चंद्रधर शर्मा गुलेरी द्वारा लिखित निबंध खेल भी शिक्षा ही है

चंद्रधर Sharma Guleri Dwara Likhit Nibandh Khel Bhi Shiksha Hee Hai

Gk Exams at  2018-03-25


Go To Quiz

Pradeep Chawla on 04-09-2018



‘खेलोगे कूदोगे होगे खराब’ की मान्यता वाले युग में गुलेरी जी खेल को शिक्षा का सशक्त माध्यम मानते थे। बाल-विवाह के विरोध और स्त्री-शिक्षा के समर्थन के साथ ही आज से सौ साल पहले उन्होंने बालक-बालिकाओं के स्वस्थ चारित्रिक विकास के लिए सहशिक्षा को आवश्यक माना था। ये सब आज हम शहरी जनों को इतिहास के रोचक प्रसंग लग सकते हैं किन्तु पूरे देश के सन्दर्भ में, यहाँ फैले अशिक्षा और अन्धविश्वास के माहौल में गुलेरी जी की बातें आज भी संगत और विचारणीय हैं। भारतवासियों की कमज़ोरियाँ का वे लगातार ज़िक्र करते रहते हैं-विशेषकर सामाजिक राजनीतिक सन्दर्भों में। हमारे अधःपतन का एक कारण आपसी फूट है-

‘‘यह महाद्वीप एक दूसरे को काटने को दौड़ती हुई बिल्लियों का पिटारा है’’ (डिनामिनेशन कॉलेज : 1904)


जाति-व्यवस्था भी हमारी बहुत बड़ी कमज़ोरी है। गुलेरी जी सबसे मन की संकीर्णता त्यागकर उस भव्य कर्मक्षेत्र में आने का आह्वान करते हैं जहाँ सामाजिक जाति भेद नहीं, मानसिक जाति भेद नहीं और जहाँ जाति भेद है तो कार्य व्यवस्था के हित (वर्ण विषयक कतिपय विचार : 1920)।


छुआछूत को वे सनातन धर्म के विरुद्ध मानते हैं। अर्थहीन कर्मकाण्डों और ज्योतिष से जुड़े अन्धविश्वासों का वे जगह-जगह ज़ोरदार खण्डन करते हैं। केवल शास्त्रमूलक धर्म को वे बाह्यधर्म मानते हैं और धर्म को कर्मकाण्ड से न जोड़कर इतिहास और समाजशास्त्र से जोड़ते हैं। धर्म का अर्थ उनके लिए


‘‘सार्वजनिक प्रीतिभाव है’’ ‘‘जो साम्प्रदायिक ईर्ष्या-द्वेष को बुरा मानता है’’ (श्री भारतवर्ष महामण्डल रहस्य : 1906)। उनके अनुसार उदारता सौहार्द और मानवतावाद ही धर्म के प्राणतत्त्व होते हैं और इस तथ्य की पहचान बेहद ज़रूरी है-‘‘आजकल वह उदार धर्म चाहिए जो हिन्दू, सिक्ख, जैन, पारसी, मुसलमान, कृस्तान सबको एक भाव से चलावै और इनमें बिरादरी का भाव पैदा करे, किन्तु संकीर्ण धर्मशिक्षा...(आदि) हमारी बीच की खाई को और भी चौड़ी बनाएँगे।’’ (डिनामिनेशनल कॉलेज : 1904)। धर्म को गुलेरी जी बराबर कर्मकाण्ड नहीं बल्कि आचार-विचार, लोक-कल्याण और जन-सेवा से जोड़ते रहे।



Comments Tanuja Sahu on 29-10-2019

चन्द्र धर शर्मा गुलेरी दवार लिखित निबंध खेल भी ही है को पुस्तकालय/इंटरनेट/शिक्षक की सहायता से ढढ
ढूंढ कर पढ़िए और सहपाठियों से इस पर चर्चा कीजिए|


Sangeeta das on 05-10-2019

Chandra Dhar Sharma guleri dvara likha hua Khel bhi Diksha hai ka hindi bhavarth

Sangeeta das on 05-10-2019

Chandra Dhar Sharma guleri dvara likha hua Khel bhi siksha hi hai ka hindi bhavarth

Sangeeta das on 05-10-2019

Chandra Dhar Sharma guleri dvara likha hua Khel bhi siksha hi hai ka mahatvpurn baten

Basantu chakrdhari on 13-08-2019

Khel bhi siksha hi hai

मीरा बाई रो मीरा बाई रजक जी on 25-11-2018

चन्द्र धर शर्मा गुलेरी दवार लिखित निबंध खेल भी ही है को पुस्तकालय/इंटरनेट/शिक्षक की सहायता से ढढ
ढूंढ कर पढ़िए और सहपाठियों से इस पर चर्चा कीजिए


मीरा बाई रो मीरा बाई रजक जी on 25-11-2018

चन्द्र धर शर्मा गुलेरी दवार लिखित निबंध खेल भी ही है को पुस्तकालय/इंटरनेट/शिक्षक की सहायता से ढढ
ढूंढ कर पढ़िए और सहपाठियों से इस पर चर्चा कीजिए


मीरा बाई रो मीरा बाई रजक जी on 25-11-2018

चन्द्र धर शर्मा गुलेरी दवार लिखित निबंध खेल भी ही है को पुस्तकालय/इंटरनेट/शिक्षक की सहायता से ढढ
ढूंढ कर पढ़िए और सहपाठियों से इस पर चर्चा कीजिए


मीरा बाई रो मीरा बाई रजक जी on 25-11-2018

चन्द्र धर शर्मा गुलेरी दवार लिखित निबंध खेल भी ही है को पुस्तकालय/इंटरनेट/शिक्षक की सहायता से ढढ
ढूंढ कर पढ़िए और सहपाठियों से इस पर चर्चा कीजिए


Mithlesh on 21-08-2018

खेल भी शिक्षा ही है



Labels: , ,
अपना सवाल पूछेंं या जवाब दें।

Comment As:

अपना जवाब या सवाल नीचे दिये गए बॉक्स में लिखें।

Register to Comment