रसखान के दोहे का अर्थ

RasKhan Ke Dohe Ka Arth

GkExams on 18-12-2018


हिन्दी भक्ति साहित्य में रसखान का स्थान अति आदर के साथ स्मरणीय है।इनका वास्तविक नाम सैयद इब्राहिम था एवं खान इनकी वंसानुगत उपाधि है।कालांतर में इनका साहित्यिक उपनाम रसखान प्रसिद्ध हुआ।इनका जन्म संवत 1615 में हुआ था पर जन्म स्थान संभवतः दिल्ली या उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के पिहानी ग्राम में हुआ था।वे हिन्दी संस्कृत एवं फारसी के अच्छे ज्ञाता थे एवं इनका संबंध दिल्ली के राजधराने से भी था।प्रारम्भ में ये दिल्ली में रहते थे परन्तु शीध्र हीं किसी वैश्नव मंडली
के सम्र्पक में आने पर कृश्न प्रेम नें उन्हें ब्रज की गलियांे का दीवाना बना दिया और
वे जीवन पर्यन्त ब्रज एवं कृश्न प्रेम में रम गये। कहा जाता है कि गोविंद कुंड पर रसखान अहर्निश कृश्न के प्रेम में रो रहे थे तो कृश्न ने उन्हें साक्षात दर्शन दिया और
उन्होंने स्वंय हीं श्री विठ्ठल नाथ गुसांई को कहकर रसखान को श्री गुसाई के मन्दिर
में ले आये।वहीं पर जीवन पर्यंत रसखान ने कृश्न को अपना प्रेमी मानकर गोपी भाव की सिद्घि प्राप्त की।उनका समस्त काब्य कृश्न भक्ति के रस में सराबोर है।संबत 1685 में ब्रजमें हीं इस महान आत्मा का देहावसान हुआ।


रसखान के दोहे निम्नांकित 2 खंडों में पठनीय हैं।

  1. कृष्ण छवि/Krishna
  2. प्रेम/Love



Comments Sunandamma NG on 15-07-2021

Please send me the Raskhan ke savye gunj gare sir more pakha aru chal gaynd kimo man bavye uska Bhavarth.

Raskhan dohe ka arth on 18-11-2020

Raskhan dohe ka arth



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