भारत के भाषा परिवार pdf

Bharat Ke Bhasha Pariwar pdf

Pradeep Chawla on 12-05-2019

भारत में विश्व के सबसे चार प्रमुख भाषा परिवारों की भाषाएँ बोली जाती है। सामान्यत: उत्तर भारत में बोली जाने वाली भारोपीय परि






























वार की भाषाओं को आर्य भाषा समूह, दक्षिण की भाषाओं को द्रविड़ भाषा समूह,

ऑस्ट्रो-एशियाटिक परिवार की भाषाओं को भुंडारी भाषा समूह तथा पूर्वोत्तर

में रहने वाले तिब्बती-बर्मी, नृजातीय भाषाओं को चीनी-तिब्बती (नाग भाषा

समूह) के रूप में जाना जाता है।









अनुक्रम



  • 1हिन्द आर्य भाषा परिवार
  • 2द्रविड़ भाषा परिवार
  • 3आस्ट्रो-एशियाटिक भाषा परिवार
  • 4चीनी-तिब्बती भाषा परिवार
  • 5अंडमानी भाषा परिवार
  • 6इन्हें भी देखें
  • 7बाहरी कड़ियाँ






हिन्द आर्य भाषा परिवार

यह परिवार भारत का सबसे बड़ा भाषाई परिवार है। इसका विभाजन इन्डो-युरोपीय (हिन्द यूरोपीय) भाषा परिवार से हुआ है, इसकी दूसरी शाखा इन्डो-इरानी भाषा परिवार है जिसकी प्रमुख भाषायें फारसी, ईरानी, पश्तो,

बलूची इत्यादि हैं। भारत की दो तिहाई से अधिक आबादी हिन्द आर्य भाषा

परिवार की कोई न कोई भाषा विभिन्न स्तरों पर प्रयोग करती है। जिसमें संस्कृत समेत मुख्यत: उत्तर भारत में बोली जानेवाली अन्य भाषायें जैसे: हिन्दी, उर्दू, मराठी, नेपाली, बांग्ला, गुजराती, कश्मीरी, डोगरी, पंजाबी, उड़िया, असमिया, मैथिली, भोजपुरी, मारवाड़ी, गढ़वाली, कोंकणी इत्यादि भाषायें शामिल हैं।



द्रविड़ भाषा परिवार

यह

भाषा परिवार भारत का दूसरा सबसे बड़ा भाषायी परिवार है। इस परिवार की

सदस्य भाषायें ज्यादातर दक्षिण भारत में बोली जाती हैं। इस परिवार का सबसे

बड़ा सदस्य तमिल है जो तमिलनाडु में बोली जाती है। इसी तरह कर्नाटक में कन्न्ड़, केरल में मलयालम और आंध्रप्रदेश में तेलुगू इस परिवार की बड़ी भाषायें हैं। इसके अलावा तुलू और अन्य कई भाषायें भी इस परिवार की मुख्य सदस्य हैं। अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान और भारतीय कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में इसी परिवार की ब्राहुई भाषा भी बोली जाती है जिसपर बलूची और पश्तो जैसी भाषाओं का असर देखने को मिलता है।



आस्ट्रो-एशियाटिक भाषा परिवार

यह प्राचीन भाषा परिवार मुख्य रूप से भारत में झारखंड, छत्तिसगढ, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल के ज्यादातर हिस्सों में बोली जाती है। संख्या की दृष्टि से इस परिवार की सबसे बड़ी भाषा संथाली या संताली है। यह पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड और असम में मुख्यरूप से बोली जाती है। इस परिवार की अन्य प्रमुख भाषाओं में हो, मुंडारी, संथाली या संताली, खड़िया, सावरा इत्यादी भाषायें हैं।



चीनी-तिब्बती भाषा परिवार

इस

परिवार की ज्यादातर भाषायें भारत के सात उत्तर-पूर्वी राज्यों जिन्हें

सात-बहनें भी कहते हैं, में बोली जाती है। इन राज्यों में अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, मिज़ोरम, त्रिपुरा और असम

का कुछ हिस्सा शामिल है। इस परिवार पर चीनी और आर्य परिवार की भाषाओं का

मिश्रित प्रभाव पाया जाता है और सबसे छोटा भाषाई परिवार होने के बावज़ूद इस

परिवार के सदस्य भाषाओं की संख्या सबसे अधिक है। इस परिवार की मुख्य

भाषाओं में नगा, मिज़ो, म्हार, मणिपुरी, तांगखुल, खासी, दफ़ला, तथा आओ इत्यादि भाषायें शामिल हैं।



अंडमानी भाषा परिवार

जनसंख्या

की दृष्टि से यह भारत का सबसे छोटा भाषाई परिवार है। इसकी खोज पिछले दिनों

मशहूर भाषा विज्ञानी प्रो॰ अन्विता अब्‍बी ने की। इसके अंतर्गत

अंडबार-निकाबोर द्वीप समूह की भाषाएं आती हैं, जिनमें प्रमुख हैं- अंडमानी,

ग्रेड अंडमानी, ओंगे, जारवा आदि।



Comments नीतू on 08-07-2021

भारत के विभिन्न भाषा परिवार के बारे में बताएं

Kulnishth vargikarn on 15-06-2021

Kulnishth vargikarn kontya bhasha sastrashi sambandhit aahe

anu on 12-05-2019

hindi hindustani ka savrup



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