भारतीय आर्य भाषा के प्रकार

Bharateey Aary Bhasha Ke Prakar

GkExams on 12-05-2019


हिन्द-आर्य भाषाओं में लगभग २१० (एसआईएल अनुमान) भाषाएँ और बोलियाँ आती हैं जो एशिया में बहुत से लोगों द्वारा बोली जाती हैं; यह भाषा परिवार हिंद-इरानी भाषा परिवार का भाग है।

हिन्द-आर्य भाषाएँ हिन्द-यूरोपीय भाषाओं की हिन्द-ईरानीशाखा की एक उपशाखा हैं, जिसे भारतीय उपशाखा भी कहा जाता है। इनमें से अधिकतर भाषाएँ संस्कृत से जन्मी हैं। हिन्द-आर्य भाषाओं में आदि-हिन्द-यूरोपीय भाषा के घ, ध और फ जैसे व्यंजन परिरक्षित हैं, जो अन्य शाखाओं में लुप्त हो गये हैं। इस समूह में यह भाषाएँ आती हैं : संस्कृत, हिन्दी, उर्दू, बांग्ला, कश्मीरी, सिन्धी, पंजाबी, नेपाली, रोमानी, असमिया, गुजराती, मराठी, इत्यादि।[1]

हिन्द-आर्य Indic
भौगोलिक
विस्तार:
दक्षिण एशिया
भाषा-परिवार:हिन्द-यूरोपीय
हिन्द-ईरानी
हिन्द-आर्य
उपश्रेणियाँ: उत्तरी हिन्द-आर्य पश्चिमोत्तरी हिन्द-आर्य केन्द्रीय हिन्द-आर्य पूर्वी हिन्द-आर्य द्वीपीय हिन्द-आर्य दक्षिणी हिन्द-आर्य
आइसो ६३९-२ and ६३९-५:inc
Indoarische Sprachen

मुख्य हिन्द-आर्य भाषाओं का विस्तार (उर्दू, मध्य एशिया में बोली जाने वाली पारया भाषा, फ़ीजी हिन्दुस्तानी और यूरोप में बोले जानी वाली रोमानी भाषा नहीं दिखाई गई हैं)

शाखाएँ और उपशाखाएँसंपादित करें

गत दो शताब्दियों में भाषावैज्ञानिकों ने हिन्द-आर्य भाषाओं को कई प्रकार से वर्गीकृत करा है और यह व्यवस्थाएँ समय-समय पर बदलती रही हैं। आधुनिक काल में निम्न व्यवस्था अधिकतर भाषावैज्ञानिकों के लिए मान्य है और मसिका (१९९१) व काउसेन (२००६) के प्रयासों पर आधारित है।

दार्दीसंपादित करें

मुख्य लेख : दार्दी भाषाएँ

कुछ उल्लेखनीय भाषाएँ हैं:

कश्मीरी, पाशाई, खोवार, शीना, कोहिस्तानी। यह मुख्य रूप से पश्चिमोत्तर भारत, उत्तरी पाकिस्तान और पूर्वोत्तरी अफ़्ग़ानिस्तान में बोली जाती हैं।

उत्तरी क्षेत्रसंपादित करें

मध्य पहाड़ी
गढ़वाली, कुमाऊँनी
पूर्वी पहाड़ी
नेपाली (गोरखाली)

पश्चिमोत्तरी क्षेत्रसंपादित करें

डोगरी-कांगड़ी (पश्चिमी पहाड़ी)
डोगरी, कांगड़ी, मंडेआली
पंजाबी
दोआबी, लहन्दा, सराइकी, हिन्दको, माझी, मालवाई
सिन्धी

पश्चिमी क्षेत्रसंपादित करें

राजस्थानी
मारवाड़ी, राजस्थान
गुजराती
भील
अहिराणी

मध्य क्षेत्र (हिन्दी)संपादित करें

पश्चिमी हिन्दी
हिन्दुस्तानी, हरियाणवी
पूर्वी हिन्दी
बिहारी (जिसमें भोजपुरी, मैथिली शामिल हैं), कैरेबियाई हिंदुस्तानी, फ़ीजी हिन्दी, छत्तीसगढ़ी

डोमारी–रोमानी और पर्या ऐतिहासिक रूप से मध्य क्षेत्र की सदस्य थी लेकिन भौगोलिक दूरी के कारण उनमें कई व्याकरणीय और शाब्दिक बदलाव आए हैं।

पूर्वी क्षेत्र (मगधी)संपादित करें

यह भाषाएँ मगधी अपभ्रंश से विकसित हुई हैं।[2]

बिहारी
भोजपुरी, मैथिली, कैरेबियाई हिंदुस्तानी, फ़ीजी हिन्दी
थारु
ओड़िया
हल्बी
बंगाली-असामिया

दक्षिणी क्षेत्रसंपादित करें

यह भाषाएँ महाराष्ट्री प्राकृत से विकसित हुई हैं।

मराठी
कोंकणी
द्वीपीय हिन्द-आर्य
सिंहली, मालदीवी (मह्ल, दिवेही)

इन द्वीपीय भाषाएँ में कुछ आपसी समानताएँ हैं जो मुख्यभूमि की हिन्द-आर्य भाषाओं में उपस्थित नहीं हैं।

अवर्गीकृतसंपादित करें

निम्नलिखित भाषाएँ एक-दूसरे से सम्बन्धित हैं लेकिन हिन्द-आर्य परिवार में इनका वर्ग अभी श्रेणीकृत नहीं हो पाया है:


कुसवारी[3]

दनुवार (राय), बोट, दरइ

चिनाली-लाहुल लोहार[4]

चिनाली, लाहुल लोहार

निम्नलिखित भाषाओं पर अधिक अध्ययन नहीं हुआ है और ऍथ्नोलॉग १७ में इन्हें हिन्द-आर्य में अवर्गीकृत लिखा गया है:

  • कंजरी (पंजाबी?), ओड (मराठी?), वागड़ी बूली(हक्कीपिक्की), आंध, कुमहाली, सोन्हा (शायद मध्य क्षेत्र की हो)।
खोलोसी भाषा

खोलोसी भाषा हाल ही में दक्षिणी ईरान के दो गाँवों में बोली जाती मिली है और यह स्पष्ट रूप से एक हिन्द-आर्य भाषा है लेकिन अभी वर्गीकृत नहीं करी गई है।[5]



Comments सु on 09-04-2021

भारतीय आर्य भाषाओं के प्रकार बताकर स्पष्ट किजीए

Raj on 04-03-2021

bhartiya arya bhasha ke prakar batakar ek prakar spasht kijiye

Sayali on 28-02-2019

भारतीय आर्यभाषाओं के प्रकार बताकर एक प्रकार स्पष्ट कीजिए



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