संघ और परिसंघ में अंतर

Sangh Aur Parishangh Me Antar

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GkExams on 12-05-2019

परिसंघ ऐसी राजनैतिक व्यवस्था को कहा जाता है जिसमें दो या उस से अधिक लगभग पूर्णतः स्वतन्त्र राष्ट्र समझौता कर लें के बाक़ी विश्व के साथ वे एक ही राष्ट्र की तरह सम्बन्ध रखेंगे। संघों की तुलना में परिसंघों के सदस्यों को अधिक स्वतंत्रता होती है। परिसंघों में कभी-कभी केवल नाम मात्र की केन्द्रीय सरकार होती है जिसके पास कोई असली शक्तियां नहीं होती।


संघों और परिसंघों में अंतर
अलग-अलग विशेषज्ञ संघों और परिसंघों की अलग-अलग परिभाषाएँ देते हैं, लेकिन यह कहा जा सकता है कि इन दोनों में अक्सर कुछ अंतर दिखते हैं -

परिसंघों के सदस्यों को परिसंघ छोड़ने की खुली स्वतंत्रता होती है, जबकि संघों के सदस्यों को अक्सर यह छूट नहीं होती
परिसंघों की केन्द्रीय सरकार के कोई भी फ़ैसले को कोई भी सदस्य मानने से इनकार कर सकता है, जबकि संघ की केन्द्रीय सरकार के फ़ैसले अक्सर संघ-सदस्यों पर लाज़िम होते हैं
परिसंघों के संविधानों में बदलाव के लिए हर संघ-सदस्य की पूरी अनुमति चाहिए होती है और उनमें से कोई भी इसे रोक सकता है, जबकि संघों के राज्यों में अक्सर बहुमत से भी बदलाव लाये जा सकते हैं
परिसंघों के उदहारण

१८४७ में कैथोलिक क्षेत्रों (हरा रंग) के अधिक स्वतंत्रता जतलाने पर स्विस गृहयुद्ध छिड़ गया, जिसके बाद स्विट्ज़रलैण्ड संघ बन गया और केवल नाम-मात्र का परिसंघ रह गया
विश्व में ऐसे परिसंघ बहुत कम हैं जो बहुत अरसे के लिए परिसंघ के रूप में ही रहें। अक्सर इनमें परिवर्तन हो जाता है क्योंकि समय-समय पर इनके सदस्यों में कोई न कोई मतभेद उभर ही आते हैं। इस सूरत में या तो ये टूट जाते हैं, या इनका केंद्र ज़्यादा शक्तिशाली बनकर इन्हें वास्तव में संघ बना देता है, चाहे औपचारिक रूप से वे अपने आप को भले ही परिसंघ कहते रहें।



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