संसदीय शासन प्रणाली की विशेषताएं

Sansadiya Shashan Pranali Ki Visheshtayein

Gk Exams at  2018-03-25


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Pradeep Chawla on 27-09-2018

संसदीयप्रणालीकेतत्वऔरविशेषताएं


नीचे संसदीय प्रणाली के तत्व और विशेषताएं बताईं गईं हैं

  1. नाममात्र का और वास्तविक प्रमुखः राज्य का प्रमुख औपचारिक पद पर होता है और वह नाममात्र का कार्यकारी होता है। उदाहरण के लिए, राष्ट्रपति।

भारत में, सरकार का प्रमुख प्रधानमंत्री होता है जो वास्तविक कार्यकारी है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 75 राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री को नियुक्त किए जाने की बात कहता है। अनुच्छेद 74 के अनुसार मंत्रिपरिषद की अध्यक्षता करने वाले प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को उनके कार्यों को करने में सहायता और परामर्श देंगे।

  1. कार्यकारिणी विधायिका का एक हिस्सा है– कार्यकारिणी विधायिका का हिस्सा है। भारत में, किसी व्यक्ति को कार्यकारिणी का सदस्य बनने के लिए उसे संसद का सदस्य होना चाहिए। हालांकि, संविधान यह सुविधा प्रदान करता है कि अगर कोई व्यक्ति संसद सदस्य नहीं है तो उसे अधिकतम लगातार छह माह की अवधि तक मंत्री नियुक्त किया जा सकता है, उसके बाद वह व्यक्ति मंत्री पद पर नहीं रह सकता (यदि वह छह माह के अन्दर संसद का सदस्य नहीं बनता है तो)।
  2. बहुमतदलनियमः लोकसभा चुनावों में अधिक सीटों पर जीत दर्ज करने वाला दल सरकार बनाता है। भारत में राष्ट्रपति, लोकसभा में बहुमत दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते हैं। राष्ट्रपति इस नेता को प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त करते हैं और बाकी के मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करते हैं। अगर किसी भी दल को बहुमत प्राप्त नहीं होता, तो ऐसी स्थिति में, राष्ट्रपति दलों के गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं।
  3. सामूहिकजिम्मेदारीः मंत्री परिषद संसद के लिए सामूहिक रूप से जिम्मेदार होता है। संसद का निचला सदन अविश्वास प्रस्ताव पारित कर सरकार को बर्खास्त कर सकता है। भारत में, जब तक लोकसभा में बहुमत रहता है तभी तक सरकार रहती है। इसलिए, लोकसभा के पास सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार होता है।
  4. सत्ताकेकेंद्रमेंप्रधानमंत्रीः भारत में प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यकारी होते हैं। वे सरकार, मंत्रिपरिषद और सत्तारूढ़ सरकार के प्रमुख होते हैं। इसलिए, सरकार के कामकाज में उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होती है।
  5. संसदीयविपक्षः संसद में कोई भी सरकार शत– प्रतिशत बहुमत प्राप्त नहीं कर सकती। विपक्ष राजनीतिक कार्यकारी द्वारा अधिकार के मनमाने ढंग से उपयोग की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  6. स्वतंत्रलोकसेवाः लोक सेवक सरकार को परामर्श देते हैं औऱ उनके फैसलों को लागू करते हैं। मेधा– आधारित चयन प्रक्रिया के आधार पर लोक सेवकों की स्थायी नियुक्ति की जाती है। सरकार बदलने के बाद भी उनकी नौकरी की निरंतरता बनी रहती है। लोक सेवा कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के निष्पादन में दक्षता सुनिश्चित करता है।
  7. दोसदनोंवालीविधायिकाः भारत समेत, अधिकांश देश संसदीय प्रणाली अपनाते हैं और वहां दो सदनों वाली विधायिका है। इन सभी देशों के निचले सदन के सदस्यों का चुनाव जनता करती है। निचला सदन सरकार के कार्यकाल पूरा होने या बहुमत की कमी की वजह से सरकार न बना पाने की वजह से भंग किया जा सकता है। भारत में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की अनुशंसा पर लोकसभा भंग कर सकते हैं।
  8. गोपनीयताः इस प्रणाली में कार्यकारिणी के सदस्यों को कार्यवाहियों, कार्यकारी बैठकों, नीतिनिर्माण आदि जैसे मामलों में गोपनीयता के सिद्धांत का पालन करना होगा। भारत में, अपने कार्यालय में प्रवेश से पहले मंत्री गोपनीयता की शपथ लेते हैं।




Comments Amit on 12-05-2019

Salsa diya sashan pranali ki visheshta

Vikash on 12-05-2019

Sansdiy saasan parnaali ki vishastay

Vijay kumar patel on 16-08-2018

Sansadiya shashan vishashata



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