमता



शिक्षक के आईसीटी से संबंधित कौशल के विकास को जारी रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक है उनके द्वारा नियमित रूप से इनका उपयोग कर पाना तथा प्रासंगिक आईसीटी उपकरण के लिए सुगमता लाना।

विषय ज्ञान



शिक्षक का विषय ज्ञान आईसीटी के उपयोग को प्रभावित करता है



जिस तरह शिक्षकों द्वारा पाठ में आईसीटी का उपयोग किया जाता है, वह इस बात पर निर्भर करता है कि अपने विषयों पर शिक्षकों की कितनी पकड़ है और वे किस तरह आईसीटी संसाधनों को प्रासंगिक बनाकर उनका उपयोग कर सकते हैं।



शिक्षक की विषयवस्तु पर महारथ और छात्र की ग्रहण क्षमता की समझ आईसीटी केउपयोग को अधिक प्रभावी बनाती है



प्रमाण यह बताता है कि जब शिक्षक - विषय ज्ञान और जिस तरह से विद्यार्थी विषय को समझते हैं – इन दोनों बातों के अपने ज्ञान का उपयोग करते हैं, तब के छात्र की उपलब्धि पर आईसीटी के प्रयोग का अधिक प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है।



आईसीटी के माध्यम से नई / अतिरिक्त जानकारी से संपर्क पर्याप्त नहीं है



प्राप्ति पर प्रभाव सबसे अधिक तब होता है जब विद्यार्थियों को सोचने के लिए चुनौती दी जाए और उनकी अपनी समझ पर सवाल किए जाएं, बजाय नई और अतिरिक्त जानकारी के सम्पर्क में लाने के।



आईसीटी विषय के मामले में स्व-शिक्षा के लिए शिक्षक की सहायता कर सकते हैं



अद्यतन और सीखने के अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग प्रदान कर, आईसीटी शिक्षक को उसके विषय क्षेत्र में स्व-शिक्षा के लिए सक्षम कर सकते हैं।

शिक्षक का व्यावसायिक विकास



शिक्षक का सतत प्रशिक्षण और सहायता शिक्षा के क्षेत्र में आईसीटी के सफल उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है



शिक्षक का प्रशिक्षण और व्यावसायिक विकास शिक्षा के क्षेत्र में आईसीटी के सफल प्रयोग के लिए मुख्य चालक के रूप में देखा जाता है।



शिक्षक का व्यावसायिक विकास एक प्रक्रिया है, एक घटना नहीं



आईसीटी के उपयोग में शिक्षकों को सहज महसूस करवाने के लिए परंपरागत, एक बार की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाएं अधिक प्रभावी नहीं पाई गई हैं, उनके द्वारा शिक्षण में समेकित करने में तो बिल्कुल भी नहीं। असतत, एक-बार के प्रशिक्षण कार्यक्रम सतत व्यावसायिक विकास गतिविधियों की तुलना में कम प्रभावी देखे गए हैं।



आईसीटी का परिचय शिक्षकों के व्यावसायिक विकास की आवश्यकताओं में वृद्धि करता है



शिक्षा के क्षेत्र में आईसीटी का प्रभावी उपयोग शिक्षकों के प्रशिक्षण और व्यावसायिक विकास की जरूरत को बढ़ाता है। हालांकि, इस तरह की बढ़ी हुई ज़रूरतों के लिए अधिक और बेहतर शैक्षिक सामग्री के लिए सुगमता प्रदान कर, नियमित प्रशासनिक कार्यों में सहायता देकर, मॉडल और प्रभावी शिक्षण पद्धतियों का सिम्युलेशन प्रदान कर, और शिक्षार्थी को सहायता के नेटवर्क उपलब्ध कराकर – आमने-सामने तथा दूरस्थ शिक्षा – दोनों वातावरणों में - और वास्तविक समय में या एसिंक्रोलॉजी के लिए आईसीटी महत्वपूर्ण उपकरण हो सकते हैं



सफल शिक्षक व्यावसायिक विकास के मॉडल तीन चरणों में विभाजित किए जा सकते हैं



सफल सतत-व्यावसायिक विकास के मॉडल तीन चरणों में विभाजित किए जा सकते हैं:

1) सेवा-पूर्व, शिक्षा शास्त्र, विषय की महारथ, प्रबंधन कौशल और विभिन्न शिक्षण उपकरणों (आईसीटी सहित) के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करना

2) सेवा-के दौरान, संरचित, आमने-सामने तथा दूरस्थ शिक्षा के अवसर, सेवापूर्व प्रशिक्षण को विस्तृत करने और सीधे शिक्षक की जरूरतों के लिए प्रासंगिक के निर्माण में और

3) शिक्षकों के लिए आईसीटी द्वारा सक्षम सतत औपचारिक और अनौपचारिक शैक्षणिक और तकनीकी सहायता, दैनिक जरूरतों और चुनौतियों पर लक्षित करना।



शिक्षक का प्रभावी व्यावसायिक विकास, प्रभावी शिक्षण पद्धतियों के मॉडल के अनुरूप होना चाहिए



शिक्षक के प्रभावी व्यावसायिक विकास यथासंभव कक्षा के वातावरण के अनुरूप होना चाहिए। आईसीटी के उपयोग पर ‘हैंड्स-ऑन” अनुदेश आवश्यक है जहां आईसीटी को शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण घटक माना जाता है। इसके अलावा, व्यावसायिक विकास गतिविधियां प्रभावी तरीकों और व्यवहार के मॉडल के अनुरूप होनी चाहिये और उन्होंने शिक्षकों के बीच सहयोग का प्रोत्साहन तथा समर्थन करना चाहिए। स्कूल स्तर पर आईसीटी सुविधाओं के उपयोग से सतत व्यावसायिक विकास को सफलता के लिए एक प्रमुख कारक के रूप में देखा जाता है, खासकर तब जबकि ये शिक्षकों की दैनिक आवश्यकताओं और प्रथाओं के लिए सीधे प्रासंगिक संसाधनों और कौशलों पर केन्द्रित हों।



मूल्यांकन विधियों में प्रशिक्षण महत्वपूर्ण है



व्यावसायिक विकास में शैक्षणिक पद्धतियों के मूल्यांकन और संशोधन के तरीके तथा शिक्षक को मूल्यांकन के विभिन्न तरीकों के सम्पर्क में लाना शामिल होने चाहिये।



प्रभावी व्यावसायिक विकास योजना के लिये पर्याप्त नियोजन की आवश्यकता होती है



शिक्षक की व्यावसायिक विकास गतिविधियों के निर्माण और भागीदारी में मूल्यांकन से पहले आवश्यकता का मूल्यांकन होना चाहिए, इन गतिविधियों की नियमित निगरानी और आकलन होना चाहिये, और फीडबैक लूप स्थापित किये जाने चाहिए अगर व्यावसायिक विकास प्रभावी करना हो, जो शिक्षकों की जरूरतों के लिए लक्षित हो।



शिक्षकों के लिए सतत, नियमित रूप से समर्थन महत्वपूर्ण है



शिक्षक के व्यावसायिक विकास में मदद के लिये सतत और नियमित मदद आवश्यक है और यह आईसीटी के उपयोग के माध्यम से प्रदान की जा सकती है (वेब साइटों, चर्चा समूहों, ई मेल समुदायों, रेडियो या टीवी प्रसारण के रूप में)।



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