भाट समाज की उत्पत्ति

Bhaat Samaj Ki Utpatti

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 12-05-2019

भाट : एक विमुक्त जाति -

भाट (संस्कृत भट्ट से व्युत्पन्न शब्द) भी काव्यरचना से संबंधित हैं लेकिन इनके विषय में निश्चयपूर्वक कुछ नहीं कहा जा सकता। भाट शब्द भी भाट जाति का अवबोधक है। राजस्थान में चारणों की भाँति भाटों की जातियाँ है। उत्तर प्रदेश में भी इनकी श्रेणियाँ हैं, लेकिन थोड़े बहुत ये समस्त उत्तर भारत में पाए जाते हैं। दक्षिण में अधिक से अधिक हैदराबाद तक इनकी स्थिति है। इनके वंश का मूलोद्गम क्या रहा होगा, यह कहना कठिन है। जनश्रुतियों में भाटों के संबंध में कई प्रचलित बातें कही जाती हैं। इनकी उत्पत्ति क्षत्रिय पिता और विधवा ब्राह्मणी माता से हुई बताई जाती है। नेस्फील्ड के अनुसार ये पतित ब्राह्मण थे, बहुधा राजदरबारों में रहते, रणभूमि के वीरों की शौर्यगाथा जनता को सुनाते और उनका वंशानुचरित बखानते थे। किंतु रिजले का इससे विरोध है। पर इन बातों द्वारा सही निर्णय पर पहुँचना कठिन है। वस्तुत: यह एक याचकवर्ग है जो दान लेता था।



चारणों के भी भाट होते हैं। रामासरी तहसील साजत में चारणों के भाट चतुर्भुज जी थे। हरिदान अब भी चारणों के भाट हैं। भाटों के संबंध में एक कथा प्रचलित है। जोधपुर के महाराज मानसिंह महाराज अहमदनगर (ईडर) से तख्तसिंह को गोद लाए। तख्तसिंह के साथ एक भाट आया जिसका नाम बाघाजी भाट था। यहाँ लाकर चारणों को नीचा दिखाने के लिये उसे कविवर की पदवी दी। दो गावँ भी दिए। परंतु बाघा को कविता के नाम पर कुछ भी नहीं आता था। आजकल उसी बाघा के लिये राजस्थान में यह छप्पय बड़ा प्रचलित है :



जिण बाघे घर जलमगीत छावलियाँ गाया।

जिण बाघे घर जलम थरों घर चंग घुराया॥

जिण बाघे घर जलम लदी बालम लूणाँ री।

जिण बाघे घर जलम गुँथी तापड़ गूणां री॥

बेला केइ बणबास देओ सारा ही हूनर साझिया।

गत राम तणी देखो गजब बाघा कविवर बाजिया॥

इस तरह इस छप्पय में बालदिया चंग बजानेवाले, छावलियाँ गानेवाले, तापड़ों की गूण गूँथनेवाले, बिणजोर, बासदेव के स्वाँग लानेवाले, काबडिया, तथा कूगरिया (मुसलमान), आदि अनेक भाट पेशों के अनुकूल भाट बने हुए हैं। डिंगल साहित्य में चारणों की भाँति कोई भी गीत या छंद भाटों द्वारा लिखा हुआ नहीं मिलता, ऐसी स्थिति में भाटों का नाम चारणों के साथ कैसे लिया जाने लगा, यह समझ में नहीं आता। निश्चित रूप से यह चारण जाति को उपेक्षित करने लिये किसी चारणविरोधी का कार्य रहा होगा। अन्यथा वंशावलियाँ पढ़कर भरमान पोषण करनेवाले प्रत्येक पेशा और व्यापार करनेवाले सैकड़ों प्रकार की जातियों के विविध भाटों की क्या चारणों से समता हो सकती हैं ? चारण स्वाभिमानी और सत्यनिष्ठता की प्रतीक जाति रही हैं। भाट समाज का अपना अलग गुणधर्म हैं। चारण लोग अपने साथ भाट शब्द को जोड़ना कतई पसंद नहीं करते।



Comments DHARMANDAR DAAS JAGA MAHWA on 19-01-2020

JAGA JATE KA ETEYAS BTAO

Om banjara on 11-12-2019

सर जी यह भाट जाति के बाल दिया भाट कैसे क्या लाए क्या इसको बंजारा कहना उचित है मेरे को इसकी जानकारी देवें ओम प्रकाश बंजारा भाट9928269292


लक्ष्मीनारायण राव भट/राव भाट on 20-08-2019

आपने जो लिखा है संस्कृत के शब्द भट्ट का अपभृंश भाट शब्द है। लेकिन यह हम सभी राव भाट समाज पर लागू नहीं समझें ये, राव भट समाज पर लागू नहीं होता जोकि, परम्परा वंसावली का काम / वंसावली संरक्षण का काम बहुत ही पुराने समय से यानी जब कागज भी नहीं था उसके पहले से वंसावली का कार्य करते आ रहे हैं। ऐसा लगता है कि आपने कौतुक वश, बिना किसी पूर्ण जानकारी के जिस तरिके से लेख तैयार कर शेयर कर दिया है ये किसी भी ऐंगल से उचित नहीं है।
ये अलग बात है कि, राव भट समाज को क्षेत्रिय नाम यानी कहीं राव जी कहीं जागा जी ऐसे ही- बारेठ,भाट,पटिया जी कुल मिलाकर काशमीर से कन्या कुमारी तक अलग अलग नामों से जाना पहचाना जाता है ईसलिये पहले भाट शब्द का ईतिहाश पूर्ण
रुप से सूनिश्चित करें ईसके बाद ही कोई लेख लिखें, हमसब के हित में उचित होगा।


लक्ष्मीनारायण राव भट/राव भाट on 20-08-2019

आपने जो लिखा है संस्कृत के शब्द भट्ट का अपभृंश भाट शब्द है ये उचित है।
लेकिन, ईसके आगे जो लेख आपके द्वारा लिखा गया है बाकी का लेख हम सभी रावभाट/रावभट समाज पर लागू नहीं होता और किसी भी ऐंगल से लागू नहीं होता ये समाज जोकि, परम्परा से वंसावली का काम/वंसावली लेखन व संरक्षण का काम बहुत ही पुराने समय से यानी जब कागज भी नहीं था उसके पहले से मौखिक काल से वंसावली का कार्य रावभट समाज के लोग करते आ रहे हैं। ईन्हे ब्रम्हभट के नाम भी जाना जाता है।
ऐसा लगता है कि आपने अपने कौतुक वश, बिना किसी पूर्ण जानकारी के जिस तरिके से लेख तैयार कर शेयर कर दिया है ये किसी भी ऐंगल से उचित नहीं है।
ये अलग बात है कि, राव भट समाज को अलग अलग क्षेत्रों में क्षेत्रिय नामों से यानी कहीं रावजी कहीं जागाजी ऐसे ही- बारेठ, भाट, पटियाजी कुल मिलाकर काशमीर से कन्या कुमारी तक अलग अलग नामों से जाना पहचाना जाता है ईसलिये पहले भाट शब्द का ईतिहाश पूर्ण रुप से सूनिश्चित करें ईसके बाद ही कोई लेख लिखें, हमसब के हित में उचित होगा।


Subhash singh rao on 11-08-2019

अपनी हद में रहकर कोई लेख लिखे जब जानकारी ना हो तो अपनी ऐसे तेसी ना कराये, जो दुनिया का ईतीहास रखते है उनका ईतीहास तू बतायेगा, जिस तरह से तू लिख रहा क्या प्रमाण हे तेरे पास, delete कर ईस पोस्ट को, भड़वे तुझे बडा पता है रावो के बारे में, साले जुते पड़ेगे


Juharsinghrao on 31-07-2019

Rao or bhat utpatti ki sahi jankari pradan karave.


bhat samaj ke goat on 30-06-2019

bhaat samaj ke goat

amarsinghbhatkhajuwala on 27-06-2019

banjarasamajkoaarkshanmilaparbhatjatikonahismajmejagruktakikmihe

Dhaniramchauhan on 12-05-2019

U. P. Me ye dasansi pandit kahe jate hai .ye keval chhatriya bans ke ghar hi mangte the. Sach kya hai.

Surinder Kumar bhaat on 12-05-2019

Kia ja shch ha ke hamari jat ragisted NY ha

Sunil on 12-05-2019

Bhaat brahmman h Ya nahi h to kuon se hBrahman

deepak rao rj bhilwara on 05-04-2019

my question is
who rao and who bhat
alag alag samaj ke alag alag bhat hote he example rajasthan me gadri bhat jat ke bhat meghvanshi bhat and etc bahut samaj ke bhat he or rao bhat ki goutra he so plz me logo se yanhi kahunga ki rao bhat ka nam charan samaj ke saath na jode
thanks people


दीपक भटट on 15-01-2019

भाट जाति का कृपया कर सही इतिहास बताऐं एवं कवि चंद बरदाई जी के अलावा हमारी जाति के और कोई महापुरुष हों तो बताने का कष्ट करें


Gyan prakash sharma bramhbhatt mo9918311249 on 06-11-2018

Bramh bhatt ke vansaj arya bhatt bad bhatt raja dasrath ke mantri sumatr ji bhatt prithviraj chauhan ke mantri chandrvardaai bhatt akbar ke mantri birbal bhatt aise aor bhi bramhbhatt haijo mai likh nahi sakta

Pandit Ashutosh Bhatt on 05-11-2018

Bhatt aur bhaat me antar hota h, kisi ko neecha dikhane k liye uske itihas ko galat nahi batana chahiye bhatt, Chandra Bardai, tatya tope, surdas, jagnik, birbal etc. Bahut saare naam is caste se aate h. So recognize yourself and be curious about your history

अर्जुन दास भाट on 24-10-2018

भाट समाज की उत्पत्ति

Santosh sukla on 25-09-2018

Rajkavi chandvardai ke vanshaj bhat hote hai

Rohit bhatt on 30-08-2018

Bhatt ko brahmino ki koon si sreni me rkhha gya hai


BAROT BHAGVANBHAI RAJUBHAI on 21-08-2018

DEAR SIR,
HAM LOG RAJSTHAN ME BHAT KE MAN SE JANE JATE HE OR GUJARAT ME HAME TURI BAROT SE JANE JATE HE HAMARE PURVAJ DADA PAD DATA VANSAVALI LIKHNEKA KAM KATE THE JO PAHELE KANBU KE BHAT SE JANE JATE THE PAR SAMY OR SANJOGOKE KARAN HAMARE SATH KUCH HADSA HONE KE KARAN AB MEGVAN KE BHAT KE RUP ME RAJSTHAN ME JANE JATE HE HAMARE PAS ABHI BHI MEGVANSEKE CHOPDE (VAHIVANCHI) HE KRUPA KARKE HAME HAMARA ETIHAS HO SAKE TO BATANEKI KRIPA KARE.
THANKS,
BHAGVANBHAI RAJUBHAI BAROT
7698008988




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