हरियाणा के लोक नृत्य

Hariyana Ke Lok Nritya

GkExams on 07-02-2019

  1. धमाल नृत्य – मान्यताओं के आधार पर यह नृत्य महाभारत काल से चला आ रहा है। यह नृत्य पुरुषों में प्रचलित है। यह महेंद्रगढ़ व झज्जर में लोकप्रिय है। इसका आयोजन चांदनी रात में ‘ खुले मैदानों में ‘ होता है।
  2. मंजीरा नृत्य – यह मेवात में डफ , मंजीरा व नक्कारों के साथ होता है।
  3. लूर नृत्य – यह बाँगर क्षेत्र में होली के ,मौसम में किया जाता है।
  4. डमरू – यह नृत्य पुरुषों द्वारा किया जाता है।
  5. छठी नृत्य – शिशु के जन्म के छठे दिन स्त्रियों द्वारा रात्रि में यह नृत्य किया जाता है। इसमें उबले हुए चने या गेहूँ बांटे जाते है।
  6. छडी नृत्य – इसका आयोजन भादों मास की नवमी को गुगा – पीर की पूजा के बाद रात को पुरुषों द्वारा किया जात्ता है।
  7. तीज नृत्य – यह नृत्य तीज के त्यौहार पर किसी विशेष स्थान पर किया जाता है।
  8. फ़ाग नृत्य – यह नृत्य होली से दो सप्ताह पहले किया जाता है। यह नृत्य रात को स्त्रियो द्वारा भी किया जाता है। परंतु कही- कही यह नृत्य पुरुषों द्वारा भी किया जाता है। इस नृत्य की प्रमुख विशेषता यह है की पुरुष, स्त्रियो के नृत्य की प्रमुख विशेषता यह है की पुरुष , स्त्रियों के नृत्य को नही देख सकता।
  9. खोड़िया नृत्य – इसका आयोजन लड़के के विवाह के अवसर पर किया जाता है। बारात के जाने के बाद स्त्रियों द्वारा किया जाता है।
  10. रास नृत्य – इसका सबंध भगवान श्री कृष्ण की रासलीलाओं में लोकप्रिय है। यह होडल , पलवल , बलभगढ़ आदि में लोकप्रिय है। इस नृत्य के : 2 . मुख्यत प्रकार है : 1. ताण्डव : यह नृत्य पुरुष प्रधान है। 2. लास्य : यह स्त्री प्रधान नृत्य है।
  11. रसिया नृत्य – इस नृत्य का सबंध ब्रज की श्री कृष्ण लीलाओं से है। यह भी पलवल , होडल , बलभगढ़ आदि क्षेत्रों में किया जाता है। इस नृत्य में तीन नक़्क़रों , थाली ढोलक आदि यंत्रो का उपयोग किया जाता है।
  12. डफ नृत्य – यह नृत्य श्रृंगार व वीर रस प्रधान होते हुए ‘ ढोल नृत्य ‘ के नाम से भी जाना जाता है। इस नृत्य को वसंत ऋतु के आगमन पर किया जाता है। यह पहली बार 1969 में गणतंत्र दिवस में प्रस्तुत किया गया था।
  13. बीन-बाँसुरी नृत्य – यह नृत्य बांगर क्षेत्र में किया जाता है। इस नृत्य में घड़े पर रबड़ बाँधकर ताल व थापों के सहारे लोकगीत की धुन बनाई जाती है।
  14. घोड़ी नृत्य – यह नृत्य शादी में किया जाता है। इस नृत्य में गते – या रंगीन कागज से बनाया हुआ घोड़े का मुखौटा पहना जाता है।
  15. रतवाई नृत्य – यह मेवाती क्षेत्र में स्त्री- पुरुषों द्वारा सामुहिक रूप से किया जाता है।
  16. खेड़ा नृत्य – यह नृत्य ख़ुशी में नहीं बल्कि गम ( दुःख में किया जाता है। यह परिवार में बुर्जग क मृत्यु के समय किया जाता है. यह नृत्य लगभग खत्म होने की कगार पर है।
  17. गुगा नृत्य – यह नृत्य भादों माह में गुगा पीर के भक्तों द्वारा किया जाता है। हिसार जिले में ‘ गुगा मेडी ‘ के स्थान पर गुगा के विशाल ,मेले भरते है। जहाँ भक्त गुगा नत्य करते है। इसमें काफ़ी भक्त स्वयं को जंजीरों से पीटते है।
  18. सांग नृत्य -यह वीर रस प्रधान नृत्य सांग कलाकारों द्वारा मनोरंजन हेतु किया जाता है।
  19. गणगौर प्रजा नृत्य – यह नृत्य हिसार में बेहद प्रचलित है।




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