सूर्य मंदिर जयपुर राजस्थान

Surya Mandir Jaipur Rajasthan

GkExams on 06-06-2022


सूर्य मंदिर जयपुर के बारें में : यह मन्दिर भारत के राजस्थान राज्य की राजधानी जयपुर में अवस्थित है। आपकी बेहतर जानकारी के लिए बता दे की महाराज सवाई जय सिंह के दूत श्री राव कृपा रामजी के द्वारा यहाँ मंदिर बनवाया गया था।


Surya-Mandir-Jaipur-Rajasthan


और यहाँ मंदिर में सूर्य भगवान (surya mandir kahan hai) के साथ उनकी पत्नी रेणुका जी का विग्रह स्थापित है। इसके अलावा दूसरे विग्रह में सूर्य देव झूले पर विराजमान हैं।


ध्यान रहे की रविवार के दिन देश विदेश से लोग यहाँ मंदिर में सूर्यदेव (surya mandir in india) के दर्शन करने आते हैं। मंदिर से सम्पूर्ण जयपुर शहर दिखाई देता है, एक झलक में जयपुर को देखने का यह नजारा पर्यटकों को खूब भाता है। इसके अलावा यहां सूर्य सप्तमी पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। सूर्यदेव की आरती के बाद गलता घाटी से सप्त घोड़ों से सुसज्जित भगवान सूर्य की रथयात्रा निकाली जाती है।


वैसे सूर्य मंदिर न केवल आध्यात्मिक, धार्मिक एवं दर्शनीय स्थल है बल्कि राजधानी जयपुर का सूर्योदय और सूर्यास्त (surya mandir in hindi) बिंदु भी है। और वो इसलिए क्योंकि जयपुर की सूरज की पहली और आखिरी 90 अंश की किरण इसी मंदिर पर पड़ती है।


अगर आप भी यहाँ मन्दिर (surya mandir rajasthan) के दर्शन करना चाहते है तो आपको बता दे की प्रतिदिन आप सुबह 5 बजे से शाम 7:30 तक मन्दिर के दर्शन कर सकते है।


Sun Temple Jaipur Address :




Galta Gate, Lal Dungri, Jaipur, Rajasthan 302003


Sun Temple Jaipur Phone :




099829 84267


सूर्यदेव की आरती :




ऊँ जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान ।
जगत् के नेत्र स्वरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ।
धरत सब ही तव ध्यान,
ऊँ जय सूर्य भगवान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥


सारथी अरूण हैं प्रभु तुम,
श्वेत कमलधारी ।
तुम चार भुजाधारी ॥
अश्व हैं सात तुम्हारे,
कोटी किरण पसारे ।
तुम हो देव महान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥


ऊषाकाल में जब तुम,
उदयाचल आते ।
सब तब दर्शन पाते ॥
फैलाते उजियारा,
जागता तब जग सारा ।
करे सब तब गुणगान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥


संध्या में भुवनेश्वर,
अस्ताचल जाते ।
गोधन तब घर आते॥
गोधुली बेला में,
हर घर हर आंगन में ।
हो तव महिमा गान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥


देव दनुज नर नारी,
ऋषि मुनिवर भजते ।
आदित्य हृदय जपते ॥
स्त्रोत ये मंगलकारी,
इसकी है रचना न्यारी ।
दे नव जीवनदान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥


तुम हो त्रिकाल रचियता,
तुम जग के आधार ।
महिमा तब अपरम्पार ॥
प्राणों का सिंचन करके,
भक्तों को अपने देते ।
बल बृद्धि और ज्ञान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥


भूचर जल चर खेचर,
सब के हो प्राण तुम्हीं ।
सब जीवों के प्राण तुम्हीं ॥
वेद पुराण बखाने,
धर्म सभी तुम्हें माने ।
तुम ही सर्व शक्तिमान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥


पूजन करती दिशाएं,
पूजे दश दिक्पाल ।
तुम भुवनों के प्रतिपाल ॥
ऋतुएं तुम्हारी दासी,
तुम शाश्वत अविनाशी ।
शुभकारी अंशुमान ॥
॥ ऊँ जय सूर्य भगवान..॥


ऊँ जय सूर्य भगवान,
जय हो दिनकर भगवान ।
जगत के नेत्र रूवरूपा,
तुम हो त्रिगुण स्वरूपा ॥
धरत सब ही तव ध्यान,
ऊँ जय सूर्य भगवान ॥




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