बाल विवाह निषेध अधिनियम 1929

Bal Vivah Nishedh Adhiniyam 1929

Gk Exams at  2018-03-25

Pradeep Chawla on 19-10-2018

बाल विवाह को रोकने एवं बाल विवाह को करने वाले लोगों को दंडित करने के लिए

समय समय पर कानून बने है. वर्तमान में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006

प्रभाव में है. जिससे बाल विवाह को रोकने और बाल विवाह करने व कराने वालों

को कठोर दंड दंडित करने के प्रावधान है. इस कानून के मुख्य प्रावधान निम्न

है.



18 साल से अधिक उम्र का लड़का अगर 18 साल से कम उम्र की

लड़की से शादी करता है तो उसे 2 साल तक की कड़ी कैद या एक लाख रूपये तक का

जुर्माना या फिर दोनों सजाएं हो सकती है.

शादी करने वाले जोड़ो में

से जो भी बाल हो, शादी कोर्ट रद्द घोषित करवा सकता है. शादी के बाद कभी भी

कोर्ट में अर्जी दी जा सकती है, पर बालिग़ हो जाने के दो साल बाद नही.



जो भी बाल विवाह सम्पन्न करे या करवाएं जैसे- पंडित, मौलवी, माता-पिता,

रिश्तेदार, दोस्त इत्यादि, उन्हें दो साल तक की कड़ी सजा या एक लाख का

जुर्माना या दोनों हो सकते है.

जिस व्यक्ति की देखरेख में बच्चा है

यदि वह बाल विवाह करवाता है, चाहे वह माता-पिता, अभिभावक या कोई और हो उसे

दो साल तक की कड़ी सजा या एक लाख रूपये तक का जुर्माना अथवा दोनों भी हो

सकते है.

जो व्यक्ति किसी तरह बाल विवाह को बढ़ावा देता है, या

जानबूझकर लापरवाही से उसे रोकता नही , जो बाल विवाह में शामिल हो या बाल

विवाह की रस्मों में उपस्थित हो, उसे दो साल तक की कड़ी सजा या एक लाख रूपये

का जुर्माना अथवा दोनों हो सकते है.

इस कानून में किसी महिला को जेल की सजा नही दी जा सकती, उसे जुर्माना हो सकता है.



किसी नाबालिक की शादी उसका अपहरण करके, बहला-फुसलाकर या जोर जबरदस्ती से

कही ले जाकर या शादी के लिए शादी की रस्म के बहाने बेचकर या अनैतिक काम के

लिए की जाए तो ऐसी शादी भी शून्य मानी



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