मैथिलीशरण गुप्त की कविता जय भारत

Maithilisharan Gupt Ki Kavita Jay Bharat

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 22-11-2018

जय भारत

‘‘जीवन-यशस्-सम्मान-धन-सन्तान सुख मर्म के;
मुझको परन्तु शतांश भी लगते नहीं निज धर्म के !

युधिष्ठिर

श्रीगणेशाय नमः
जय भारत

मनुज-मानस में तरंगित बहु विचारस्रोत,
एक आश्रय, राम के पुण्याचरण का पोत।

नमो नारायण, नमो नर-प्रवर पौरुष-केतु,
नमो भारति देवि, वन्दे व्यास, जय के हेतु !



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