वीर सतसई सूर्यमल्ल मिश्रण

Veer Satsai Suryamall Mishrann

Gk Exams at  2018-03-25

GkExams on 12-05-2019

सूर्यमल्ल मिश्रण, जन्म- 1815 ई., बूँदी, राजस्थान मृत्यु- 1863 ई.] राजस्थान के हाड़ा शासक महाराव रामसिंह के प्रसिद्ध दरबारी कवि थे। इनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध रचना वंश भास्कर है, जिसमें बूँदी के चौहान शासकों का इतिहास है। इनके द्वारा रचित अन्य ग्रंथ वीर सतसई, बलवंत विलास व छंद मयूख हैं। वीर रस के इस कवि को रसावतार कहा जाता है। सूर्यमल मिश्रण को आधुनिक राजस्थानी काव्य के नवजागरण का पुरोधा कवि माना जाता है। ये अपने अपूर्व ग्रंथ वीर सतसई के प्रथम दोहे में ही अंग्रेज़ी दासता के विरुद्ध बिगुल बजाते हुए प्रतीत हुए।



अपूर्व ग्रंथ वीर सतसई के प्रथम दोहे में ही अंग्रेज़ी दासता के विरुद्ध बिगुल बजाते हुए प्रतीत हुए।[1]



जन्म तथा शिक्षा

सूर्यमल्ल मिश्रण का जन्म राजस्थान में बूँदी ज़िले के एक प्रतिष्ठित परिवार में संवत 1872 (1815 ई.) में हुआ था। बूँदी के तत्कालीन महाराज विष्णु सिंह ने इनके पिता कविवर चंडीदान को एक गाँव, लाखपसाव तथा कविराजा की उपाधि प्रदान की थी। सूर्यमल्ल मिश्रण अपनी बाल्यावस्था से ही प्रतिभा संपन्न थे। अध्ययन में विशेष रुचि होने के कारण संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, पिंगल, डिंगल आदि कई भाषाओं में इन्हें दक्षता प्राप्त हो गई थी। कवित्व शक्ति की विलक्षणता के कारण अल्पकाल में ही इनकी ख्याति चारों ओर फैल गई।



सूर्यमल्ल मिश्रण की छ: पत्नियाँ थीं, जिनके नाम थे- दोला, सुरक्षा, विजया, यशा, पुष्पा और गोविंदा। संतानहीन होने के कारण इन्होंने मुरारीदान को गोद ले कर अपना उत्तराधिकारी बनाया था।

रचना

बूँदी नरेश महाराव रामसिंह के आदेशानुसार संवत 1897 में इन्होंने वंश भास्कर की रचना की। इस ग्रंथ में मुख्यत: बूँदी राज्य का इतिहास वर्णित है, किंतु यथाप्रसंग अन्य राजस्थानी रियासतों के व्यक्तियों और प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं की भी चर्चा की गई है। युद्ध-वर्णन में जैसी सजीवता इस ग्रंथ में है, वैसी अन्यत्र दुर्लभ है। वंश भास्कर को पूर्ण करने का कार्य कवि सूर्यमल के दत्तक पुत्र मुरारीदान ने किया था। राजस्थानी साहित्य में बहुचर्चित इस ग्रंथ की टीका कविवर बारहठ कृष्णसिंह ने की है। वंश भास्कर के कतिपय स्थल भाषाई क्लिष्टता के कारण बोधगम्य नहीं है, फिर भी यह एक अनूठा काव्य-ग्रंथ है। इनकी वीरसतसई भी कवित्व तथा राजपूत शौर्य के चित्रण की दृष्टि से उत्कृष्ट रचना है।



सम्मान

महाराज बूँदी के अतिरिक्त राजस्थान और मालवा के अन्य राजाओं ने भी सूर्यमल्ल मिश्रण का यथेष्ट सम्मान किया। सूर्यमल्ल मिश्रण ने वंश भास्कर नामक अपनी पिंगल काव्य रचना में बूँदी राज्य के विस्तृत इतिहास के साथ-साथ उत्तरी भारत का इतिहास तथा राजस्थान में मराठा विरोधी भावना का उल्लेख किया है। वे चारणों की मिश्रण शाखा से संबद्ध थे। वे वस्तुत: राष्ट्रीय-विचारधारा तथा भारतीय संस्कृति के कवि थे।



निधन

ऐश्वर्य तथा विलासिता का उपभोग करने वाले कवि सूर्यमल्ल मिश्रण की ख़ास विशेषता यह थी कि इनके काव्य पर इसका विपरीत प्रभाव नहीं पड़ सका है। इनकी श्रृंगारपरक रचनाएँ भी संयमित एवं मर्यादित हैं। विक्रम संवत 1920 (1863 ई.) में इनका निधन हो गया।



Comments Jitendra meena on 16-09-2020

सूर्यमल मिश्रण की वीर सतसई रचना की लैंग्वेज बोले तो डिंगल है या पिंगल है

गगन on 05-05-2020

वीर सतसई की भाषा है?

Veer safaai kis bhasha m likhee on 21-01-2020

Veer satsai kis bhasha m likhee .suryamall misharn n

विशाल on 12-05-2019

वीर सतसई सूर्य मल्ल मिश्रण द्वारा कोनसी भाषा में लिखी गयी हैं?



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