अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर निबंध

Antarrashtriya Balika Diwas Par Nibandh

Gk Exams at  2018-03-25


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Pradeep Chawla on 21-10-2018

अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस 2018: अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 11 अक्टूबर को मनाया जाता है | इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों को इस बात के लिए जागरूक करना है की लड़कियों को भी समाज में उतनी ही अधिकार और इज़्ज़त देनी चाहिए जितनी लड़को को मिलती है | लकियों का भी पूरा अधिकार बनता है की वह समाज में अपनी बात को रख सकें और उन पर हो रहे किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें | यह दिन उन लोगों को भी जागरूक करने के लिए है जो की लड़कियों को सामाजिक सीमाओं में बाँध कर रखते हैं | ये निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

International day of the girl child essay in Hindi

International day of the girl child 2018 theme: इस बार की इंटरनेशनल डे ऑफ़ गर्ल चाइल्ड 2018 थीम है “With Her: A Skilled Girl Force” यानी की “उसके साथ: एक कुशल लड़की का बल “| यह दिन गुरुवार को मनाया जाएगा|

अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के लिये राष्ट्रीय कार्य दिवस के रुप में हर वर्ष 11 अक्टूबर को राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। देश में लड़कियों के लिये ज्यादा समर्थन और नये मौके देने के लिये इस उत्सव की शुरुआत की गयी। समाज में बालिका शिशु के द्वारा सभी असमानताओं का सामना करने के बारे में लोगों के बीच जागरुकता को बढ़ाने के लिये इसे मनाया जाता है। बालिका शिशु के साथ भेद-भाव एक बड़ी समस्या है जो कई क्षेत्रों में फैला है जैसे शिक्षा में असमानता, पोषण, कानूनी अधिकार, चिकित्सीय देख-रेख, सुरक्षा, सम्मान, बाल विवाह आदि।


लड़कियों की उन्नति के महत्व के बारे में पूरे देश के लोगों के बीच ये मिशन जागरुकता को बढ़ाता है। यह दूसरे सामुदायिक सदस्यों और माता-पिता के प्रभावकारी समर्थन के द्वारा निर्णय लेने की प्रक्रिया में लड़कियों के सार्थक योगदान को बढ़ाता हे।


Essay on International Day of the Girl Child in Hindi


अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस क्यों मनाया जाता है


समाजिक लोगों के बीच उनके जीवन को बेहतर बनाने के लिये और समाज में लड़कियों की स्थिति को बढ़ावा देने के लिये इसे मनाया जाता है। ये बहुत जरुरी है कि विभिन्न प्रकार के समाजिक भेदभाव और शोषण को समाज से पूरी तरह से हटाया जाये जिसका हर रोज लड़कियाँ अपने जीवन में सामना करती हैं। समाज में लड़कियों के अधिकारों की जरुरत के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिये एक समान शिक्षा और मौलिक आजादी के बारे में विभिन्न राजनीतिक और समुदायिक नेता जनता में भाषण देते हैं।


लड़कियों के लिये ये बहुत जरुरी है कि वो सशक्त, सुरक्षित और बेहतर माहौल प्राप्त करें। उन्हें जीवन की हर सच्चाई और कानूनी अधिकारों से अवगत होना चाहिये। उन्हें इसकी जानकारी होनी चाहिये कि उनके पास अच्छी शिक्षा, पोषण, और स्वास्थ्य देख-भाल का अधिकार है। जीवन में अपने उचित अधिकार और सभी चुनौतियों का सामना करने के लिये उन्हें बहुत अच्छे से कानून सहित घरेलु हिंसा की धारा 2009, बाल-विवाह रोकथाम एक्ट 2009, दहेज रेकथाम एक्ट 2006 आदि से अवगत होना चाहिये।


हमारे देश में, महिला साक्षरता दर अभी भी 53.87% है और युवा लड़कियों का एक-तिहाई कुपोषित हैं। स्वास्थ्य सेवा तक सीमित पहुँच और समाज में लैंगिक असमानता के कारण विभिन्न दूसरी बीमारियों और रक्त की कमी से प्रजननीय उम्र समूह की महिलाएँ पीड़ित हैं। विभिन्न प्रकार की योजनाओं के द्वारा बालिका शिशु की स्थिति को सुधारने के लिये महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के द्वारा राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर बहुत सारे कदम उठाये गये हैं।


महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने “धनलक्षमी” नाम से एक योजना की शुरुआत की है जिसके तहत बालिका शिशु के परिवार को नकद हस्तांतरण के द्वारा मूलभूत जरुरतों जैसे असंक्रमीकरण, जन्म पंजीकरण, स्कूल में नामांकन और कक्षा 8 तक के रखरखाव को पूरा किया जाता है। शिक्षा का अधिकार कानून ने बालिका शिशु के लिये मुफ्त और जरुरी शिक्षा उपलब्ध कराया गया है।





Comments Muskan khatri on 13-11-2019

Nibndh balika divsh

Muskan khatri on 13-11-2019

Nibndh balika divsh

Soniya on 11-10-2019

Antarrashtiya balika diwas par nibandh hindi me dikhaeye



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