कला और संस्कृति का सम्बन्ध

Kala Aur Sanskriti Ka Sambandh

Gk Exams at  2020-10-15

Pradeep Chawla on 12-05-2019

18 Apr 2011

कला और संस्कृति का रिश्ता कुछ ऐसा है..



कला और संस्कृति का आपसी रिश्ता काफी गहरा है। कला संस्कृति की प्रवक्ता होती है। कला के माध्यम से ही संस्कृति हमारे जीवन में अभिव्यक्ति पाती है। कला अपने सांस्कृतिक सरोकारों के साथ आगे बढ़ती है। इसकी अभिव्यक्ति कला के विविध रूपों (संगीत, नृत्य, नाटक ,चित्रकला ,स्थापत्य कला, सिनेमा ,फोटोग्राफी, साहित्य आदि ) में जीवंत होती है।



रामधारी सिंह दिनकर नें संस्कृति के चार अध्याय के उपसंहार में लिखते हुए कहा है कि प्रत्येक सभ्यता , प्रत्येक संस्कृति अपने आप में पूर्ण होती है। उसके सभी अंश और सभी पहलू एक दूसरे पर अवलम्बित और सबके सब किसी केंद्र से संलज्न होते हैं। संस्कृतियां जब बदलती हैं, तब खान-पान,रहन-सहन और पोशाक भले ही बदल जाएं , किंतु उनका मन नहीं बदलता, सोचने की पद्धति नहीं बदलती और जीवन को देखने का दृष्टिकोण उनका एक ही रहता है। उपरोक्त बातों में हमें संस्कृति की परिभाषा की एक सूक्ष्म झलक मिलती है।



रामधारी सिंह दिनकर के अनुसार, संस्कृति मानव समाज में उसू तरह व्याप्त है, जिस तरह फूलों में सुगंध और दूध में मक्खन। इसका निर्माण एक या दो दिन में नहीं होता। कोई संस्कृति युग-युगान्तर में निर्मित होती है।



नृतित्वशास्त्री टॉयलर के अनुसार ,संस्कृति वह संकुल समग्रता है, जिसमें ज्ञान,विश्वास , कला ,आचार , विधि , प्रथा तथा अन्य क्षमताओं और आदतों के समावेश रहता है, जिन्हें मनुष्य समाज के सदस्य के रूप में उपार्जित करता है।



टीएस इलियट के अनसार शिष्ट व्यवहार , ज्ञानार्जन , कलाओं के आस्पादन आदि के अतिरिक्त किसी जाति अथवा राष्ट्र की वे समस्त क्रियाएं व कार्य जो उसे विशिष्ट बनाते हैं, उसकी संस्कृति के अंग हैं।



अपरोक्त परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि संस्कृति किसी भी समाज की परंपरा से मिली भौतिक व अभौतिक विरासत का नाम है। कला, संस्कृति का हिस्सा होती है और कला के माध्यम से कोई भी संस्कृति अपनी अभिव्यक्ति पाती है। अत: हम कला एवं संस्कृति को इसी रूप में देखते हैं।



आजादी के बाद से कला एवं संस्कृति के लोकप्रियकरण हुआ है। अभिजात्य वर्गों तक सिमटी कला को आम लोगों की स्वीकार्यता मिली। जिसके फलस्वरूप इसका तेजी से विकास संभव हो सका। संस्कृति को साथ लेकर चले बिना किसी देश का वास्तविक विकास संभव नही है।



भारत एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाला देश रहा है। जिसकी कीर्ति आज भी सारे विश्व में अपनी संपूर्ण आभा के साथ विद्यमान है। अखबार और पत्रिकाएं किसी देश और समाज की जीवंत धडक़नों स्पंदन का दस्तावेज होते हैं। अखबारों ने भारत की वैभवशाली सांसकृतिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ आम जनमानस तक इसे सही स्वरूप में पहुंचाने का भी काम पूरी तत्परता और लगन के साथ किया है।



Comments Ranveer Singh on 27-10-2020

जुआ छवि क्या है

वेवी on 09-10-2020

भारतीय कला और भारतीय संस्कृति में आप किस तरह का संबंध पाते हैं

Anshul kurmi on 25-08-2020

Bhartiye kalao our bhartiye sanskrati me aap kis tarah ka sambandha pate he

Kala aur sanskrti kaya he on 19-12-2019

Kala aur sanskrti kaya he

sadhana jat on 12-05-2019

Kala aur sanskriti me kya sambandh he



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