रेडियो आवृत्ति संचार

Radio Avriti Sanchar

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 12-02-2019


3 किलोहर्ट्ज से 300 गीगा हर्ट्ज़ की आवृत्ति वाली तरंगों को रेडियो आवृत्ति (RF) कहते हैं। रेडियो तरंगें, रेडियो आवृत्ति की तरंगे ही होतीं हैं। रेडियो आवृत्ति के कम्पन - यांत्रिक कम्पन और वैद्युत कम्पन दोनों हो सकते हैं किन्तु प्रायः रेडियो आवृत्ति से आशय विद्युत कम्पन से ही होता है न कि यांत्रिक कम्पन से।

रेडियो आवृत्ति पर कम्पन करने वाली विद्युत धारा के कुछ विशेष गुण होते हैं जो दिष्ट धारा या कम आवृत्ति की प्रत्यावर्ती धारा में नहीं पायी जाती।

  • (1) किसी चालक में मौजूद आर एफ धारा में निहित ऊर्जा उस चालक से विद्युतचुम्बकीय तरंग के रूप में विकिरित होकर अंतरिक्ष (स्पेस) जा सकती है। यही गुण रेडियो प्रौद्योगिकी का मूल आधार है।
  • (2) रेडियो आवृत्ति की धारा विद्युत चालकों में गहराई तक नहीं घुस पाती बल्कि उन चालकों के बाहरी सतह (स्किन/चर्म) तक ही सीमित रहते हुए प्रवाहित होती है। इस परिघटना को उपरिस्तर प्रभाव या 'स्किन इफेक्ट' (skin effect) कहते हैं।
  • (3) आर एफ धाराएँ आसानी से वायु का आयनीकरण कर सकतीं हैं और इस प्रकार वायु से होकर एक सुचालक मार्ग बना सकतीं हैं। आर एफ के इसी गुण का उपयोग उच्च आवृत्ति वाली विद्युत आर्क वेल्डिंग उपकरणों में किया जाता है। इनमें प्रयुक्त धारा की आवृत्ति 50/60 हर्ट्ज की तुलना में बहुत अधिक होता है।



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