राजा गंगा सिंह की कहानी

Raja Ganga Singh Ki Kahani

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GkExams on 11-02-2019

जनरल सर गंगासिंह(3 अक्टूबर 1880, बीकानेर – 2 फरवरी 1943, मुम्बई) 1888 से 1943 तक बीकानेर रियासत के महाराजा थे। उन्हें आधुनिक सुधारवादी भविष्यद्रष्टा के रूप में याद किया जाता है। पहले महायुद्ध के दौरान ‘ब्रिटिश इम्पीरियल वार केबिनेट’ के अकेले गैर-अँगरेज़ सदस्य थे।

3 अक्तूबर 1880 को बीकानेर के महाराजा लालसिंह की तीसरी संतान के रूप में जन्मे गंगासिंह, डूंगर सिंह के छोटे भाई थे, जो बड़े भाई के देहांत के बाद 1887 ईस्वी में 16 दिसम्बर को बीकानेर-नरेश बनेपहले विश्वयुद्ध में एक फ़ौजी अफसर के बतौर गंगासिंह ने अंग्रेजों की तरफ से ‘बीकानेर कैमल कार्प्स’ के प्रधान के रूप में फिलिस्तीन, मिश्र और फ़्रांस के युद्धों में सक्रिय हिस्सा लिया। 1902 में ये प्रिंस ऑफ़ वेल्स के और 1910 में किंग जॉर्ज पंचम के ए डी सी भी रहे।उनकी प्रारंभिक शिक्षा पहले घर ही में, फिर बाद में अजमेर के मेयो कॉलेज में 1889 से 1894 के बीच हुई। ठाकुर लालसिंह के मार्गदर्शन में 1895 से 1898 के बीच इन्हें प्रशासनिक प्रशिक्षण मिला। 1898 में गंगा सिंह फ़ौजी-प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए देवली रेजिमेंट भेजे गए जो तब ले.कर्नल बैल के अधीन देश की सर्वोत्तम मिलिट्री प्रशिक्षण रेजिमेंट मानी जाती थी।


महायुद्ध-समाप्ति के बाद अपनी पुश्तैनी बीकानेर रियासत में लौट कर उन्होंने प्रशासनिक सुधारों और विकास की गंगा बहाने के लिए जो-जो काम किये वे किसी भी लिहाज़ से साधारण नहीं कहे जा सकते| 1913 में उन्होंने एक चुनी हुई जन-प्रतिनिधि सभा का गठन किया, 1922 में एक मुख्य न्यायाधीश के अधीन अन्य दो न्यायाधीशों का एक उच्च-न्यायालय स्थापित किया और बीकानेर को न्यायिक-सेवा के क्षेत्र में अपनी ऐसी पहल से देश की पहली रियासत बनाया। अपनी सरकार के कर्मचारियों के लिए उन्होंने ‘एंडोमेंट एश्योरेंस स्कीम’ और जीवन-बीमा योजना लागू की, निजी बेंकों की सेवाएं आम नागरिकों को भी मुहैय्या करवाईं, और पूरे राज्य में बाल-विवाह रोकने के लिए शारदा एक्ट कड़ाई से लागू किया! 1917 में ये ‘सेन्ट्रल रिक्रूटिंग बोर्ड ऑफ़ इण्डिया’ के सदस्य नामांकित हुए और इसी वर्ष उन्होंने ‘इम्पीरियल वार कांफ्रेंस’ में, 1919 में ‘पेरिस शांति सम्मलेन’ में और ‘इम्पीरियल वार केबिनेट’ में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 1920 से 1926 के बीच गंगा सिंह ‘इन्डियन चेंबर ऑफ़ प्रिन्सेज़’ के चांसलर बनाये गए। इस बीच 1924 में ‘लीग ऑफ़ नेशंस’ के पांचवें अधिवेशन में भी इन्होंने भारतीय प्रतिनिधि की हैसियत से हिस्सा लिया।


वर्साय के शान्ति समझौते में बीकानेर के इस शासक को बुलाया गया था. इन्होने देशी राज्यों के मुखिया के रूप में सम्मेलन में हिस्सा लिया. वर्ष 1921 में नरेंद्रमंडल का गठन इन्ही की बदौलत किया गया, बाद में गंगासिंह को इसका अध्यक्ष चुना गया था. गंगा सिंह देशी राज्यों के हितों के पक्षधर तथा अंग्रेजों के चाटुकार थे. इन्होने अपने जीवन काल में एक जनहित का कार्य किया वो था.
गंगनहर का लाना, जिसके कारण इन्हें कलयुग का भागीरथ भी कहते हैं.



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