बालिका दिवस पर कविता

Balika Diwas Par Kavita

Pradeep Chawla on 10-10-2018

बालिका परिवार के आँगन का वो नन्हा सा फूल है, जो उलाहना के थपेड़ों से बिखरता है, त्याग की रासायनिक खाद से फलता-फूलता है फिर भी दुख रूपी पतझड़ में अपने बूते पर खड़ा रहता है। बालिका, जिसके जन्म से ही उसके जीवन के जंग की शुरुआत हो जाती है।



Comments Karina gende on 11-10-2020

Mebhi ak writer ho pr muzhe aapni kavita google kaise dalu

Mayuri nagar on 11-10-2019

Balika divas kvita

arjunkumar on 10-10-2019

balika par good kavita



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