राजस्थान की प्राचीन सभ्यता

Rajasthan Ki Pracheen Sabhyata

Gk Exams at  2018-03-25

Pradeep Chawla on 11-10-2018

  • राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले हुयी इस सभ्यता की प्राप्ति
  • राजस्थान की सबसे प्राचीन नगरीय सभ्यता
  • 1952 ईस्वी में अमलानन्द घोष ने की खोज
  • 1961-69 ई.के बीच उत्खनन कार्य बी.बी.लाल और बी.के.थापर के संयुक्त निर्देशन में
  • नगरीय सभ्यता जिसे सरस्वती सभ्यता भी कहा जाता है
  • कालीबंगा शब्द का अर्थ काले रंग की चुडिया होता है |
  • विश्व में सबसे पहले दोहरे जूते हुए खेतो के अवशेष यही प्राप्त हुए
  • सरस्वती नदी के विलुप्त होने के बाद वर्तमान में घग्घर नदी बहती है |
  • आकार चुर्तुभुज के समान
  • ताम्र बर्तन और कच्ची मिटटी से बने घरो के प्राप्त हुए अवशेष
  • रबी की फसल (गेहू ,जौ) उगाई जाती थी |
  • यज्ञ वेदिकाए एवं सींग वाले मानव की आकृति के अवशेष

आह्ड की सभ्यता | Ahar Civilisation History in Hindi

  • राजस्थान के उदयपुर जिले में मिले सभ्यता के अवशेष
  • 4000 वर्ष पुरानी सभ्यता
  • राजस्थान की प्राचीन ग्रामीण सभ्यता
  • 1954 में रतनचन्द्र अग्रवाल ने की सभ्यता की खोज
  • इसे ताम्रवटी या धुलकोट या बनास की संस्कृति भी कहा जाता है |
  • 1961 -62 में उत्खनन डा.एच.डी.सांखलीया ने किया
  • लोग ताम्र धातु तथा काले एवं लाल रंग के मृदापात्रो का उपयोग करते थे |
  • मृदापात्र उल्टी तपाई विधि से पकाए जाते थे |
  • यहाँ से मातृदेवी एवं बैल की मुर्तिया प्राप्त हुयी है |
  • यह संस्कृति उदयपुर के अलावा चित्तोडगढ , भीलवाड़ा और डूंगरपुर तक फ़ैली
  • आह्ड ,बालाथल ,गिलुण्ड इसी सभ्यता के पुरास्थल थे |
  • इस सभ्यता के लोग हाथी एवं घोड़े से परिचित थे |

गणेश्वर सभ्यता | Ganeshwar Civilization History in Hindi

  • सीकर के नीमका थाना में मिले सभ्यता के अवशेष
  • कान्तली नदी के किनारे बसी सभ्यता
  • 2800 ईस्वी पूर्व की ताम्र युगीन सभ्यता
  • 1977-78 में आर.सी.अग्रवाल और विजयकुमार ने किया उत्खनन
  • भारत में ताम्रयुगीन सभ्यता की जननी क्योकि सबसे प्राचीन ताम्रयुगीन सांस्कृतिक केंद्र
  • यहा के लोग ताम्र धातु के अलावा अन्य धातु के ज्ञान से अपरिचित थे |
  • भवन निर्माण में सिर्फ पत्थर का उपयोग करते थे ईंटो का नही |
  • ताम्बे के अलावा पत्थर का बाघ , चित्रकारी युक्त बर्तन एवं मछली पकड़ने का काँटा प्राप्त हुआ

बैराठ की सभ्यता | Bairath Sabhyata History in Hindi

  • जयपुर के विराटनगर में मिले सभ्यता के अवशेष
  • इस सभ्यता को लौहयुगीन माना जाता है |
  • 1936 ईस्वी में दयाराम साहनी ने उत्खनन कार्य किया |
  • यह क्षेत्र मुख्यत: पर्वतीय प्रदेश है |
  • पर्वतीय कन्दराओ एवं गुफाओं के प्रागैतिहासिक काल में निवास स्थल के अवशेष मिले है |
  • यहा की भीम डूंगरी ,गणेश डूंगरी एवं बीजक डूंगरी में 100 से भी ज्यादा शैलचित्र प्राप्त हुए है |
  • पूर्व मौर्यकालीन एवं मौर्यकालीन सभ्यताओ के अवशेष
  • अशोक कालीन बौध स्तूप , मन्दिर एवं बौद्ध मठ के अवशेष
  • भ्रावु का शिलालेख
  • चीनी यात्री हेन्साग ने की बैराठ की यात्रा की थी

बागौर की सभ्यता | Bagore Sabhyta History in Hindi

  • भीलवाडा जिले में मिले अवशेष
  • वी.एन मिश्र एवं एल.एस.लैशमी ने किया उत्खनन
  • कोठारी नदी के किनारे पनपी सभ्यता
  • 3000 ईस्वी पूर्व की उत्तरपाषाणकालीन सभ्यता स्थल
  • उत्खनन में बोतल के आकार के बर्तन
  • हाथ एवं कान में पहनने के लिए शीशे के गहने

बालाथल की सभ्यता | Balathal Sabhyta History in Hindi

  • उदयपुर जिलें में मिले अवशेष
  • सन 1993 में वी.एन.मिश्र ने किया उत्खनन
  • समय काल 3000 ईस्वी पूर्व से 2500 ईस्वी पूर्व
  • ताम्रयुगीन सभ्यता जिसमे मिले ताम्बे के आभूषण
  • उत्खनन में बड़ा भवन , दुर्ग जैसी संरचना ,सांड-कुत्ते की मूर्तियों के अवशेष




Comments Bigb kumawat on 12-05-2019

ताम्रवती सभ्यता कोनसी थी

Bhèem on 12-05-2019

मृभाण्ड कहा मीले



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