छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता 1959 pdf

Chattishgadh Bhu Rajaswa Sanhita 1959 pdf

Pradeep Chawla on 12-05-2019

छत्तीसगढ (म.प्र.) भू-राजस्व संहिता, १९५९ : धारा संक्षिप्‍त

अध्याय-१



१. संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारम्भ

२. परिभाषाएँ



अध्याय-२ राजस्व मंडल (बोर्ड)



३. राजस्व मंडल का गठन

४. राजस्व मंडल का प्रधान स्थान तथा उसकी बैठकों के अन्य स्थान

५. मंडल के सदस्यों की सेवा शर्ते

६. वेतन तथा भत्ते

७. मण्डल की अधिकारिता

८. मण्डल की अधीक्षण सम्बन्धी शक्तियां

९. एक सदस्यीय तथा बहुत सदस्यीय न्यायपीठों द्वारा अधिकारिता का प्रयोग

१०. संहिता के प्रारम्भ होने के समय विचाराधीन मामले



Sanjeev Tiwari, Advocate



Chambers of Om Sai Associates (Advocates and Legal Consultants)Office - 1st floor, Gaur Complex, Rajendra Park Chowk, Durg, Chhattisgarh.Rec. - Suryodaya Nagar, Khandelwal Colony, Durg, Chhattisgarh.





अध्याय-३ राजस्व अधिकारी, उनके वर्ग तथा शक्तियां



११. राजस्व पदाधिकारी

१२. राजस्व पदाधिकारियों पर नियंत्रण

१३. सम्भागों, जिलों, उपखंडों तथा तहसीलों को परिवर्तित करने, उनकी रचना करने या उन्हें समाप्त करने की शक्ति

१४. लुप्त

१५. लुप्त

१६. कलेक्टर को नियुक्त करने की शक्ति

१७. अपर कलेक्टर को नियुक्त करने की शक्ति

१८. सहायक कलेक्टरों, संयुक्त कलेक्टरों तथा डिप्टी कलेक्टरों की नियुक्ति और शक्तियां

१९. तहसीलदारों, अपर तहसीलदारों तथा नायब तहसीलदारों की नियुक्ति

२०. भू-अभिलेखों अधीक्षक तथा सहायक भू-अभिलेख अधीक्षकों की नियुक्ति

२१. अन्य पदाधिकारी

२२. उपखंड अधिकारी

२३. राजस्व अधिकारियों की अधीनस्थता

२४. राज्य सरकार द्वारा राजस्व अधिकारियों की शक्तियों का पदाधिकारियों तथा अन्य व्यक्तियों को प्रदत्त किया जाना ।

२५. स्थानान्तरण होने पर प्रयोगनीय शक्तियां

२६. अस्थायी रिक्ति होने की दशा में कलेक्टर









अध्याय-४ राजस्व पदाधिकारियों तथा राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया



२७. जांच करने के लिये स्थान

२८. भूमि पर प्रवेश करने तथा उसका सर्वेक्षण करने की शक्ति

२९. मामलों की अन्तरित करने की शक्ति

३०. अधीनस्थों को तथा उनके पास से मामले अन्तरिम करने की शक्ति

३१. मण्डल तथा राजस्व अधिकारियों को न्यायालयों की प्रास्थिति प्रदान किया जाना

३२. राजस्व न्यायालय की अन्तर्निहित शक्ति

३३. व्यक्तियों के हाजिर होने तथा दस्तावेज पेश करने की अपेक्षा करने तथा साक्ष्य लेने की राजस्व अधिकारियों की शक्तियां

३४. साक्षी को हाजिरी के लिये विवश करना

३५. पक्षकार की अनुपस्थिति में सुनवाई

३६. सुनवाई का स्थगन

३७. व्यय दिलाने की शक्ति

३८. स्थावर सम्पत्ति का कब्जा परिदत्त करने विषयक आदेश को निष्पादित(तामिल) करने की रीति

३९. वे व्यक्ति जिनके द्वारा, राजस्व अधिकारियों के समक्ष उपसंजाति (हाजिरी) की जा सकेगी और आवेदन किये जा सकेंगे ।

४०. अनुसूची १ में के नियों का प्रभाव

४१. मंडल को नियम बनाने की शक्ति

४२. राजस्व पदाधिकारियों के आदेश-भूल या अनियमितता के कारण कब उल्टे जा सकेंगे

४३. इस संहिता में स्पष्ट उपबन्ध न होने की दशा में व्यवहार-प्रक्रिया संहिता का लागू होना ।









अध्याय-५ अपील, पुनरीक्षण तथा पुनर्विलोकन



४४. अपील तथा अपीलीय अधिकारी

४५. कतिपय लम्बित कार्यवाहियों का बन्दोबस्त आयुक्त को अन्तरण

४६. कतिपय आदेशों के विरुद्ध कोई अपील नहीं होगी

४७. अपीलों की परिसीमा

४८. याचिका (अरजी) के साथ उस आदेश की प्रतिलिपि होगी जिसके कि सम्बन्ध में आपत्ति की गई है ।

४९. अपील प्राधिकारी की शक्ति

५०. पुनरीक्षण

५१. आदेशों का पुनर्विलोकन

५२. आदेशों के निष्पादन का रोका जाना

५३. लिमिटेशन एक्ट का लागू होना

५४. लम्बित पुनरीक्षण

५४-ए लुप्त

५५. अध्याय का लागू होना

५६. आदेश का अर्थान्वयन









अध्याय-६ भूमि का राजस्व



५७. समस्त भूमियों में राज्य का स्वामित्व

५८. भू-राजस्व के भुगतान के लिये भूमि का दायित्व

५८-अ. कतिपय भूमियों को भू-राजस्व की देनकी से छूट दी जायेगी ।

५९. जिस प्रयोजन के लिये भूमि उपयोग में लाइ जाए उसी के अनुसार भू-राजस्व में फेरफार-

५९-ए. निर्धारण कब प्रभावशील होगा

५९-बी. कोड के प्रवृत्त होने के पूर्व व्यपवर्तित भूमि पर पुन: निर्धारण संशोधन अधिनियम क्र. १५/१९७५ के उद्देश्य

६०. निर्धारण किसके द्वारा नियत किया जायेगा ।









अध्याय-७ नगरेतर क्षेत्रों में राजस्व सर्वेक्षण तथा बन्दोबस्त



६१.इस अध्याय का नगरेतर क्षेत्रों में की भूमियों का लागू होना

६२. बन्दोबस्त आयुक्त की नियुक्ति

६३. अपर बन्दोबस्त आयुक्तों की नियुक्ति और उनकी शक्तियां तथा कर्तव्य

६४. बन्दोबस्त अधिकारी, उप बन्दोबस्त अधिकारियों तथा सहायक बन्दोबस्त अधिकारियों की नियुक्ति

६५. बन्दोबस्त अधिकारी उपबंदोबस्त अधिकारी तथा सहायक बन्दोबस्त अधिकारी की शक्तियां

६६. राजस्व सर्वेक्षण की परिभाषा

६७. प्रस्थापित राजस्व सर्वेक्षण की अधिसूचना

६८. सर्वेक्षण-संख्यांको तथा ग्रामों की विरचना

६९. व्यपवर्तित की गई या विशेष रुप से समनुदेशित की गई भूमि का पृथक सीमांकन

७०. सर्वेक्षण-संख्यांकों को पुनर्क्रमांकित या उप-विभाजित करने की शक्ति

७१. अभिलेखों में सर्वेक्षण-संख्यांकों तथा उपखंडों की प्रविष्टि

७२. ग्राम की आबादी का अवधारण

७३. ग्रामों को विभाजित करने या संयोजित करने या उनमें से किसी क्षेत्र को अपवर्जित करने की बन्दोबस्त अधिकारी की शक्ति

७४. ग्रामों के समूह बनाना





७५. बन्दोबस्त की परिभाषा

७६. प्रस्तावित बन्दोबस्त की अधिसूचना

७७. निर्धारण दरों का नियत किया जाना

७८. निर्धारण की दर के लिये अधिकतम तथा न्यूनतम सीमाएँ

७९. उचित निर्धारण का नियत किया जाना

८०. समस्त भूमियां निर्धारण के दायित्वधीन होंगी

८१. निर्धारण के सिद्धांत

८२. बन्दोबस्त का आख्यापन

८३. बन्दोबस्त का प्रारंभ

८४. अधिकारों को त्यागने वाले भूमिस्वामी की वृद्धि से माफी

८५. बन्दोबस्त की अवधि

८६. अधूरी कार्यवाहियों को पूरा करने की कलेक्टर की शक्ति

८७. कृषि के लाभों तथा भूमि के मूल्य के संबंध में जांच

८८. नक्शें तथा अभिलेख रखने का कर्तव्य बन्दोबस्त अधिकारी की अन्तरित करने की शक्ति

८९. गलतियों को ठीक करने की उपखंड अधिकारी की शक्ति

९०. बन्दोबस्त आदि की अवधि के दौरान कलेक्टर की शक्ति

९१. बन्दोबस्त की अवधि के दौरान बन्दोबस्त अधिकारी को, शक्ति प्रदान करने की शक्ति

९१-क. नियम बनाने की शक्ति









अध्याय-८ नगरीय क्षेत्रों में भूमि का निर्धारण तथा पुनर्निर्घारण



९२. इस अध्याय के उपबन्ध नगरीय क्षेत्रों में की भूमि को लागू होंगे

९३. भूमियों को भू-खंड संख्यांकों में विभाजित करने की कलेक्टर की शक्तियां

९४. भू-खंड संख्यांकों को पुनर्क्रमांकित करने या उपविभाजित करने की कलेक्टर की शक्तियां

९५. भू-खंड संख्यांकों तथा उपखंडों का क्षेत्रफल तथा निर्धारण अभिलेखों में दर्ज किया जायेगा

९६. निर्धारण के लिये नगर का क्षेत्रखंडों में विरचित किया जायेगा ।

९७. कलेक्टर द्वारा निर्धारण का मानक दर का नियत किया जाना तथा मानक दरों का प्रकाशन

९८. निर्धारण की मानक दरों का नियत किया जाना

९९. निर्धारण की दर के लिये अधिकतम तथा न्यूनतम सीमाएँ

१००. कलेक्टर भू-खंड पर निर्धारण विहित की गई दर से करेगा

१०१. बन्दोबस्त की अवधि

१०२. नियत किया गया निर्धारण भू-राजस्व या लगान होगा

१०३. पूर्व के बन्दोबस्त या पट्टों के अधीन नियत किया गया भू-राजस्व या लगान चालू रहेगा ।

१०४. पटवारी के हल्कों की विरचना तथा उनमें पटवारियों की नियुक्ति

१०५. राजस्व निरीक्षकों के हलकों की विरचना

१०६. राजस्व निरीक्षकों आदि की नियुक्ति

१०७. खेत का नक्शा

१०८. अधिकार-अभिलेख

१०९. अधिकारों के अर्जन की रिपोर्ट की जायेगी

११०. क्षेत्र पुस्तक तथा अन्य सुसंगत भू-अभिलेखों में अधिकार अर्जन बाबत नामान्तरण

१११. सिविल न्यायालयों की अधिकारिता

११२. अन्तरणों के संबंध में रजिस्ट््रीकर्ता अधिकारियों द्वारा प्रज्ञापन

११३. लेखन संबंधी गलतियों का शुद्धिकरण

११४. भू-अभिलेख

११४-ए. किसान किताब

११५. खसरा तथा किन्हीं अन्य भू-अभिलेखों में गलत प्रविष्टि का वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा शुद्धिकरण

११६. खसरा या किन्हीं अन्य भू-अभिलेखों में की प्रविष्टि के बारे में विवाद

११७. भू-अभिलेखों में की प्रविष्टियों के बारे में उपधारणा

११८. हक के बारे में जानकारी देने की बाध्यता

११९. जानकारी देने में उपेक्षा करने के लिये शास्ति

१२०. नक्शे तथा अधिकार-अभिलेख तैयार करने में सहायता की अध्यपेक्षा

१२१. भू-अभिलेखों के लिये नियम बनाने की शक्ति

१२२. इस अध्याय के उपबन्धों से छूट

१२३. संहिता के प्रारंभ होने के समय अधिकार अभिलेख









अध्याय-१० सीमाएं, तथा सीमाचिन्ह, सर्वेक्षण चिन्ह



१२४. ग्रामों तथा सर्वेक्षण-संख्यांकों या भू-खंड संख्यांकों के सीमा चिन्हों का सन्निर्माण

१२५. ग्रामों, सर्वेक्षण संख्यांकों के बीच सीमाआें के बारे में विवाद

१२६. संदोष कब्जा रखने वाले व्यक्तियों को बेदखली

१२७. सीमांकन तथा सीमा पंक्तियों का अनुरक्षण

१२८. सीमा चिन्हों या सर्वेक्षण चिन्हों की मरम्मत कराने के लिये बाध्य करना ।

१२९. सर्वेक्षण संख्यांक या उपखंड या भू-खंड संख्यांक को सीमांकन

१३०. सीमा चिन्हों या सर्वेक्षण चिन्हों को विनष्ट करने, क्षति पहुँचाने या हटाने के लिये शास्ति (पेनाल्टी)

१३१. मार्गाधिकार तथा अन्य प्रायवेट सुखाचार सम्बन्धी अधिकार

१३२. मार्ग आदि पर बाधा उपस्थित करने के लिये शास्ति

१३३. बाधा का हटाया जाना

१३४. कतिपय कार्यो के लिये पुनरावृति विरत रहने के लिये बन्ध-पत्र का निष्पादन

१३५. सड़क, पथ आदि के लिये भूमि का अर्जन

१३६. इस अध्याय के प्रवर्तन से छूट देने की शक्ति

१३७. भू-राजस्व भूमि पर प्रथम भार होगा ।

१३८. भू-राजस्व के भुगतान के लिये उत्तरदायित्व

१३९. भू-राजस्व कब्जा रखने वाले किसी भी व्यक्ति से वसूल किया जायेगा

१४०. तारीख जिसको भू-राजस्व शोध्य होगा तथा देना होगा ।

१४१. बकाया तथा बकायादार की परिभाषाएँ

१४२. पटेल, पटवारी, ग्राम सभा या ग्राम पंचायत रसीद देने के लिये आबद्ध होंगे

१४३. भू-राजस्व के भुगतान में व्यक्तिक्रम के लिये शास्ति

१४४. फसलों के मारे जाने पर भू-राजस्व की माफी या उसका निलम्बन

१४५. प्रमाणित लेखा बकाया तथा बकायादार के बारे में साक्ष्य होगा

१४६. मांग की सूचना

१४७. बकाया की वसूली के लिये आदेशिका

१४८. खर्चे बकाया के भाग के रुप में वसूल किये जा सकेंगे

१४९. अन्य जिलों में आदेशिकाआें का प्रवर्तन

१५०. अभ्यापति के साथ भुगतान तथा वसूली के लिये बाद

१५१. विक्रय आगामों का आयोजन

१५२. बकाया के लिये बेची गई भूमिविल्लंगमों (एन्कमर्बेसेज) से मुक्त होगी

१५३. क्रेता का हक

१५४. क्रेता विक्रय के पूर्व शोध्य भू-राजस्व के लिये दायी नहीं होगा

१५४-ए. उस खाते को, जिसके सम्बंध में बकाया शोध्य हो,

या बकायादार किसी अन्य खाते का पट्टे पर देने की तहसीलदार की शक्तियां

१५५. भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूली योग्य धन

१५६. प्रतिभू से धनों की वसूली









अध्याय-१२ भू-धारणाधिकारी (भू-धारी)



१५७. भू-धारणाधिकारी (भूधृति) का वर्ग

१५८. भूमिस्वामी

१५९. भूमिस्वामियों द्वारा देय भू-राजस्व

१६०. भू-राजस्व का भुगतान करने के दायित्व से दी गई छू ट का प्रतिसंहरण

१६१. बन्दोबस्त चालू रहने के दौरान राजस्व में कमी

१६२. कलेक्टर द्वारा भूमि का निवर्तन (लुप्त)

१६३. भूस्वामी अधिकार प्रदान किये जाने के लिये लम्बित आवेदन

१६४. न्यागमन

१६५. अन्तरण के अधिकार

१६६. कतिपय अन्तरणों के मामलों में समपहरण

१६७. भूमि का विनिमय

१६८. पट्टे

१६९. अनाधिकृत पट्टा आदि

१७०. धारा १६५ उल्लंघन में किये गये अन्तरण का परिवर्जन

१७०-ए. कतिपय अन्तरणों का अपास्त किया जाना

१७०-ख. आदिम जनजाति के सदस्य की ऐसी भूमि का जो कपट द्वारा अन्तरित की गई थी प्रतिवर्तन

१७०-ग. अनुज्ञा के बिना धारा १७०-ए या १७० ख के अधीन की कार्यवाहियों में अधिवक्ता का उपसंजात न होना

१७०-घ. द्वितीय अपील का वर्जन

१७१. सुधार करने का अधिकार

१७२. भूमि का व्यपवर्तन

१७३. त्यजन

१७४. त्यजन किये गये उपखंड का निपटारा

१७५. त्यजन की गई भूमि के लिये मार्ग का अधिकार

१७६. खाते का परित्याग

१७७. खाते का निपटारा

१७८. खाते का विभाजन

१७८-ए. भूमि स्वामी के जीवनकाल में भूमि का बंटवारा

१७९. खाते में के वृक्षों पर अधिकार

१८०. वृक्षों के अन्तरण पर निर्बन्धन









अध्याय-१३ सरकारी पट्टेदार तथा सेवा भूमि



१८१. सरकारी पट्टेदार

१८२. सरकारी पट्टेदार के अधिकार तथा दायित्व

१८३. सेवा भूमि

१८४. सिरोंज क्षेत्र में की सेवा भूमि का उस दशा में निपटारा जबकि सेवाओं की आगे आवश्यकता न हो









अध्याय-१४- मौरुसी (दखलकार) कृषक



१८५. मौरुसी कृषक

१८६. अधिकतम लगान

१८७. परिवर्तन

१८८. लगान

१८९. कतिपय मामलों में भूमिस्वामी द्वारा पुनर्ग्रहण

१९०. मौरुसी कृषकों को भूमिस्वामी अधिकारों का प्रदान किया जाना

१९१. मौरुसी कृषक को भूमि वापस दिलाया जाना

१९२. मौरुसी कृषक अधिकारों का न्यागमन

१९३. कृषकाधिकार की समाप्ति

१९४. ऐसी मौरुसी कृषक को जिसका कि कृषिकाधिकार समाप्त कर दिया गया हो, लागू होने वाले उपलब्ध

१९५. मौरुसी कृषक के अन्तरण सम्बन्धी अधिकार

१९६. सुधार करने के मौरुसी कृषक के अधिकार

१९७. मौरुसी कृषक द्वारा किये गये अन्तरणों को अपास्त कराने के लिये आवेदन करने का कतिपय व्यक्तियों का अधिकार

१९८. अभ्यर्पण

१९९. रसीद

२००. रसीन न देने या अधिक वसूली के लिये शास्ति

२०१. भू-राजस्व की माफी तथा उसके निलम्बन के परिणामस्वरुप लगान की माफी तथा उसका निलम्बन

२०२. दोषपूर्ण ढंग से बेदखल किये गये मौरुसी कृषक का पुन:स्थापन









अधयाय-१५ जलोढ तथा जलप्लावन



२०३. जलोढ तथा जलप्लावन

२०४. निर्धारण करने तथा विवादों को विनिश्चित करने की शक्ति



अध्याय-१६



२०५. परिभाषाएँ

२०६. चकबन्दी कार्यवाहियों का शुरु किया जाना

२०७. आवेदन का नामन्जूर किया जाना

२०८. आवेदन का ग्रहण किया जाना

२०९. खातों की चकबन्दी के लिये स्कीम का तैयार किया जाना

२१०. स्कीम की पुष्टि

२११. पुष्टि हो जाने पर प्रक्रिया

२१२. खातों के कब्जे के संबंध में भूमिस्वामियों के अधिकार

२१३. भूमिस्वामियों के उनके खातों में के अधिकारों का अन्तरण

२१४. अन्तरण प्रभावान्वित करने के लिये लिखत आवश्यक नहीं होगी

२१५. स्कीम को कार्यान्वित करने के खर्चे

२१६. प्रतिकर तथा खर्चे की वसूली

२१७. विभाजन कार्यवाहियों का चकबन्दी कार्यवाहियों से चालू रहने के दौरान निलम्बन

२१८. कार्यवाहियों के दौरान सम्पत्ति का अन्तरण

२१९. चकबन्दी के पश्चात भूस्वामियों के अधिकार पूर्ववत् बने रहेंगे

२२०. भूमिस्वामियों के विल्लंगम

२२१. नियम बनाने की शक्ति









अध्याय-१७ ग्राम अधिकारी



२२२. पटेलों की नियुक्ति

२२३. पटेलों का पारिश्रमिक

२२४. पटेलों के कर्तव्य

२२५. किसी विधी के अधीन भू-धारकों पर अधिरोपित कर्तव्य पटेलों पर अधिरोपित कर्तव्य का हटाया जाना

२२६. पटेलों का हटाया जाना

२२७. पटेलों को दण्ड

२२८. प्रतिस्थानी पटेल की नियुक्ति

२२९. ग्राम पं्रबंध का सौंपा जाना

२३०. कोटवारों की नियुक्ति तथा उनके कर्तव्य

२३१. कोटवारों का पारिश्रमिक

ग. ग्राम सभा

२३२. ग्राम सभा



अध्याय-१८ आबाद तथा दखल रहित भूमि में और उसकी उपज में अधिकार



२३३. दखल रहित भूमि का अभिलेख

२३४. निस्तार पत्रक का तैयार किया जाना

२३५. विषय जिनका विस्तार पत्रक में उपबंध किया जायेगा

२३६. निस्तार पत्रक में कतिपय विषयों के लिये उपबन्ध

२३७. निस्तार अधिकारों के प्रयोग के लिये कलेक्टर द्वारा भूमि का पृथक रखा जाना

२३८. दूसरे ग्राम की बंजर भूमि के अधिकार

२३९. दखलरहित भूमि भाठा भूमि तथा बड़े झाड़/छोटे झाड़ के जंगल में रोपित फलदार वृक्षों और अन्य फलदार वृक्षों में अधिकार

२४०. कतिपय वृक्षों के काटे जाने का प्रतिषेध

२४१. सरकारी वनों से इमारती लकड़ी की चोरी रोकने के उपाय

२४२. वाजिब उल अर्ज

२४३. आबादी

२४४. आबादी स्थलों का निपटारा

२४५. भू-राजस्व संहिता बिना गृह स्थल धारण करने का अधिकार

२४६. आबादी के गृहस्थल धारण करने वाले व्यक्तियों का अधिकार

२४७. खनिजों के सम्बन्ध में सरकार का हक

२४८. अप्राधिकृत रुप से भूमि पर कब्जा कर लेने के लिये शास्ति

२४९. मछली पकड़ने, आखेट करने आदि का विनियमन

२५०. अनुचित रुप से बे-कब्जा किये गये भूमि स्वामी का पुन: स्थापन

२५०-क. धारा २५० के अधीन कब्जा वापस न दिया जाने पर सिविल कारागार में परिरोध

२५०-ख. भूमि के आबंटिती के पक्ष में भूमि खाली न करना अपराध होगा

२५१. तालाबों का राज्य शासन में निहित होना

२५२. लोकोपयोगी निर्माण कार्यो का अनुरक्षण

२५३. उपबन्धों के उल्लंघन के लिये दण्ड

२५४. ग्राम सभा के कर्तव्यों का पटेल द्वारा पालन किया जाना









अध्याय-१९ प्रकीर्ण



२५५. खेती तथा प्रबन्ध के मापदण्डों का विहित किया जाना

२५६. नक्शों तथा भूअभिलेखों का निरीक्षण तथा उनकी प्रतिलिपियाँ

२५७. राजस्व प्राधिकारियों की अनन्य अधिकारिता

२५७-ए, कतिपय कार्यवाहियों के सबूत का भारत तथा विधि व्यवसायियों का वर्जन

२५८. नियम बनाने की साधारण शक्ति

२५९. कतिपय भूधृतियों के प्रति निर्देश

२६०. ऐसी विधियों के प्रति निर्देश जो किसी भी क्षेत्र में प्रवृत्त न हो

२६१. निरसन तथा व्यावृति

२६२. अस्थायी उपबन्ध

२६३. कठिनाईयों का निराकरण करने की शक्ति

२६४. संहिता कतिपय मामलों में लागू नहीं होगी ।



(यह सामान्‍य जानकारी के लिए है, इसका किसी भी प्रकार का न्‍यायालयीन उद्धरण के रूप में प्रयोग वर्जित है)



Comments Dinesh on 21-12-2021

Chhatisgadh me Gram patel ki niyukti k niyam sharte mapdand yogyata kya kya h

Om prakash dhrue on 18-11-2021

कोटवार फैसला लेखन

Om prakash dhru on 18-11-2021

कोटवार फैसला लेखन की पीडीएफ भिजिये।

संजय on 02-08-2021

प्रकरण शीर्ष अ -12 क्या होता है

Thakur on 27-07-2021

Kitane sal tk paitrik bhumi alg rhane se paitrik bhumi me batwara adhikar nhi hota

विजय on 09-02-2021

मेरी मां के पूर्व पति के नाम से पिता का नाम उसके खाते मे नाम हो गया था जिसे मैने तहसील मे नाम कटाया लेकिन बयान पिता का नाम मां के पूर्व पति का हो गया जिसे संशोधित कराया हू किंतु अब मेरे वर्तमान मे मेरे सौतेले भाई लोग बंटवारा मे दिए सम्पत्ति को हड़पना चाहते है क्योकि वे लोग अब मुझे भाई नही मान रहे है अर्थात मेरा पिता मां के पूर्व पति को बोल रहे है। अबमै क्या करूं?


रीना बघेल on 20-12-2020

मैं एस.टी. वर्ग से हूं , क्या मैं अपनी जमीन अपने बच्चों के नाम पर नामांतरण कर सकती हूँ, मेरे बच्चे ओ.बी.सी.वर्ग में आते हैं?


Roshan Netam on 08-10-2020

chhattishgarh me kitne rajswa block hai

RAJAN PILLAI on 12-06-2020

Swayam ke bhu abhilekh me naam parivartan RAJPATRA PRAKASHAN ke aadhar par apne swayam ke purane naam ko vilopit kiya ja sakta hei????

सुरेन्द्र on 12-06-2020

भूमि बंटन नगर क्षेत्र में किस नियम के तहत किया जाता हैं।

Somu on 12-08-2019

Mere Dada ji ke expire ke bad puri Jamin mere papa ke name pr ho gya, or mere papa ke expire ke bad puri jamin uske bivi bachho ka na ho kr kisi dusre ke name pr h. registry ke bare me meri ami ko

kuch pta nhi h, tb meri age years old thi . un logo ka kahna h ki jameen unhi ke name pr registered h. Kya hme aapne papa

ka hk ab kbhi nhi mil sakta? Agar mil sakta h to kaise? PLZ answer me......


raman garg on 09-06-2019

patte ki bhumi ke karya /vikarya ke kya niyam hai ?


शिवाजी महन्त on 12-05-2019

1 क्या सार्वजनकि निस्तार तालाबों की खरीद बिक्री हो सकती है यदि हाँ तो किस आधार पर यदि नहीं तो कानून/अधिनियम क्या है
2 80-90 वर्षों से निस्तारित तालाब के डुबान के अंदर यदि किसी की पट्टे की जमीन आती है तो वो तालाब को पाटकर घर बनवा सकता है यदि हाँ तो किस आधार पर ,यदि नहीं तो कानून और अधिनियम क्या हैं कृपया विस्तार से बताएं।
3 तालाब के मेड या पार के कितने फिट छोड़कर निर्माण किया जा सकता है।
4 तालाब सह जलाशय संरक्षण से सम्बंधित कानून व अधिनियम की विस्तार से जानकारी प्रदान करने की कृपा करें। (उपरोक्त सम्बंधित कोई पुस्तिका हो तो उपलब्ध कराने की महान कृपा करें)


Ashok singh on 12-05-2019

ऊपरी राजस्व न्यायालय के फैसले को तहसील में कितने दिनों की समय अवधि तक लागू कराया जा सकते हैं यदि 30 वर्ष से अधिक तक फैसले को लागू नहीं कराया गया तो फिर आगे क्या हो सकता है


श्याम on 12-05-2019

भू-स्वामी के भूमि पर अधिकार नाती का है ?
क्या भू-स्वामी जमीन बेचता है तो उसका नाती रोक सकता ?
किस अधिकार से धारा सहित बताये


ramnarayan on 12-05-2019

bhumi jo ki swym arjit ki hai use apni mrji se beta ya beti me kisi ke nam par hissa kar skta hai

अशोक सिंह on 12-05-2019

तहसील ऑफिस में ऊपरी आदेश को कितने वर्षों तक लागू कराया जा सकता है यदि 30 वर्ष से अधिक हो जाए तो उन परिस्थितियों में ऊपरी न्यायालय का आदेश मान्य होगा या नहीं


Anil bhaskar on 08-10-2018

Is video ho to accha hoga


chandrika patel on 19-09-2018

Mere dadaji 1969 me expire kar gye the n Meri bua ki sadi 1963 ho chuki thi.us time mere pitaji ka age 10 ka tha .isliye samilana jameen me dadi n pitaji ka name darj hua 1993 me alag alag khata bhibhajan ho gya.jis karan khate me dadi n pitaji ka name darj hua.2003 me meri dadi expire ki.tab pitaji ka name aaya.2012-13 me pitaji ne mere n bahno k name kuch kuch jameen di.Ab 2018 me bua apna name pitaji k khate me darj karana chahti he.kya hoga iska .Bataiye pls




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