Rani Padmini Chittaud champavati रानी पद्मिनी चित्तौड़ champavati

रानी पद्मिनी चित्तौड़ champavati



GkExams on 18-03-2023


रानी पद्मिनी चित्तौड़ champavati : पद्मावती या पद्मिनी चित्तौड़ के राजा रत्नसिंह (रतनसेन) [1302-1303 ई0] की रानी थी। पद्मावती के माता का नाम चंपावती और पिता का नाम गंधर्वसेन था। पद्मावती बचपन से ही बहुत सुन्दर थी और विवाह योग्य होने पर पदमिनी के पिता ने स्वय-वर का आयोजन किया।


Rani-Padmini-Chittaud-champavati


इस स्व्य-वर में एक छोटे से प्रदेश के राजा मलखान सिंह और मेवाड़ शासक रतन सिंह का मुकाबला हुआ इसमे रतन सिंह ने मलखान को पराजित कर रानी पद्मावती से विवाह कर राजधानी चित्तौड़ ले आये।


रानी पद्मिनी अपनी सुन्दरता के लिए विख्यात थी. अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ आक्रमण का एक कारण पद्मिनी को प्राप्त करना भी था। 1303 ई में चित्तौड़ किले का पतन होने के बाद पद्मिनी ने 1600 स्त्रियों के साथ जौहर कर लिया। जानकारी रहे की यह जौहर चित्तौड़ के "प्रथम साके" के नाम से प्रसिद्ध हैं।


रावल रतन सिंह हिस्ट्री इन हिंदी (Ratnasimha History In Hindi) :




इनका जन्म जन्म 13वी सदी के अंत में हुआ था। इनका वास्तविक नाम रतन सेन था, इसकी जानकारी 16 वीं शताब्दी के सूफी-कवि मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा लिखित “पद्मावत” नामक एक महाकाव्य में दी गई है। इनको राजपूताना बहादुरी के लिए आज भी जाना जाता है।


रतनसिंह गुहिल वंश के वंशज थे और इस वंश की शाखा रावल से सम्बंधित थे। इन्होने चित्रकूट के किले पर जो की वर्तमान समय में चित्तौड़गढ़ है, वहां पर अपना शासन किया था। रानी पद्मिनी की सुन्दरता के बारे में सुनकर दिल्ली का तत्कालीन बादशाह अलाउद्दीन ख़िलज़ी पद्मिनी को पाने के लिए लालायित हो उठा और उसने रानी को पाने हेतु चित्तौड़ दुर्ग पर एक विशाल सेना के साथ चढ़ाई कर दी थी।


इस युद्द का विवरण अमीर खुसरो द्वारा लिखित ग्रंथ “तारीखें अलाई” में मिलता है। जिसके अनुसार अलाउद्दीन खिलजी चित्तौड़ फतेह के लिए 28 जनवरी 1303 ईस्वी को दिल्ली से निकला था, और लगभग 7 महीने पश्चात अर्थात 26 अगस्त 1303 ईस्वी को किला फतह किया।


पहली बार जब अलाउद्दीन खिलजी चित्तौड़ आया तो उसे युद्ध में सफलता नहीं मिली और पुनः दिल्ली लौटना पड़ा। जबकि दूसरी बार पूरी सेना के साथ वह चित्तौड़ आया और रावल रतन सिंह को युद्ध में पराजित किया।


मृत्यु :




खिलजी अपनी विशाल सेना के साथ चित्तौड़गढ़ पहुंचा, जहां पर रावल रतन सिंह (ratnasimha death) और अलाउद्दीन खिलजी के बीच एक भयंकर युद्ध हुआ। इस युद्ध में रावल रतन सिंह की मृत्यु हो गई। इसके बाद रानी पद्मावती ने 16000 रानियों के साथ जोहर कर लिया।




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Comments Ankita soni on 15-12-2021

Rani padmavati ke bhai ka name kya the

Ankita soni on 15-12-2021

Rani padmavati ne joher kab or kya kiya

Ankita soni Ankita soni on 15-12-2021

Rani padmavati kha ki rajkumari thi






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