मनु के सप्तांग सिद्धांत क्या है

Manu Ke Saptang Sidhhant Kya Hai

Pradeep Chawla on 12-05-2019

1. राजा या स्वामी



कौटिल्य ने राजा को राज्य का केंद्र व अभिन्न अंग माना है तथा उन्होनें राजा की तुलना शीर्ष से की है. उनका मानना है कि राजा को दूरदर्शी, आत्मसंयमी, कुलीन,स्वस्थ,बौद्धिक गुणों से संपन्न तथा महावीर होना चाहिए. वे राजा को कल्याणकारी तथा जनता के प्रति उत्तरदायी होने की सलाह देते हैं क्योंकि उनके अनुसार राजा कर्तव्यों से बँधा होता है. हालाँकि वे राजा को सर्वोपरि मानते हैं परन्तु उसे निरंकुश शक्तियाँ नहीं देते. उन्होनें राजा की दिनचर्या को भी पहरों में बाँटा है अर्थात् वे राजा के लिए दिन को तथा रात को आठ-आठ पहरों में विभाजित करते हैं.

2. अमात्य या मंत्री



कौटिल्य ने अमात्य और मंत्री दोनों की तुलना की “आँख” से की है. उनके अनुसार अमात्य तथा राजा एक ही गाड़ी के दो पहिये हैं. अमात्य उसी व्यक्ति को चुना जाना चाहिए जो अपनी जिम्मेदारियों को सँभाल सके तथा राजा के कार्यों में उसके सहयोगी की भांति भूमिका निभा सके.

3. जनपद



कौटिल्य ने इसकी तुलना “पैर” से की है. जनपद का अर्थ है “जनयुक्त भूमि”. कौटिल्य ने जनसंख्या तथा भू-भाग दोनों को जनपद माना है. उन्होनें दस गाँवों के समूह में “संग्रहण”, दो सौ गाँवों के समूह के बीच “सार्वत्रिक”, चार सौ गाँवों के समूह के बीच एक “द्रोणमुख” तथा आठ सौ गाँवों में एक “स्थानीय” अधिकारी की स्थापना करने की बात कही है.

4. दुर्ग



कौटिल्य ने दुर्ग की तुलना “बाँहों” या “भुजाओं” से की है तथा उन्होंने चार प्रकार के दुर्गों की चर्चा की है:-



i) औदिक दुर्ग-जिसके चारों ओर पानी हो.



ii) पार्वत दुर्ग-जिसके चारों ओर चट्टानें हों.



iii) धान्वन दुर्ग-जिसके चारों ओर ऊसर भूमि.



iv) वन दुर्ग-जिसके चारों ओर वन तथा जंगल हो.

5) कोष



इसकी तुलना कौटिल्य ने “मुख” से की है. उन्होंने कोष को राज्य का मुख्य अंग इसलिए माना है क्योंकि उनके अनुसार कोष से ही कोई राज्य वृद्धि करता है तथा शक्तिशाली बने रहने के लिए कोष के द्वारा ही अपनी सेना का भरण-पोषण करता है. उन्होंने कोष में वृद्धि का मार्ग करारोपण बताया है जिसमें प्रजा को अनाज का छठा, व्यापार का दसवाँ तथा पशु धन के लाभ का पचासवाँ भाग राजा को कर के रूप में अदा करना होगा.

6) दंड या सेना



कौटिल्य ने सेना की तुलना “मस्तिष्क” से की है. उन्होंने सेना के चार प्रकार बताये हैं- हस्ति सेना, अश्व सेना, रथ सेना तथा पैदल सेना. उनके अनुसार सेना ऐसी होनी चाहिए जो साहसी हो, बलशाली हो तथा जिसके हर सैनिक के हृदय में देशप्रेम हो तथा वीरगति को प्राप्त हो जाने पर जिसके परिवार को उस पर अभिमान हो.

7) मित्र



मित्र को कौटिल्य ने “कान” कहा है. उनके अनुसार राज्य की उन्नति के लिए तथा विपत्ति के समय सहायता के लिए राज्य को मित्रों की आवश्यकता होती है.



Comments Yogesh Kumar Watti on 19-07-2021

मनु के सप्तांग सिद्धांत कि विवेचना कीजिए

Joga Ram on 12-07-2021

nown Tum Patang Siddhant ka Arth AVN paribhasha

Hemlata patel on 11-07-2021

मनु के सप्तांग सिद्धांत की विवेचना कीजिए

Durga on 11-07-2021

Manu ke saptaang sidhanta की वि वे च ना की जि ऐ

Shubham on 10-07-2021

Manu k kosh sanchy saeidaat m nimnklikit m s kya saliti nhi h

Sunita on 23-06-2021

Manu Ka saptaang sidhaant kya hai


Anuradha Paikara on 01-06-2021

Manu ki ashram waywasta kya h

Chinmoy roy on 23-04-2021

Manu ke anusaran saptang sanskrit mein

umeshjatav789@gmll.com on 19-01-2021

मनु के अनुसार राज्य के सप्तांग सिद्धांतो का वर्णन कीजिए

Alka on 23-09-2020

Manu ke saptang siddhant ka hissa Nahin hai

Kamlesh patel on 17-01-2020

Manuvadi vichadhara

मनु के राज्य में जनपद मे कितने समूह थे on 18-11-2019

मनु के राज्य में जनपद मे कितने समूह थे


Babita patel on 13-11-2019

Kautilya ke shatagud sidhadta Kya hai samajhaye

दिलीप on 26-08-2019

मनुका सपतांग सिधदांत कया है

Naresh Tyagi on 12-05-2019

Nriptantrais the synonyms of which

Gyan dev on 12-05-2019

सर शाप्तांग राज्य के सिद्धांत को पहले किसने लिखा है?
मनु या कौटिल्य

rahul sharma jeelo on 04-02-2019

paleto ka satya sidant kya hai?



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