बौद्ध धर्म के संरक्षक के रूप में कनिष्क

Bauddh Dharm Ke Sanrakshak Ke Roop Me Kanishk

GkExams on 22-11-2018

बौद्ध साहित्य

कनिष्क निश्चय ही एक महान् योद्धा था जिसने पार्थिया से मगध तक अपना राज्य फैलाया, किन्तु उसका यश उसके बौद्ध धर्म के संरक्षक होने के कारण कहीं अधिक है। उसका निजी बौद्ध धर्म था। उसके प्रचार और संगठन के लिए उसने बहुत से कार्य किए। उसने पार्श्व के कहने से कश्मीर अथवा जलंधर में बौद्ध की चौथी महासंगीति (महासभा) का आयोजन किया जिसमें बहुत से विद्वानों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य उन सिद्धांतों पर विचार करना था जिनके विषय में बौद्ध विद्वानों में मतभेद था। इस सभा में विद्वानों ने समस्त बौद्ध साहित्य पर टीकाएँ लिखवाईं। इस सभा का प्रधान वसुमित्र था और अश्वघोष ने इसमें भाग लिया था। कनिष्क यद्यपि स्वयं बौद्ध धर्मावलंबी था किन्तु वह अन्य धर्मों के प्रति सहिष्णु था। यह बात उसके सिक्कों से स्पष्ट है। उन पर कई पार्थियन, यूनानी तथा भारतीय देवी देवताओं की आकृतियाँ हैं। कुछ सिक्कों पर यूनानी ढंग से खड़े और कुछ पर भारतीय ढंग से बैठे बुद्ध की आकृतियाँ हैं। सम्भवतः ये सिक्के इस बात को प्रकट करते हैं कि उसके राज्य में इन सब धर्मों के रहने वाले थे और सम्राट इन सब धर्मों के प्रति सहिष्णु था। मथुरा में एक मूर्ति मिली है जिसमें कनिष्क को सैनिक पोशाक पहने खड़ा दिखाया गया है।कनिष्क के सिक्के दो प्रकार के हैं -

  1. एक प्रकार के सिक्कों में यूनानी भाषा में उसका नाम आदि अंकित है।
  2. दूसरे में ईरानी भाषा में।

उसके ताँबे के सिक्कों में उसे एक वेदी पर बलिदान करते दिखाया गया है। उसके सोने के सिक्के रोम के सम्राटों के सिक्कों से मिलते जुलते हैं। जिनमें एक ओर उसकी अपनी आकृति है और दूसरी ओर किसी देवी या देवता की। पेशावर के निकट कनिष्क ने एक बड़ा स्तूप और मठ बनवाया, जिसमें बुद्ध के अवशेष रखे गए। एक अभिलेख से ज्ञात होता है कि इस स्तूप का निर्माण एक यूनानी इंजीनियर ने कराया था।

समकालीन विद्वान

कनिष्क के संरक्षण में न केवल बौद्ध धर्म की उन्नति हुई, अपितु अनेक प्रसिद्ध विद्वानों ने भी उसके राजदरबार में आश्रय ग्रहण किया। वसुमित्र, पार्श्व और अश्वघोष के अतिरिक्त प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान् नागार्जुन भी उसका समकालीन था। नागार्जुन बौद्ध धर्म का प्रसिद्ध दार्शनिक हुआ है, और महायान सम्प्रदाय का प्रवर्तक उसी को माना जाता है। उसे भी कनिष्क का संरक्षण प्राप्त था। आयुर्वेद का प्रसिद्ध आचार्य चरक भी उसके आश्रय में पुष्पपुर में निवास करता था।





Comments Neha on 12-05-2019

Bauddha dharam ka sanrakshak kaun h



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