आहड़ सभ्यता इन हिंदी

Aahad Sabhyata In Hindi

Pradeep Chawla on 16-10-2018


  • आहड़, उदयपुर में आहड़ नदी के किनारे स्थित हैं।
  • आहड़ सभ्यता का समय है-2000 ईसा पूर्व से 1200 ईसा पूर्व।
  • आहड़ सभ्यता के अन्य नाम है-आघाटपुर,ताम्रवती,धूलकोट और बनास संस्कृति।
  • इस स्थल की खोज 1953 में अक्षयकीर्ति व्यास ने की थी।
  • इस स्थल का उत्खनन कार्य रत्नचन्द्र अग्रवाल ने 1956 में किया।
  • आहड़ सभ्यता के मूल उत्खननकर्ता एच. डी. सांखलिया थे।
  • आहड़ सभ्यता को 'ताम्रपाषण कालीन सभ्यता भी कहते हैं,क्योकि यहां से ताँबे और पाषाण के उपकरण भी मिले हैं।
  • आहड़ सभ्यता मूलतः एक ग्रामीण संस्कृति थी।
  • यहाँ के निवासियों का मुख्य व्यवसाय था-कृषि और पशुपालन।
  • इस सभ्यता के लोग ताँबे के उपकरण भी बनाते थे।
  • यहाँ से एक मकान में 4-6 चूल्हे के प्रमाण मिले हैं,जिससे यह प्रतीत होता है कि आहड़ में संयुक्त परिवार प्रथा प्रचलित थी।
  • यहाँ से अनाज के रूप में गेंहूँ,ज्वार और चावल के प्रमाण मिले हैं।
  • यहाँ से मिट्टी के पके हुए कोठे (अनाज संग्रह पात्र ) भी मिले हैं।
  • आहड़ सभ्यता से प्राप्त बर्तनो का रंग लाल और काला होने के कारण इसे 'लाल और काले मृदभाण्ड वाली सभ्यता' भी कहते हैं।
  • यहाँ से बैल की मिट्टी की मूर्ति मिली है,जिसे बनासियन बुल भी कहते हैं।
  • आहड़ से यूनानी मुद्रायें मिली है,जो प्रथम से तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व की मानी जाती हैं।
  • आहड़ सभ्यता से प्राप्त कुछ प्रमुख साक्ष्य निम्न हैं- 1. नारी की मिट्टी की मूर्ति। 2. चूड़ियाँ। 3.छल्ले। 4. सलाइयां। 5.ताँबे के दीपक के अवशेष। 6. ताँबे की कुल्हाड़ी।
  • आहड़ सभ्यता से संबंधित कुछ प्रमुख स्थल निम्नलिखित हैं- 1. बालाथल- वल्लभनगर (उदयपुर ) 2.गिलूण्ड- राजसमन्द। 3.ओझियाणा- भीलवाड़ा।


Pradeep Chawla on 16-10-2018


  • आहड़, उदयपुर में आहड़ नदी के किनारे स्थित हैं।
  • आहड़ सभ्यता का समय है-2000 ईसा पूर्व से 1200 ईसा पूर्व।
  • आहड़ सभ्यता के अन्य नाम है-आघाटपुर,ताम्रवती,धूलकोट और बनास संस्कृति।
  • इस स्थल की खोज 1953 में अक्षयकीर्ति व्यास ने की थी।
  • इस स्थल का उत्खनन कार्य रत्नचन्द्र अग्रवाल ने 1956 में किया।
  • आहड़ सभ्यता के मूल उत्खननकर्ता एच. डी. सांखलिया थे।
  • आहड़ सभ्यता को 'ताम्रपाषण कालीन सभ्यता भी कहते हैं,क्योकि यहां से ताँबे और पाषाण के उपकरण भी मिले हैं।
  • आहड़ सभ्यता मूलतः एक ग्रामीण संस्कृति थी।
  • यहाँ के निवासियों का मुख्य व्यवसाय था-कृषि और पशुपालन।
  • इस सभ्यता के लोग ताँबे के उपकरण भी बनाते थे।
  • यहाँ से एक मकान में 4-6 चूल्हे के प्रमाण मिले हैं,जिससे यह प्रतीत होता है कि आहड़ में संयुक्त परिवार प्रथा प्रचलित थी।
  • यहाँ से अनाज के रूप में गेंहूँ,ज्वार और चावल के प्रमाण मिले हैं।
  • यहाँ से मिट्टी के पके हुए कोठे (अनाज संग्रह पात्र ) भी मिले हैं।
  • आहड़ सभ्यता से प्राप्त बर्तनो का रंग लाल और काला होने के कारण इसे 'लाल और काले मृदभाण्ड वाली सभ्यता' भी कहते हैं।
  • यहाँ से बैल की मिट्टी की मूर्ति मिली है,जिसे बनासियन बुल भी कहते हैं।
  • आहड़ से यूनानी मुद्रायें मिली है,जो प्रथम से तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व की मानी जाती हैं।
  • आहड़ सभ्यता से प्राप्त कुछ प्रमुख साक्ष्य निम्न हैं- 1. नारी की मिट्टी की मूर्ति। 2. चूड़ियाँ। 3.छल्ले। 4. सलाइयां। 5.ताँबे के दीपक के अवशेष। 6. ताँबे की कुल्हाड़ी।
  • आहड़ सभ्यता से संबंधित कुछ प्रमुख स्थल निम्नलिखित हैं- 1. बालाथल- वल्लभनगर (उदयपुर ) 2.गिलूण्ड- राजसमन्द। 3.ओझियाणा- भीलवाड़ा।



Comments Nikita on 08-03-2021

Kali bangan ke Question



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