इतिहास लेखन की परंपरा

Itihas Lekhan Ki Parampara

Gk Exams at  2018-03-25


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Pradeep Chawla on 14-09-2018


हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की एक सुदीर्घ परम्परा है। विद्वानों की सहमति है कि इस परम्परा का ‘टर्निंग पाॅइंट’ आचार्य शुक्ल का साहित्येतिहास लेखन में आना है। इतिहास लेखन की परंपरा को 2 रूपों में बांटा गया है- अनौपचारिक तथा औपचारिक। अनौपचारिक लेखन की शुरूआत 19वीं शताब्दी में हुई जिसमें भक्तमाल, कविमाला, कालिदास हजारा, आदि ग्रंथ शामिल हैं। औपचारिक इतिहास लेखन 1839 ई. में शुरू हुआ। आचार्य द्विवेदी के बाद कई विद्वानों ने साहित्येतिहास लेखन में गंभीर प्रयास किया है।



Comments rada g.k on 23-10-2018

streevadhi ithihas lekhan mhanje kay



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