राजस्थान का प्रथम साका

Gk Exams at  2018-03-25

Rajasthan Ka Pratham Saka



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GkExams on 25-03-2018

युद्ध के दौरान परिस्थितियां ऐसी बन जाती थी कि शत्रु के घेरे में रहकर जीवित नहीं रहा जा सकता था। तब जौहर और शाके (महिलाओं को अपनी आंखों के आगे जौहर की ज्वाला में कूदते देख पुरूष कसुम्बा पान कर, रणक्षेत्र में उतर पड़ते थे कि या तो विजयी होकर लोटेंगे अन्यथा विजय की कामना हृदय में लिए अन्तिम दम तक शौर्यपूर्ण युद्ध करते हुए दुश्मन सेना का ज्यादा से ज्यादा नाश करेंगे। या फिर रणभूमि में चिरनिंद्रा में शयन करेंगे। साका- महिलाओं को जौहर की ज्वाला में कूदने का निश्चय करते देख पुरूष केशरिया वस्त्र धारण कर मरने मारने के निश्चय के साथ दुश्मन सेना पर टूट पड़ते थे। इसे साका कहा जाता है।


प्रथम साका- यह सन् 1303 में राणा रतन सिंह के शासनकाल में अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ पर आक्रमण के समय हुआ था। इसमें रानी पद्मनी सहित स्त्रियों ने जौहर किया था। अलाउद्दीन की महत्वाकांक्षा और राणा रतनसिंह की अनिंद्य सुंदरी रानी पद्मिनी को पाने की लालसा हमले का कारण बनी। चित्तौड़ के दुर्ग में सबसे पहला जौहर चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी के नेतृत्व में 16000 हजार रमणियों ने अगस्त 1303 में किया था।

जैसलमेर के ढाई साके- जैसलमेर में कुल ढाई साके होना माना जाता है।
प्रथम साका- यह अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय हुआ था। इसमें भाटी शासक रावल मूलराज, कुंवर रतनसी सहित अगणित योद्धाओं ने असिधारा तीर्थ में स्नान किया और ललनाओं ने जौहर का अनुष्ठान किया।

गागरोण के किले के साके-
प्रथम साका- 1423 ईस्वी में जब वहां के अतुल पराक्रमी शासक अचलदास खींची के शासनकाल में मांडू के सुल्तान अलपखां (होशंगशाह) गोरी ने आक्रमण किया। भीषण संग्राम के दौरान अचलदास ने अपने बंधु बांधवों और योद्धाओं के साथ वीरगति प्राप्त की। जबकि रानियों व दुर्ग की अन्य ललनाओं ने अपने को जौहर की ज्वाला में होम कर दिया।
दूसरा साका- गागरोण का दूसरा साका 1444 ईस्वी में हुआ। जब मांडू के सुल्तान महमूद खिलजी ने विशाल सेना के साथ इस दुर्ग पर आक्रमण किया।


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Comments Sandeep on 25-03-2018

Rajsthan ka pratham saka kahan hua

sukhpal meena on 25-03-2018

kota ka name kota kayou pada h



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