धर्मनिरपेक्षता परिभाषा

Dharmnirpekshta Paribhasha

Pradeep Chawla on 12-05-2019

धर्मनिरपेक्षता, पन्थनिरपेक्षता या सेक्युलरवाद धार्मिक संस्थानों व धार्मिक उच्चपदधारियों से सरकारी संस्थानों व राज्य का प्रतिनिधित्व करने हेतु शासनादेशित लोगों के पृथक्करण का सिद्धान्त है। यह एक आधुनिक राजनैतिक एवं संविधानी सिद्धान्त है। धर्मनिरपेक्षता के मूलत: दो प्रस्ताव है 1) राज्य के संचालन एवं नीति-निर्धारण में मजहब (रेलिजन) का हस्तक्षेप नहीं होनी चाहिये। 2) सभी धर्म के लोग कानून, संविधान एवं सरकारी नीति के आगे समान है।









अनुक्रम



  • 1इतिहास
  • 2छद्म धर्मनिरपेक्षता
  • 3इन्हें भी देखें
  • 4सन्दर्भ
  • 5बाहरी कड़ियाँ






इतिहास

धर्मनिरपेक्षता (सेक्यूलरिज़्म) शब्द का पहले-पहल प्रयोग बर्मिंघम के जॉर्ज जेकब हॉलीयाक ने सन् 1846

के दौरान, अनुभवों द्वारा मनुष्य जीवन को बेहतर बनाने के तौर तरीक़ों को

दर्शाने के लिए किया था। उनके अनुसार, “आस्तिकता-नास्तिकता और धर्म ग्रंथों

में उलझे बगैर मनुष्य मात्र के शारीरिक, मानसिक, चारित्रिक, बौद्धिक

स्वभाव को उच्चतम संभावित बिंदु तक विकसित करने के लिए प्रतिपादित ज्ञान और

सेवा ही धर्मनिरपेक्षता है”।



छद्म धर्मनिरपेक्षता

मुख्य लेख : छद्म धर्मनिरपेक्षता


धर्मनिरपेक्ष देशों में धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखने के लिए तमाम तरह के

संविधानिक क़ायदे कानून हैं। परंतु प्रायः राष्ट्रों के ये क़ायदे क़ानून

समय-समय पर अपना स्वरूप बहुसंख्य जनता के धार्मिक विश्वासों से प्रेरित हो

बदलते रहते हैं, या उचित स्तर पर इन कानूनों का पालन नहीं होता, या

प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष स्तर पर इनमें ढील दी जाती रहती हैं। यह छद्म

धर्मनिरपेक्षता है।



इन्हें भी देखें

  • धर्मनिरपेक्ष राज्य यह एक राज्य के अस्तित्व के लिए बहुत आवश्यक है यह राज्य का एक महत्वपूर्ण अंग है



Comments Dharmnirpekshta kyon avashyak Hai on 23-01-2020

Dharmnirpekshta kyon avashyak Hai

Neha chauhan on 20-01-2019

Dhrm nirpeksh kya h



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