खेल से संबंधित कविता

Khel Se Sambandhit Kavita

GkExams on 12-05-2019

कविता



एक सड़क पर मक्खी-मच्छर

बैठ गए शतरंज खेलने,

थे सतर्क बिल्कुल चौकन्ने

एक-दूजे के वार झेलने।



मक्खी ने जब चला सिपाही

मच्छर ने घोड़ा दौड़ाया,मक्खी ने चलकर वजीर को

मच्छर का हाथी लुढ़काया।



मच्छर ने गुस्से के मारे

ऊंट चलाकर हमला बोला,

मक्खी ने मारा वजीर से

ऊंट हो गया बम बम भोला।



ऊंट मरा जैसे मच्छर का

वह गुस्से से लाल हो गयामक्खी बोली यह मच्छर तो

अब जी का जंजाल हो गया



मच्छर ने तलवार उठाकर

मक्खीजी पर वार कर दिया

मक्खी ने मच्छर का सीना

चाकू लेकर पार कर दिया



मच्छर और मक्खी दोनों का

पल में काम तमाम हो गया,देख तमाशा रुके मुसाफिर

सारा रास्ता जाम हो गया।



खेलो खेल भावना से ही

खेल हमेशा भाई,

खेल-खेल में लड़ जाने से

होती नहीं भलाई।



Comments प्रभुदयाल on 03-01-2021

ऊपर जो कविता दी है उसमें लेखक का नाम क्यों नहीं दिया?
कविता का व्यवसायिक उपयोग कर रहे हैं क्या?
प्रभुदयाल श्रीवास्तव
इस कविता के लेखक




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