पर्यावरण की आवश्यकता

Paryavaran Ki Aavashyakta

Gk Exams at  2020-10-15

Pradeep Chawla on 13-10-2018

पर्यावरण ( : Environment) शब्द का निर्माण दो शब्दों से मिल कर हुआ है। "परि" जो हमारे चारों ओर है"आवरण" जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है। पर्यावरण उन सभी भौतिक, रासायनिक एवं जैविक कारकों की समष्टिगत इकाई है जो किसी जीवधारी अथवा आबादी को प्रभावित करते हैं तथा उनके रूप, जीवन और जीविता को तय करते हैं।


सामान्य अर्थों में यह हमारे जीवन को प्रभावित करने वाले सभी जैविक और अजैविक तत्वों, तथ्यों, प्रक्रियाओं और घटनाओं के समुच्चय से निर्मित इकाई है। यह हमारे चारों ओर व्याप्त है और हमारे जीवन की प्रत्येक घटना इसी के अन्दर सम्पादित होती है तथा हम मनुष्य अपनी समस्त क्रियाओं से इस पर्यावरण को भी प्रभावित करते हैं। इस प्रकार एक जीवधारी और उसके पर्यावरण के बीच अन्योन्याश्रय संबंध भी होता है।


पर्यावरण के जैविक संघटकों में सूक्ष्म से लेकर कीड़े-मकोड़े, सभी जीव-जंतु और पेड़-पौधे आ जाते हैं और इसके साथ ही उनसे जुड़ी सारी जैव क्रियाएँ और प्रक्रियाएँ भी। अजैविक संघटकों में जीवनरहित तत्व और उनसे जुड़ी प्रक्रियाएँ आती हैं, जैसे: , पर्वत, नदी, हवा और के तत्व इत्यादि।


पर्यावरण संरक्षण का समस्त प्राणियों के जीवन तथा इस धरती के समस्त प्राकृतिक परिवेश से घनिष्ठ सम्बन्ध है। के कारण सारी दूषित हो रही है और निकट भविष्य में का अंत दिखाई दे रहा है। इस स्थिति को ध्यान में रखकर सन् 1992 में में विश्व के 174 देशों का आयोजित किया गया।


इसके पश्चात सन् 2002 में में आयोजित कर विश्व के सभी देशों को पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने के लिए अनेक उपाय सुझाए गये। वस्तुतः के संरक्षण से ही धरती पर जीवन का संरक्षण हो सकता है , अन्यथा आदि ग्रहों की तरह धरती का जीवन-चक्र भी एक दिन समाप्त हो जायेगा।





Comments Xyz on 01-02-2020

Pariyawarn kid avakshakta



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