समतल दर्पण का चित्र

Samtal Darpan Ka Chitra

Gk Exams at  2018-03-25


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GkExams on 14-02-2019





आप एक दर्पण के सामने खडे़ हो जाइये। अपको दर्पण में अपना प्रतिबिंब दिखाई पड़ता है। यह प्रकाश के परावर्तन के कारण होता है।


प्रकाश जब किसी अपारदर्शी वस्तु से टकराता है तो उस वस्तु के पार नहीं जा सकता इसलिये उस वस्तु से टकरा कर वापस लौटता है। यदि वस्तु की सतह खुरदुरी हो तो प्रकाश उससे टकराकर चारों ओर फैल जाता है। यदि वस्तु की सतह चिकनी और चमकदार हो तो प्रकाश की किरणें एक विशि‍ष्ट तरह से लौटती हैं। इसे ही प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।




ऐसी सतह जो अपरादर्शी, चिकनी और चमकीली हो, दपर्ण कहलाती है। दर्पण साधारणतय: कांच पर चांदी की परत चढ़ाकर बनाये जाते हैं। दर्पण अनेक प्रकार के हो सकते हैं। कुछ दर्पण समतल होते हैं और कुछ गोल। गोल दर्पण की चमकीली सतह यदि अंदर की ओर गोलाई लिये हो तो उसे अवतल दर्पण कहा जाता है और यदि बाहर की ओर गोलाई लिये हो तो उसे उत्तल दर्पण कहा जाता है। इसे समझने के लिये स्टील की एक चमकीली चम्मच लेकर उसमें अपना चेहरा देखो। चम्मच का अंदर का भाग अवतल दर्पण है और उसमें चेहरा बड़ा दिखाई पड़ता है। चम्मच का बाहर का भाग उत्तल दर्पण है और उसमें चेहरा छोटा दिखता है।


परावर्तन के नियम परावर्तन के नियमों को नीचे दिये चित्र से समझा जा सकता है। चित्र में देखो, दपर्ण पर गिरने वाली प्रकाश की किरण को आपतित किरण कहते हैं और दर्पण से टकरा कर लौटने वाली किरण को परावर्तित किरण कहते हैं। किसी सतह पर 90 अंश के कोण पर यदि कोई रेखा खींची जाये तो उसे लंब कहा जाता है। आपतित किरण दर्पण पर लंब के साथ जो कोण बनाती है उसे आपतन कोण कहते हैं और परावर्तित किरण लंब के साथ जो कोण बनाती है उसे परावर्तन कोण कहते हैं। परावर्तन का नियम है कि आपतन कोण और परावर्तन कोण एक दूसरे के बराबर होते हैं।




प्रतिबिंब जब किसी वस्तु से चलने वाली प्रकाश की किरणें किसी अन्य बिन्दु पर एकत्रित हो जाती हैं अथवा किसी अन्य बिन्दु‍ से आती हुई प्रतीत होती हैं, तो वह वस्तुु हमारी आंखों को उस स्थान पर दिखाई पड़ने लगती है। क्योंकि वस्तु वास्तव में उस स्थान पर नहीं है, परंतु वहां पर दिखाई पड़ रही है, इसलिये इसे उस वस्तु का प्रतिबिंब कहा जाता है। यदि प्रकाश की किरणें वास्तव में उस बिन्दु पर एकत्रित हो रही हैं तो ऐसे प्रतिबिंद को पर्दे पर देखा जा सकता है, जैसा हम सिनेमा में देखते हैं। इसे वास्तविक प्रतिबिंब कहते हैं। यदि प्रकाश की किरणें वास्तव में एक बिन्दु पर एकत्रित नहीं होतीं, परंतु किसी बिन्दु से आती हुई प्रतीत होती हैं, तो उससे बने प्रतिबिंब को पर्दे पर नहीं देखा जा सकतेे क्योंकि वहां पर प्रकाश नहीं पड़ रहा होता है। ऐसे प्रतिबिंब को आभासी प्रतिबिंब कहते हें क्योंकि हमें उस वस्तु के वहां पर होने का आभास मात्र होता है।


समतल दर्पण से बना प्रतिबिंब समतल दर्पण से प्रकाश के परावर्तन को नीचे चित्र में दिखाया गया है –

इस चित्र से यह स्पष्ट है कि आपतित किरण जब परावर्तित होती है तो परावर्तित किरण दर्पण के पीछे से आती हुई प्रतीत होती है। इससे जो प्रतिबिंब बनता है वह आभासी प्रतिबिंब होता है जो दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर दि‍खता है जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने होती है। आभासी होने के कारण इस प्रतिबिंब को पर्दे पर नहीं देखा जा सकता।


समतल दर्पण से बना प्रतिबिंब यद्यपि सीधा होता है परंतु वस्तु का दांया हिस्सा बांई ओर, और बांया हिस्सा दांई ओर दिखता है। ऐसा इसीलिये होता है कि परावर्तित किरण की दिशा बदल जाती है। इसे हम दर्पण के सामने खड़े होकर देख सकते हैं। जब हम अपना दायां हाथ हिलाते हैं तो प्रतिबिंब का बायां हाथ हिलता प्रतीत होता है। इसे पार्श्व परिवर्तन कहा जाता है। एक कागज़ पर वर्णमाला के अक्षर लिखकर उसे दर्पण के सामने रखने पर भी सह बात स्पष्ट हो जाती है।





Comments Samtal darpan ka savdganiya on 27-11-2019

Samtal darpan ka Prakash paravartan ki savdhaniya



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