राजस्थान वन रिपोर्ट 2016 -2017

Rajasthan Van Report 2016 - 2017

Pradeep Chawla on 12-05-2019

राजस्थान में वन सम्पदा

- राजस्थान में सर्वप्रथम वनों के संरक्षण की योजना जोधपुर नरेश ने 1910 ई. में बनाई थी।

- राजस्थान की कुल वन सम्पदा का सर्वाधिक भाग उदयपुर जिले में तथा न्यूनतम भाग चुरू जिले में है।

- जिले के क्षेत्रफल की दृष्टि से बांसवाड़ा जिले का प्रथम स्थान हैं जबकि सबसे कम जैसलमेर जिले में हैं।

- राज्य ने अपनी वन नीति द्वितीय पंचवर्षीय योजना में घोषित की थी।

- राजस्थान में राज्य वन्य पशु एंवम पक्षी संरक्षण अधिनियम 1951लागू किया गया।

- वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम 1972 9 सितम्बर 1972 ई.को लागू किया गया।

- बाड़मेर का चौहटन क्षेत्र गोंद के लिए प्रसिद्ध हैं।

- फूलों से लदे पलास वृक्ष को फ्लेम ऑफ़ दी फोरेस्ट कहा जाता हैं।

- राज्य वृक्ष खेजड़ी को शमी वृक्ष,थार का कल्पवृक्ष एंवम जांटी भी कहा जाता हैं।

- तेंदू पत्ते को स्थानीय भाषा में टिमरू कहा जाता हैं।

- देश का प्रथम मरू वानस्पतिक उद्यान माचिया सफारी पार्क जोधपुर में स्थित हैं।

- भाद्रपद शुक्ला दशमी को जोधपुर के खेजड़ली गाँव में विश्व का एकमात्र वृक्षमेला भरता हैं।

- अमृता देवी पुरुस्कार की स्थापना 1994 ई.को हुई थी।

- पोकरण व जैसलमेर के मध्य लाठी सीरीज सेवण घास के लिए प्रसिद्ध हैं।

- बीकानेर,चुरू,जोधपुर आदि जिलों में घास के मैदान व चरागाहों को स्थानीय भाषा में बीड कहा जाता हैं।

- खैर वृक्ष के तने से हांड़ी प्रणाली के द्वारा कत्था तैयार किया जाता हैं।

- राजस्थान को वन प्रबंधन हेतु 13 वृतों में बाँटा गया हैं।

- शुष्क वन अनुसंधान केंद्र (AFRI) जोधपुर में स्थित हैं।

- वानिकी प्रशिक्षण संस्थान जयपुर,अलवर एंवम जोधपुर में स्थित हैं।

- मोपेन,इजरायली बबूल एंवम होहोबा विदेशी रेगिस्तानी पौधे हैं।

वृक्ष



उपयोग

खैर



कत्था बनाने हेतु

खिरनी



खिलौने बनाने हेतु

तेंदू



बीड़ी बनाने हेतु

कदम्ब



गोंद बनाने हेतु

आँवला



चमड़ा साफ़ करने हेतु

खस



शरबत व इत्र बनाने हेतु

महुआ



तेल व देशी शराब बनाने हेतु



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